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हिमाचल: शहरी निकायों में लगे झटके बाद अब भाजपा को जिला परिषद की चिंता

Tue, 12 Jan 2021 05:00 AM IST
Krishan Singh सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 12 Jan 2021 05:00 AM IST
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After the setbacks in the urban bodies election, BJP is now worried about the Zilla Parishad in himachal
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप - फोटो : अमर उजाला

हिमाचल प्रदेश के शहरी निकायों में लगे झटके के बाद भाजपा को अब जिला परिषद के चुनावों की चिंता सताने लगी है। शिमला, मंडी, कांगड़ा, सोलन आदि जिलों पर पार्टी खास ध्यान देने जा रही है। मंत्रियों, विधायकों, जिला और मंडल भाजपा अध्यक्षों को इसके लिए खास जिम्मेवारी दी जा रही है। जिला परिषदों और पंचायत चुनावों के लिए एक हफ्ते का वक्त बचा है। भाजपा चाहती है कि जो कमी नगर निकायों में रही है, उसे अब जिला परिषद चुनाव में पूरा किया जाएगा। इससे यह विरोधियों को भी जवाब दे पाएगी। हिमाचल प्रदेश में भाजपा कुछ मंत्रियों के गढ़ों में भी अपनी साख को बनाए नहीं रख पाई है।

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पांवटा में ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी, शाहपुर में सरवीण चौधरी नगर निकायों को नहीं बचा पाए हैं। यहां कांग्रेस काबिज हो गई है। यही नहीं, भाजपा के संगठन महामंत्री पवन राणा और भाजपा विधायक रमेश ध्वाला के गृह क्षेत्र की नगर परिषद ज्वालामुखी में भाजपा को विजय नहीं दिलाई जा सकी है। कई भाजपा विधायकों के यहां भी यही हाल हैं।  हालांकि, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप का कहना है कि भाजपा ने कई क्षेत्रों में अपनी स्थिति बेहतर की है। जहां पर पहले यह कमजोर थी, वहां यह मजबूत होकर उभरी है। पार्टी ने यहां कई सीटें जीती हैं। कश्यप से जब शिमला, मंडी, कांगड़ा, सोलन आदि में ज्यादातर नगर निकायों में हार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस बारे में टिप्पणी नहीं की। 
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शिमला, मंडी, कांगड़ा से बनती हैं सरकारें 
- हिमाचल प्रदेश में शिमला, मंडी और कांगड़ा से ही सरकारें बनती हैं। इन बड़े जिलों पर जिस पार्टी ने पकड़ बनाई है, वे सरकारें ही राज्य में सत्ता में आई हैं। ऐसे में इन जिलों के नगर निकायों से मिले संकेत भाजपा की परेशानी बढ़ाने वाले हैं। इसीलिए भाजपा जिला परिषदों में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतकर डैमेज कंट्रोल करना चाहती है।  भाजपा का मिशन रिपीट 2022 तभी सफल हो पाएगा। 

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