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Shimla News: सीबीएसई में बदलने के बाद ग्रामीण स्कूलों बढ़े दाखिले, शहर में घटे
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खास खबर
रामपुर, रोहड़ू, नेरवा, कुपवी के सरकारी स्कूलों में बढ़ी विद्यार्थियों की संख्या, अच्छी शिक्षा के लिए चुन रहे स्कूल
शहर के लालपानी और छोटा शिमला स्कूल में घटे छात्र
अनिल पंवार
शिमला। जिले के सरकारी स्कूलों को सीबीएसई में बदलने के सरकार के फैसले का ग्रामीण और शहरी इलाकों में असर पड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में जहां सीबीएसई में दाखिला लेने के लिए विद्यार्थियों में होड़ मची हुई है, वहीं राजधानी के सीबीएसई स्कूलों में दाखिले बढ़ने के बजाय घट गए हैं।
शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में सीबीएसई बने सरकारी स्कूलों में ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। शहर के नामी स्कूलों में संख्या घट गई है। शिमला शहर में तीन स्कूल सीबीएसई बोर्ड में बदले हैं। इसमें पोर्टमोर, लालपानी और छोटा शिमला शामिल हैं। यह तीनों ही शहर के नामी स्कूल हैं। उपमंडल स्तर पर सीबीएसई पाठ्यक्रम के लिए छात्रों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। रामपुर बॉयज, रोहड़ू, नेरवा, कुपवी,जुब्बल और कोटी आदि स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ी है। कई स्कूलों में 45 फीसदी तक छात्रों की संख्या बढ़ी है।
प्रदेश सरकार ने जिले में 24 स्कूलों को सीबीएसई बोर्ड में बदला है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में एडमिशन बढ़ने के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि लोगों को सीबीएसई स्कूलों में अच्छी शिक्षा मिलने की उम्मीद है। अभिभावक अच्छी शिक्षा के लिए बच्चों को शहरों में पढ़ाई के लिए भेजते थे, अब वह वापस ला रहे हैं। वहीं जो अभिभावक निजी सीबीएसई स्कूलों में भारी फीस के चलते पढ़ाई नहीं करवा पाते थे वह इन स्कूलों को तवज्जो दे रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में जिन अभिभावकों को लगता था कि उनके बच्चे सीबीएसई का हार्ड सिलेबस नहीं पढ़ पाएंगे वह सीबीएसई बने स्कूलों से अपने बच्चों को एचपी बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में दाखिले दिलवा रहे हैं।
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किस स्कूल में कितने दाखिले हुए
स्कूल का नाम छात्र पहले छात्र अब
पोर्टमोर 2155 2040
छोटा शिमला 729 658
लालपानी 512 412
जिन स्कूलों में बढ़ी संख्या
स्कूल का नाम छात्रों पहले छात्रों संख्या अब
रामपुर 1149 1305
रोहड़ू 800 1250
नेरवा 850 1350
जुब्बल 170 297
कोट
जिले में स्कूलों में दाखिलों की प्रक्रिया चली हुई है। ज्यादातर स्कूलों में दाखिलें बढ़े हैं। शहर में लोगों के पास सीबीएसई स्कूलों के ऑप्शन बहुत हैं। इसके कारण दाखिलों में इजाफा नहीं हुआ है।
-लेखराज भारद्वाज, उप निदेशक शिक्षा विभाग
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रामपुर, रोहड़ू, नेरवा, कुपवी के सरकारी स्कूलों में बढ़ी विद्यार्थियों की संख्या, अच्छी शिक्षा के लिए चुन रहे स्कूल
शहर के लालपानी और छोटा शिमला स्कूल में घटे छात्र
अनिल पंवार
शिमला। जिले के सरकारी स्कूलों को सीबीएसई में बदलने के सरकार के फैसले का ग्रामीण और शहरी इलाकों में असर पड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में जहां सीबीएसई में दाखिला लेने के लिए विद्यार्थियों में होड़ मची हुई है, वहीं राजधानी के सीबीएसई स्कूलों में दाखिले बढ़ने के बजाय घट गए हैं।
शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में सीबीएसई बने सरकारी स्कूलों में ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। शहर के नामी स्कूलों में संख्या घट गई है। शिमला शहर में तीन स्कूल सीबीएसई बोर्ड में बदले हैं। इसमें पोर्टमोर, लालपानी और छोटा शिमला शामिल हैं। यह तीनों ही शहर के नामी स्कूल हैं। उपमंडल स्तर पर सीबीएसई पाठ्यक्रम के लिए छात्रों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। रामपुर बॉयज, रोहड़ू, नेरवा, कुपवी,जुब्बल और कोटी आदि स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ी है। कई स्कूलों में 45 फीसदी तक छात्रों की संख्या बढ़ी है।
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प्रदेश सरकार ने जिले में 24 स्कूलों को सीबीएसई बोर्ड में बदला है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में एडमिशन बढ़ने के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि लोगों को सीबीएसई स्कूलों में अच्छी शिक्षा मिलने की उम्मीद है। अभिभावक अच्छी शिक्षा के लिए बच्चों को शहरों में पढ़ाई के लिए भेजते थे, अब वह वापस ला रहे हैं। वहीं जो अभिभावक निजी सीबीएसई स्कूलों में भारी फीस के चलते पढ़ाई नहीं करवा पाते थे वह इन स्कूलों को तवज्जो दे रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में जिन अभिभावकों को लगता था कि उनके बच्चे सीबीएसई का हार्ड सिलेबस नहीं पढ़ पाएंगे वह सीबीएसई बने स्कूलों से अपने बच्चों को एचपी बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में दाखिले दिलवा रहे हैं।
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किस स्कूल में कितने दाखिले हुए
स्कूल का नाम छात्र पहले छात्र अब
पोर्टमोर 2155 2040
छोटा शिमला 729 658
लालपानी 512 412
जिन स्कूलों में बढ़ी संख्या
स्कूल का नाम छात्रों पहले छात्रों संख्या अब
रामपुर 1149 1305
रोहड़ू 800 1250
नेरवा 850 1350
जुब्बल 170 297
कोट
जिले में स्कूलों में दाखिलों की प्रक्रिया चली हुई है। ज्यादातर स्कूलों में दाखिलें बढ़े हैं। शहर में लोगों के पास सीबीएसई स्कूलों के ऑप्शन बहुत हैं। इसके कारण दाखिलों में इजाफा नहीं हुआ है।
-लेखराज भारद्वाज, उप निदेशक शिक्षा विभाग