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मंत्री बनने के बाद एक बार भी टांडा नहीं आए राजीव सैजल
Thu, 29 Oct 2020 10:55 AM IST
Krishan Singh
सुनील चड्ढा, अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
सुनील चड्ढा, अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 29 Oct 2020 10:55 AM IST
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मंत्री राजीव सैजल
- फोटो : अमर उजाला
पांच जिलों मंडी, हमीरपुर, ऊना, चंबा और कांगड़ा यानी आधे हिमाचल के मरीजों की नब्ज देखने वाले टांडा मेडिकल कॉलेज की अनदेखी हद से ज्यादा बढ़ गई है। हैरानी इस बात की है कि स्वास्थ्य मंत्री बनने के तीन माह बाद भी राजीव सैजल एक बार भी टांडा अस्पताल का हाल देखने नहीं आए। बात स्वास्थ्य मंत्री की ही नहीं है। राजीव सैजल से पहले स्वास्थ्य मंत्रालय का कार्यभार खुद मुख्यमंत्री के पास था। इस वर्ष फरवरी में विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद विपिन परमार के पास से स्वास्थ्य विभाग चला गया था। फरवरी से जुलाई तक इस विभाग को मुख्यमंत्री खुद देख रहे थे। विडंबना यह है कि मुख्यमंत्री ने भी फरवरी से टांडा अस्पताल का दौरा करने की जहमत उठाई।
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हालांकि, मुख्यमंत्री ने कोरोना काल के बीच कांगड़ा का सियासी दौरा जरूर किया, लेकिन टांडा जाना भूल गए। मार्च से कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा था। इसके बीच ही टांडा अस्पताल में सुपर स्पेशिएशिलिटी से इलाज बंद हुआ। ओपीडी तक बंद हुई। मरीजों के ऑपरेशन लटके। पहले से स्टाफ की मार झेल रहे टांडा अस्पताल के कई डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ कोरोना वार्ड की ड्यूटी में व्यस्त हो गया। इस वजह से मरीजों का दर्द बढ़ता गया। विपिन परमार के पद से हटने के बाद स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री ने विभाग का प्रभार जरूर अपने पास लिया, लेकिन दोनों नेता टांडा अस्पताल तक नहीं पहुंच सके।
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क्या कहते हैं एमएस टांडा
टांडा अस्पताल के एमएस सुरेंद्र सिंह भारद्वाज से जब अमर उजाला ने पूछा तो उन्होंने माना कि स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल अभी तक टांडा अस्पताल नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री टांडा मेडिकल कॉलेज की समस्याओं को लेकर हमेशा गंभीर रहते हैं। अस्पताल प्रशासन के साथ वह लगातार संवाद बनाए रखते हैं। अस्पताल प्रशासन स्वास्थ्य मंत्री को बुलाने की योजना बना रहा है।
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