हार के बाद वीरभद्र पर लटकी CBI की तलवार!
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हिमाचल की चारों लोकसभा सीटों पर भाजपा के हाथों कांग्रेस की करारी हार के साथ ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को निजी तौर पर भी भारी झटका लगा है।
मंडी लोकसभा सीट पर वह अपनी पत्नी प्रतिभा सिंह को जिताने में नाकाम रहे। वीरभद्र के सामने अब न सिर्फ अपना अस्तित्व बचाने की कठिन लड़ाई होगी बल्कि वह केंद्र में एनडीए के नेतृत्व वाली सरकार के आते ही सीबीआई जांच में भी घिर सकते हैं।
स्थानीय भाजपा नेता इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट ले जाने की पैरवी में लग गए हैं। ऐसे में यदि मोदी की एनडीए सरकार भी साथ देती है तो सीएम मुश्किल में पड़ सकते हैं।
पहले इतने कमजोर कभी नहीं दिखे वीरभद्र
छह बार हिमाचल के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के पुराने दिग्गज की स्थिति इससे पहले कभी इतनी कमजोर नहीं दिखी थी। हर बार वे एक नए जोश के साथ वापसी करते थे।
प्रदेश में उनके मजबूत राजनीतिक कद को दिसंबर, 2012 के विधानसभा चुनावों में थोड़ा झटका लगा था लेकिन इस बार राज्य की चार लोकसभा सीटें हारने की वजह से यह पूरी तरह ध्वस्त हो गया है।
अपने राजनीतिक करिअर के आखिरी मोड़ पर मिली इस बड़ी हार से उनकी और प्रदेश कांग्रेस की साख भी दांव पर लग गई।
वीरभद्र का दावा, सरकार पूरा करेगी कार्यकाल
उधर, भले ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर कई सवाल उठ रहे हों, लेकिन इन सबके बीच वे खुद प्रदेश में कांग्रेस के पूरा कार्यकाल होने का दावा कर रहे हैं।
उनका कहना है कि उनकी सरकार मजबूत है और आसानी से अपना कार्यकाल पूरा करेगी। उन्होंने चुनाव में मिली इस जीत के लिए नरेंद्र मोदी को भी बधाई दी। साथ ही उम्मीद की कि वह लोगों से किए वादे पूरा करेंगे।
उधर, इस हार के लिए सीएम को जिम्मेदार ठहराते हुए विपक्ष के नेता व पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल ने उनसे इस्तीफा मांग लिया है।