उत्तर भारत की सबसे कठिन श्रीखंड यात्रा को लेकर प्रशासन ने लिया बड़ा फैसला
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भारत की सबसे कठिन और ऐतिहासिक श्रीखंड यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं का गुरुवार को आधिकारिक तौर पर पंजीकरण बंद कर दिया गया है। भक्तों का अंतिम जत्था वीरवार को रवाना हुआ। इसके बाद प्रशासन की ओर से पंजीकरण नहीं किया जाएगा।
श्रीखंड यात्रा में गुरुवार को जो श्रद्धालु गए हैं, वे 28 जुलाई तक सकुशल लौट आएंगे। 26 जुलाई से किसी भी यात्री को श्रीखंड की ओर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन की ओर से किए गए सभी सुरक्षा प्रबंध, रेस्क्यू टीम, ड्यूटी में तैनात चिकित्सा सहायता टीमें वापस आ जाएंगी।
25 जुलाई को दोपहर तक 135 श्रद्धालुओं का पंजीकरण हुआ था। इनमें 131 पुरुष, चार महिलाएं शामिल हैं। सारा दिन रुक-रुक कर बारिश होती रही। बावजूद इसके सभी रास्ते और संचार सुविधाएं बराठी नाला, थाचडू, कुंशा, भीम डवार, पार्वती बाग और जाओं तक सुचारु रूप से जारी थीं।
लगभग 18570 फीट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड कैलाश की यात्रा पर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से सैकड़ों शिवभक्त पहुंचे। 32 किमी की कठिनतम यात्रा को भोले के जयघोष के साथ पूरा किया है।
यात्रा पर गए पांच हजार श्रद्धालु: एसडीएम
श्रीखंड यात्रा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष एवं एसडीएम आनी चेतसिंह ने बताया कि श्रीखंड यात्रा प्रशासनिक तौर पर 15 जुलाई से शुरू की गई थी। यह 25 जुलाई तक चलेगी। इस बार बर्फबारी अधिक होने, रास्ते में ग्लेशियर के साथ भारी बारिश के बावजूद यात्रा पर अब तक लगभग 5000 श्रद्धालु रवाना हो चुके हैं। प्रशासन ने भक्तों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाई है।
सिंहगाड से भेजा अंतिम जत्था : चंदेल
श्रीखंड यात्रा ट्रस्ट यात्रा सेक्टर अधिकारी एवं नायब तहसीलदार प्रदीप चंदेल ने बताया कि वीरवार को यात्रा के बेस कैंप सिंहगाड से श्रद्धालुओं अंतिम जत्था यात्रा पर भेजा गया है। इसे 28 जुलाई तक सकुशल वापस पहुंचाया जाएगा। शुक्रवार 26 जुलाई से जिलाधीश कुल्लू के दिशा-निर्देशानुसार यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। इसके लिए प्रशासन ने कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।