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गांव-शहरों में कूड़ा फैला मिला तो इन अफसरों पर गिरेगी गाज

Fri, 08 Mar 2019 12:01 PM IST
ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: ashok chauhan Updated Fri, 08 Mar 2019 12:01 PM IST
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action against officers if garbage found in open in villages in himachal
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रदेश सरकार हिमाचल में सैकड़ों शहरी निकायों और ग्राम पंचायतों पर बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है। इन निकायों और पंचायतों ने कूड़ा एकत्र करने के लिए ठोस नीति नहीं बनाई है। इससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है।

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्ती के बाद अब सरकार इन पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई का मन बना लिया है। फिलहाल सरकार की ओर से इन निकायों और पंचायतों को एक महीने का अल्टीमेटम दिया जा रहा है।
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इस निर्धारित समय में निकायों को डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन से लेकर उसे नष्ट करने के लिए संयंत्र स्थापित करने का प्लान तैयार करना होगा। जो भी निकाय और ग्राम पंचायत इसमें पिछड़े पाए गए तो उस पर कानूनी कार्रवाई होगी। 

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दो साल से लटकी है योजना

श्हरी निकायों के अधिकारी और पंचायतों के सचिव पर इसकी गाज गिर सकती है। हिमाचल में 54 शहरी निकाय और 3234 पंचायतें हैं। राज्य सरकार की ओर से शहरी विकास विभाग और ग्रामीण विकास विभाग निदेशकों तथा शहरी निकायों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

कूड़ा नष्ट करने के लिए जहां संयंत्र स्थापित किया जाना है, उसके लिए जमीन की उपलब्धता जिला उपायुक्तों को करनी होगी। डीसी चाहे तो इस संयंत्र के लिए जमीन सरकारी उपलब्ध करा सकते हैं।

अगर सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होती है तो उन्हें लोगों के साथ तालमेल बैठाने या फिर संयंत्र स्थापित करने के लिए जमीन खरीदनी होगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव कार्मिक, पर्यावरण आरडी धीमान ने कहा है कि शहरी निकायों को एक महीने के भीतर प्लान तैयार करने का समय दिया है।

अगर तय समय पर गारबेज कलेक्शन और कूड़ा संयंत्र स्थापित करने के लिए प्लान नहीं दिया गया तो कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। प्रदेश सरकार की ओर से पंचायतों और शहरी निकायों को दो साल से स्वच्छता को लेकर अवगत कराया जा रहा है। विभागों की ओर से पत्राचार किया जा रहा है लेकिन डोर टू डोर गारबेज योजना को अमल में नहीं लाया जा रहा है। 

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