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Shimla News: पांच लाख के चेक बाउंस मामले में आरोपी दोषी करार
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न्यायिक दंडाधिकारी मनु प्रिंजा की अदालत का फैसला
सजा पर अब 26 सितंबर को होगी सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मनु प्रिंजा की अदालत ने पांच लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में ठियोग निवासी जोगिंदर सिंह को दोषी करार दिया है। यह फैसला सुनाते हुए दोषी की सजा के निर्धारण पर बहस के लिए 26 सितंबर की तारीख तय की है।
संजौली निवासी एवं पुलिस विभाग से एसपी पद से सेवानिवृत्त हुए रविंद्र शर्मा ने वर्ष 2016 में अदालत में यह शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक वर्ष 2014 में आर्थिक संकट के चलते दोषी जोगिंदर सिंह ने उनसे अलग-अलग तारीखों पर 5 लाख रुपये का कर्ज लिया था। इस देनदारी के निपटारे के लिए आरोपी ने 16 अप्रैल 2016 को 5 लाख रुपये का चेक जारी किया। शिकायतकर्ता ने जब यह चेक अपने बैंक में भुगतान के लिए लगाया तो बाउंस हो गया। सुनवाई के दौरान आरोपी ने धारा 313 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयान में दावा किया कि उसने शिकायतकर्ता से 5 लाख नहीं बल्कि केवल एक लाख रुपये लिए थे जिसे वह पहले ही चुका दिया था। अदालत ने अपने फैसले में पाया कि आरोपी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात स्वीकार की है। अदालत ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों और बैंक रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि जोगिंदर सिंह को दोषी ठहराया।
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सजा पर अब 26 सितंबर को होगी सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मनु प्रिंजा की अदालत ने पांच लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में ठियोग निवासी जोगिंदर सिंह को दोषी करार दिया है। यह फैसला सुनाते हुए दोषी की सजा के निर्धारण पर बहस के लिए 26 सितंबर की तारीख तय की है।
संजौली निवासी एवं पुलिस विभाग से एसपी पद से सेवानिवृत्त हुए रविंद्र शर्मा ने वर्ष 2016 में अदालत में यह शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक वर्ष 2014 में आर्थिक संकट के चलते दोषी जोगिंदर सिंह ने उनसे अलग-अलग तारीखों पर 5 लाख रुपये का कर्ज लिया था। इस देनदारी के निपटारे के लिए आरोपी ने 16 अप्रैल 2016 को 5 लाख रुपये का चेक जारी किया। शिकायतकर्ता ने जब यह चेक अपने बैंक में भुगतान के लिए लगाया तो बाउंस हो गया। सुनवाई के दौरान आरोपी ने धारा 313 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयान में दावा किया कि उसने शिकायतकर्ता से 5 लाख नहीं बल्कि केवल एक लाख रुपये लिए थे जिसे वह पहले ही चुका दिया था। अदालत ने अपने फैसले में पाया कि आरोपी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात स्वीकार की है। अदालत ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों और बैंक रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि जोगिंदर सिंह को दोषी ठहराया।
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