सरकारी दफ्तर के ये हैं हाल, मनमर्जी से आते हैं साहब, कर्मचारियों की भी मौज
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नगर निगम शिमला के दफ्तरों में काम करने वाले कई कर्मचारी समय से ड्यूटी पर आना जरूरी नहीं समझते। शहरवासी नए कनेक्शन, पंजीकरण, बिल आदि कामों के लिए रोज निगम दफ्तरों के चक्कर काटते हैं लेकिन कर्मचारी सुबह या तो समय पर नहीं आते या फिर सीट पर नहीं मिलते। अमर उजाला संवाददाता अशोक चौहान और फोटो जर्नलिस्ट नरेश भारद्वाज ने निगम के इन दफ्तरों का जायजा लिया।
नगर निगम की जलशाखा में लोगों की आवाजाही शुरू हो चुकी थी। आयुक्त कार्यालय के सबसे नजदीक के इस दफ्तर के भीतर आधी कुर्सियां खाली पड़ी हैं। कर्मचारी अभी नहीं पहुंचे हैं। शाखा अधीक्षक से पूछा तो जवाब मिला कि बाकी कर्मचारी थोड़ी देर में पहुंच जाएंगे।
दफ्तर में वह जूनियर असिस्टेंट भी अभी नहीं पहुंची जिस पर पार्षद से दुर्व्यवहार के आरोप लगे हैं। मीडिया कर्मी फोटो खींचने लगे तो कर्मचारी इकट्ठा हो गए और बोले कि बाकी लोग थोड़ा लेट हो गए होंगे। लेकिन लेटलतीफी इतनी कि पौने 11 बजे तक जूनियर असिस्टेंट समेत कई कर्मी शाखा नहीं पहुंचे।
एक महिला कर्मी पहुंची जिन्होंने पर्ची दिखाते हुए कहा कि वह अस्पताल गईं थीं। शाखा के बाहर कुछ लोग मिले जो पानी के नए कनेक्शन के लिए पहुंचे थे। बोले एक महीने से चक्कर काट रहे हैं। लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ रही।
निगम की इस शाखा में पानी के नए कनेक्शन, कनेक्शन ट्रांसफर और पानी बिल से जुड़े काम होते हैं। रोज सैकड़ों लोग दफ्तर आते हैं लेकिन हफ्तों तक इनकी फाइलें लटकी रहती हैं। काम तो तब होगा जब सभी कर्मचारी टाइम पर दफ्तर पहुंचेंगे।
नगर निगम का एक्सचेंज दफ्तर। यहां भी काम रामभरोसे चल रहा है, जिस कर्मचारी को एक्सचेंज चलाने का जिम्मा दिया है वह अभी तक पहुंची नहीं। दफ्तर में एक कर्मी बैठा हैं। एक्सचेंज को लेकर प्रशासन को कई शिकायतें मिल चुकी हैं लेकिन व्यवस्था ऐसी है कि पौने 11 बजे तक कर्मचारियों का कोई पता नहीं।
स्वास्थ्य शाखा में भी चार कर्मचारी ही सीट पर बैठे हैं। बाकी चार से पांच कुर्सियां खाली पड़ी हैं। पूछने पर जवाब मिला कि एक मैडम आई हैं, लेकिन अभी अपने काम से दूसरी ब्रांच गई हैं। निगम की इस शाखा में लोगों को जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं।
निगम ने अपना सुविधा केंद्र भी चला रखा है। लेकिन पांच काउंटर के लिए सिर्फ दो कर्मचारी रखे हैं। यहां जन्म-मृत्यु का पंजीकरण, विवाह पंजीकरण, जल-सीवरेज कनेक्शन, भवनों के नक्शे, बिजली की एनओसी, बीपीएल प्रमाणपत्र से संबंधित आवेदन किए जाते हैं।
इन दिनों प्रापर्टी टैक्स भी यहां जमा हो रहे हैं। लेकिन दो काउंटर ही चालू होने से बुजुर्गों को भी लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है। इससे कर्मचारियों पर भी बोझ पड़ रहा है।
घर में होता है लंच, तीन बजे का बाद पहुंचते हैं दफ्तर
नगर निगम में काम कर रहे कई कर्मचारियों के ठाठ ऐसे हैं कि यह दिन में लंच करने घर चले जाते हैं। लंच के लिए एक बजे दफ्तर से निकलते हैं और वापसी तीन बजे से पहले नहीं होती। अकाउंट ब्रांच, इस्टेट ब्रांच के कई कर्मचारी रोज लंच के लिए घर चले जाते हैं।
तमाम बड़े दफ्तरों में बायोमीट्रिक मशीनें लग चुकी हैं लेकिन निगम के कर्मचारी मशीनों से हाजिरी नहीं लगाना चाहते। प्रशासन कहता है कि देर शाम तक कर्मचारी दफ्तर में बैठते हैं, इसीलिए सुबह 10 बजे आना जरूरी नहीं। लेकिन लोगों को कैसे समझाएंगे जो समय निकालकर सुबह दस बजे निगम दफ्तर पहुंच जाते हैं।
मोटी तनख्वाह, तबादले की भी टेंशन नहीं
जनता के टैक्स से मोटी तनख्वाह लेने वाले इन कर्मचारियों में प्रशासन का कोई डर नहीं है। सैकड़ों कर्मचारी दशकों से एक ही सीट पर जमे हैं। तबादला होगा भी तो एक सीट से दूसरी पर। ऐसा नहीं है कि सभी कर्मचारी ऐसे हैं। निगम में कर्मचारियों की भारी कमी के बीच कई कर्मी ऐसे भी हैं जो समय पर दफ्तर पहुंचते हैं और शाम छह से सात बजे तक ड्यूटी बजाते हैं। लेकिन कई ऐसे हैं जो ज्यादातर समय सीट पर नहीं मिलते।
यदि कोई कर्मचारी लगातार देरी से दफ्तर आ रहा है तो उस पर कार्रवाई होगी। ज्यादातर कर्मचारी देर शाम तक दफ्तर में बैठते हैं और काम करते हैं। ऐसे में कभी सुबह थोड़ी देर हो जाए तो कोई बात नहीं। - पंकज राय, नगर निगम आयुक्त
महापौर कुसुम सदरेट ने कहा कि देरी से दफ्तर आने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। जो कर्मचारी देरी से दफ्तर पहुंच रहे हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे।