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सेहत से खिलवाड़, मानकों पर खरा नहीं उतर रहीं दवाइयां, 69 सैंपल फेल

Tue, 12 Sep 2017 09:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बद्दी (सोलन)
ब्यूरो/अमर उजाला, बद्दी (सोलन) Updated Tue, 12 Sep 2017 09:44 AM IST
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69 drugs made in Himachal Pradesh fail tests

हिमाचल के फार्मा उद्योगों की दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतर रही हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ओर से हर माह लिए जाने वाले सैंपल की रिपोर्ट में दवाएं फेल हो रही हैं या फिर सब स्टैंडर्ड जा रही हैं। जनवरी से जुलाई माह तक सात महीनों में देशभर की 223 दवाइयां सीडीएससीओ की जांच रिपोर्ट में फेल पाई गई हैं।

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इनमें हिमाचल के उद्योगों की 69 दवाएं शामिल हैं। ये दवाएं बीबीएन, पांवटा साहिब, कालाअंब, संसारपुर टैरेस और सोलन के उद्योग की बनी हैं। जनवरी में देश की 14 दवाओं सहित हिमाचल की 4, फरवरी में 17 सहित प्रदेश की 3 और मार्च में 60 दवाओं सहित सूबे के उद्योगों की 17, अप्रैल में 23 दवाओं सहित प्रदेश की 7, मई में 31 दवाओं सहित 12, जून में 37 दवाओं सहित प्रदेश की 10 और जुलाई में 41 दवाओं सहित हिमाचल की 16 दवाएं फेल हुई हैं। 
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हर माह सीडीएससीओ के अलर्ट पर विभाग हरकत में आता है। सैंपल में फेल दवाओं का बैच ही मार्केट से उठा लिया जाता है। देशभर में बनने वाली दवाओं के सैंपल जुटाए जाते हैं। इनकी मुंबई, गुवाहाटी, कोलकाता, चंडीगढ़ की औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में जांच करवाई जाती है।
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उधर, राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मरवाहा ने कहा कि दवाओं की जांच में कई फैक्टर काउंट किए जाते हैं। प्राधिकरण समय-समय पर उद्योगों में जांच करता है और ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत कार्रवाई भी करता है।

दवाओं में जलवायु का भी पड़ता है असर

69 drugs made in Himachal Pradesh fail tests

प्रदेश की जलवायु और हयूमिडिटी सहित अन्य कई फैक्टर दवाओं के मानकों को पूरा नहीं कर पाते है। जिस दवा को जितने कम तापमान में रखना है, उद्योग बेशक उसे तैयार करते है, लेकिन जब वह दूसरे प्रदेशों में जाती है तो वहां के तापमान के अनुरूप दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतरती हैं।

बताया जाता है कि जो दवाएं हिमाचल की शामिल हैं, उसमें कई वेरिएशन हैं, जिसमें तापमान, हयूमिडिटी सहित अन्य शामिल हैं। डिस्ट्रीब्यूटरों को भी दवाओं के तापमान को उसी के अनुरूप बनाए रखने की आवश्यकता है।

राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मरवाहा ने कहा कि जिन दवाओं में समस्याएं आ रही हैं, वे बनने के बाद तापमान, आद्रर्ता सहित कई अन्य वजहों से प्रभावित होती हैं। इसके लिए राज्य दवा नियंत्रक प्राधिकरण अपनी लैब बनाने की कसरत तेज किए है।

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