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Shimla News: विवि के छात्रावासों में 60 कमरे खस्ता हाल, बजट की दरकार
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सीलन से कमरों नहीं रहने लायक, छात्रों को नहीं मिल रहे छात्रावासों में कमरे
विवि को कमरों की मरम्मत के लिए चाहिए करोड़ों का बजट
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में विद्यार्थियों को लगातार छात्रावास की कमी के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है। विवि के छात्रावासों में 60 से अधिक कमरे ऐसे हैं जो रहने के लायक नहीं हैं।
विवि इन्हें छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आवंटित नहीं कर रहा। इन खस्ताहाल और सीलन भरे कमरों को रहने लायक बनाने के लिए मरम्मत की जरूरत है जिसके लिए करोड़ों रुपये के बजट की दरकार है। विवि प्रशासन इसके लिए अब तक बजट का प्रावधान नहीं कर पाया है। विवि के चीफ वार्डन कार्यालय की मांग पर निर्माण और रखरखाव विंग ने मरम्मत के लिए आवश्यक बजट का एस्टिमेट विवि प्रशासन को सौंपा है। इन 60 कमरों की यदि मरम्मत हो जाए तो 120 अतिरिक्त छात्र-छात्राओं को रहने के लिए कमरे मिल जाएंगे। एक कमरे में दो विद्यार्थियों को ठहराया जाता है।
यह खराब कमरे सरस्वती और गिरिगंगा छात्रावास में हैं। लड़कों के छात्रावासों में भी ऐसे पांच से सात कमरे हैं, जिनकी मरम्मत करवाना जरूरी है। छात्रावासों की छतों के लीक होने और बारिश के पानी की उचित निकासी न होने से कमरों में काफी सीलन है। छतों को बदलने और मरम्मत का कार्य करने के लिए चीफ वार्डन कार्यालय ने प्रशासन से बजट मांगा है। इसको लेकर बीते दिनों प्रति कुलपति के माध्यम से बजट आवंटित करने की मांग भी उठाई थी।
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एक छात्रावास को कर दिया है बंद
लड़कों के श्रीखंड छात्रावास को कंपन महसूस होने के बाद बंद कर दिया है। इसमें रह रहे छात्रों को दूसरे छात्रावासों में शिफ्ट करना पड़ा है। इस छात्रावास को खाली करवाने से छात्रों के लिए समस्या और गंभीर बनी हुई है। इस सत्र में 180 नए छात्रों को ही छात्रावास में कमरे मिले हैं।
छात्रावासों के लिए मांगा है बजट : चीफ वार्डन
विश्वविद्यालय के चीफ वार्डन प्रो. आरएल जिंटा ने माना कि 60 से अधिक कमरे ऐसे हैं, जो आवंटित करने की हालत में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विवि प्रशासन से नए छात्रावासों के निर्माण करने और पुराने छात्रावासों की मरम्मत के लिए बजट मांगा है। मरम्मत कार्य पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे। छात्रावासों की मरम्मत और रखरखाव के लिए पांच से दस करोड़ मिले तो ही खराब हालत में पड़े कमरों की हालत सुधर पाएगी।
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विवि को कमरों की मरम्मत के लिए चाहिए करोड़ों का बजट
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में विद्यार्थियों को लगातार छात्रावास की कमी के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है। विवि के छात्रावासों में 60 से अधिक कमरे ऐसे हैं जो रहने के लायक नहीं हैं।
विवि इन्हें छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आवंटित नहीं कर रहा। इन खस्ताहाल और सीलन भरे कमरों को रहने लायक बनाने के लिए मरम्मत की जरूरत है जिसके लिए करोड़ों रुपये के बजट की दरकार है। विवि प्रशासन इसके लिए अब तक बजट का प्रावधान नहीं कर पाया है। विवि के चीफ वार्डन कार्यालय की मांग पर निर्माण और रखरखाव विंग ने मरम्मत के लिए आवश्यक बजट का एस्टिमेट विवि प्रशासन को सौंपा है। इन 60 कमरों की यदि मरम्मत हो जाए तो 120 अतिरिक्त छात्र-छात्राओं को रहने के लिए कमरे मिल जाएंगे। एक कमरे में दो विद्यार्थियों को ठहराया जाता है।
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यह खराब कमरे सरस्वती और गिरिगंगा छात्रावास में हैं। लड़कों के छात्रावासों में भी ऐसे पांच से सात कमरे हैं, जिनकी मरम्मत करवाना जरूरी है। छात्रावासों की छतों के लीक होने और बारिश के पानी की उचित निकासी न होने से कमरों में काफी सीलन है। छतों को बदलने और मरम्मत का कार्य करने के लिए चीफ वार्डन कार्यालय ने प्रशासन से बजट मांगा है। इसको लेकर बीते दिनों प्रति कुलपति के माध्यम से बजट आवंटित करने की मांग भी उठाई थी।
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एक छात्रावास को कर दिया है बंद
लड़कों के श्रीखंड छात्रावास को कंपन महसूस होने के बाद बंद कर दिया है। इसमें रह रहे छात्रों को दूसरे छात्रावासों में शिफ्ट करना पड़ा है। इस छात्रावास को खाली करवाने से छात्रों के लिए समस्या और गंभीर बनी हुई है। इस सत्र में 180 नए छात्रों को ही छात्रावास में कमरे मिले हैं।
छात्रावासों के लिए मांगा है बजट : चीफ वार्डन
विश्वविद्यालय के चीफ वार्डन प्रो. आरएल जिंटा ने माना कि 60 से अधिक कमरे ऐसे हैं, जो आवंटित करने की हालत में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विवि प्रशासन से नए छात्रावासों के निर्माण करने और पुराने छात्रावासों की मरम्मत के लिए बजट मांगा है। मरम्मत कार्य पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे। छात्रावासों की मरम्मत और रखरखाव के लिए पांच से दस करोड़ मिले तो ही खराब हालत में पड़े कमरों की हालत सुधर पाएगी।