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पेयजल परियोजनाओं में बदले बिजली मीटर
Updated Tue, 21 Nov 2017 10:58 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर की मुख्य पेयजल परियोजनाओं से अब शिमला को पहले से ज्यादा पानी मिलेगा। साथ ही नगर निगम के खजाने से बिजली बिल पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपये भी बच जाएंगे।
इसके लिए निगम ने सभी मुख्य पेयजल परियोजनाओं में नए आधुनिक पंप और पाइपलाइन बिछाने का काम तो शुरू कर ही दिया है। अब बिजली बिल कम करने की योजना पर भी कसरत शुरू कर दी है। इसके लिए डेवलपमेंट एनर्जी सिस्टम लिमिटेड (डीईएसएल) नाम की कंपनी को एक माह के लिए सभी परियोजनाओं का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। कंपनी सभी परियोजनाओं में आधुनिक बिजली मीटर इंस्टॉल कर रही है। इससे निगम को पता चल सकेगा कि रोज किस परियोजना में कितने यूनिट और कितने रुपये की बिजली की खपत हो रही है। अभी निगम को सिर्फ बिल मिलने के बाद ही पता चलता है कि कितनी बिजली खर्च हुई है। कंपनी ने गुम्मा और गिरि में मीटर बदलने का काम करीब पूरा कर लिया है। बाकी परियोजनाओं में भी इसे शुरू किया जा रहा है। कंपनी जनवरी में अपनी रिपोर्ट देगी। इसमें बताया जाएगा कि किन कारणों से पंपिंग में ज्यादा बिजली खपत हो रही है। साथ ही इसे कम करने के सुझाव भी दिए जाएंगे।
बिजली बिल पर खर्च हो रहे 70 करोड़
शहर के लिए पांच प्रमुख पेयजल परियोजनाओं से पानी सप्लाई होता है। इनमें हर साल पंपिंग के लिए बिजली बिल पर ही करीब 65 से 70 करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं। पुराने पंप के चलते बिजली की ज्यादा खपत होती है। साथ ही लीकेज के चलते ज्यादा देर तक पंप चलाने पड़ते हैं। वर्ल्ड बैंक के दिशा निर्देश के अनुसार हर परियोजना में कम बिजली से ज्यादा पंपिंग करने की क्षमता होनी चाहिए।
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ऐसे कम होगी बिजली की खपत
बिजली की खपत कम करने के लिए निगम ने गुम्मा में चार नए पंप लगाए हैं। ये आधुनिक पंप कम बिजली से ज्यादा पंपिंग की क्षमता रखते हैं। इनसे जल्द ही पंपिंग शुरू हो जाएगी। इससे शिमला को पहले से ज्यादा पानी मिल सकेगा। इसके अलावा लीकेज खत्म करने के लिए गुम्मा और कोटी बरांडी पाइपलाइन को भी बदला जा रहा है। इससे पानी बेकार नहीं बहेगा और कम देर तक पंप चलने से बिजली खपत भी कम होगी। शिमला ग्रेटर वाटर सर्किल के अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र गिल ने बताया कि कंपनी मीटर इंस्टॉल कर बिजली की खपत पर रिपोर्ट तैयार कर रही है।
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शिमला। शहर की मुख्य पेयजल परियोजनाओं से अब शिमला को पहले से ज्यादा पानी मिलेगा। साथ ही नगर निगम के खजाने से बिजली बिल पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपये भी बच जाएंगे।
इसके लिए निगम ने सभी मुख्य पेयजल परियोजनाओं में नए आधुनिक पंप और पाइपलाइन बिछाने का काम तो शुरू कर ही दिया है। अब बिजली बिल कम करने की योजना पर भी कसरत शुरू कर दी है। इसके लिए डेवलपमेंट एनर्जी सिस्टम लिमिटेड (डीईएसएल) नाम की कंपनी को एक माह के लिए सभी परियोजनाओं का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। कंपनी सभी परियोजनाओं में आधुनिक बिजली मीटर इंस्टॉल कर रही है। इससे निगम को पता चल सकेगा कि रोज किस परियोजना में कितने यूनिट और कितने रुपये की बिजली की खपत हो रही है। अभी निगम को सिर्फ बिल मिलने के बाद ही पता चलता है कि कितनी बिजली खर्च हुई है। कंपनी ने गुम्मा और गिरि में मीटर बदलने का काम करीब पूरा कर लिया है। बाकी परियोजनाओं में भी इसे शुरू किया जा रहा है। कंपनी जनवरी में अपनी रिपोर्ट देगी। इसमें बताया जाएगा कि किन कारणों से पंपिंग में ज्यादा बिजली खपत हो रही है। साथ ही इसे कम करने के सुझाव भी दिए जाएंगे।
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बिजली बिल पर खर्च हो रहे 70 करोड़
शहर के लिए पांच प्रमुख पेयजल परियोजनाओं से पानी सप्लाई होता है। इनमें हर साल पंपिंग के लिए बिजली बिल पर ही करीब 65 से 70 करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं। पुराने पंप के चलते बिजली की ज्यादा खपत होती है। साथ ही लीकेज के चलते ज्यादा देर तक पंप चलाने पड़ते हैं। वर्ल्ड बैंक के दिशा निर्देश के अनुसार हर परियोजना में कम बिजली से ज्यादा पंपिंग करने की क्षमता होनी चाहिए।
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ऐसे कम होगी बिजली की खपत
बिजली की खपत कम करने के लिए निगम ने गुम्मा में चार नए पंप लगाए हैं। ये आधुनिक पंप कम बिजली से ज्यादा पंपिंग की क्षमता रखते हैं। इनसे जल्द ही पंपिंग शुरू हो जाएगी। इससे शिमला को पहले से ज्यादा पानी मिल सकेगा। इसके अलावा लीकेज खत्म करने के लिए गुम्मा और कोटी बरांडी पाइपलाइन को भी बदला जा रहा है। इससे पानी बेकार नहीं बहेगा और कम देर तक पंप चलने से बिजली खपत भी कम होगी। शिमला ग्रेटर वाटर सर्किल के अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र गिल ने बताया कि कंपनी मीटर इंस्टॉल कर बिजली की खपत पर रिपोर्ट तैयार कर रही है।