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भुखमरी से देशभर में हर रोज हो रहीं 4500 मौतें, याचिका पर एससी ने सरकार को दिया नोटिस
Sat, 12 Oct 2019 05:00 PM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 12 Oct 2019 05:00 PM IST
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देश में हर रोज भुखमरी से हो रहीं मौतों को लेकर सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार और राज्य की सरकारों को नोटिस जारी किया है। सरकार के साथ याचिकाकर्ताओं ने 12 मंत्रालयों को भी पार्टी बनाया है। भुखमरी से हो रही मौतों को लेकर एससी में दायर की गई याचिका में एक याचिकाकर्ता नाहन से संबंध रखती हैं। कांग्रेस नेता कुंजना सिंह ने अदालत में दायर याचिका को लेकर पत्रकारों से बातचीत की।
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अधिवक्ता आशिमा मंडला व मंदाकिनी सिंह भी उपस्थित रहीं। उन्होंने कहा कि 2017 में नेशनल हेल्थ सर्वे (एनएचएस) की रिपोर्ट में देश में 19 करोड़ लोग हर रात खाली पेट सोने को मजबूर हैं। सबसे खतरनाक आंकड़ा यह सामने आया है कि हमारे देश में हर साल पांच साल से कम उम्र के लगभग 4500 बच्चों की मौत भूख और कुपोषण से होती है। हर साल यह आंकड़ा तीन लाख से ज्यादा पहुंच रहा है।
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याचिका में कहा गया है कि गरीबों और भूखों को खाना खिलाने के लिए देशभर में सामुदायिक रसोई जैसे नए उपाय किए जाने की जरूरत है। तमिलनाडु की अम्मा किचन में स्वयं सहायता समूहों में साथियों को शामिल कर बड़ी सफलता हासिल की है। याचिका में राजस्थान की अन्नपूर्णा रसोई, कर्नाटक में इंदिरा कैंटीन, दिल्ली की आम आदमी कैंटीन, आंध्र प्रदेश में अन्ना कैंटीन, झारखंड मुख्यमंत्री दाल भात और ओडिशा के आधार केंद्र में भुखमरी और कुपोषण के संकट का भी जिक्र किया गया है।
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न्यायमूर्ति एनवी रमाना की अगुवाई वाली पीठ ने एक्टिविस्ट आशु धवन, ईशान धवन और कुंजना सिंह ने संयुक्त रूप से अधिवक्ता आशिमा मंडला, मंदाकिनी व फुजैल अहमद अयुबी की ओर से दायर याचिका पर सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने नोटिस जारी कर देशभर के मुख्य सचिवों को निर्देश दिए हैं कि वे सामुदायिक रसोई के कार्यान्वयन को योजनाएं बनाएं। सुनिश्चित किया जाए कि कोई व्यक्ति खाली पेट न सोए। उन्होंने बताया कि 18 अक्तूबर को अदालत में सुनवाई होगी।