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बिना अध्यापकों के लग रही कक्षाएं
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बिना अध्यापकों के लग रही
हैं गढाउ पाठशाला में कक्षाएं
मिडल स्कूल में शिक्षक न होने से पढ़ाई चौपट
दिनभर उछलकूद कर घर लौट आते हैं बच्चे
विजय खाची
सुन्नी (शिमला)। राजधानी से करीब 70 किमी दूर एक स्कूल ऐसा है जहां बिना अध्यापकों के ही विद्यार्थी कक्षाएं लगा रहे हैं। शीतकालीन छुट्टियों के बाद हर रोज छात्र पढ़ने के लिए स्कूल जाते हैं और बिना अध्यापक के कक्षाओं में बैठकर छुट्टी होने पर घर लौट आते हैं। यही नहीं कई बार तो स्कूल का ताला पूरे दिन बंद रहता है और छात्र स्कूल के बाहर ही बैठकर गुरु जी का इंतजार करते रहते हैं। यह हाल है शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की दूरदराज हिमरी पंचायत के मिडल स्कूल गढाउ का। पहाड़ी पर स्थित स्कूल में अध्यापकों के न होने पर बच्चे जंगल और पहाड़ की तरफ खेलने निकल जाते हैं। एक बच्चा इस पहाड़ी से गिरकर चोटिल भी हो चुका है। बावजूद इसके प्रदेश शिक्षा विभाग आंखेें मूंदे बैठा है।
हैरत की बात तो यह है कि स्कूल खुलने के एक सप्ताह बाद भी अभी तक किसी भी छात्र को उनकी किताबें नहीं मिली हैं। मिड डे मील का खाना भी नहीं मिलता। पंचायत प्रधान जगदीश वर्मा ने स्कूल में अध्यापकों के न होने की शिकायत मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से लेकर शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज और शिक्षा निदेशक तक कर दी। बावजूद स्कूल में अभी तक किसी भी अध्यापक को तैनात नहीं किया गया।
मिड डे वर्कर खोलती है स्कूल का ताला
विद्यार्थियों को स्कूल की कक्षाओं में बिठाने के लिए मिड डे मील वर्कर स्कूल का ताला खोलती है। बीते सोमवार को जब मिड डे वर्कर भी स्कूल नहीं पहुंची तो सभी बच्चे स्कूल के बाहर ही बैठे। लंबे इंतजार के बाद जब स्कूल का कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा तो बच्चे पहाड़ी की तरफ खेलने चले गए। अचानक खेलते खेलतेे एक बच्चा पहाड़ी से गिर गया। गनीमत रही कि छात्र किसी बड़े हादसे का शिकार नहीं हुआ। एक महिला ने जब छात्र के चीखने की आवाजें सुनीं तो उसे खाई से बाहर निकाला।
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12 किमी दूर हैं दूसरे स्कूल
गढाउ स्कूल ऐसी जगह पर है जहां से दूसरे स्कूलों की दूरी कम से कम 12 किलोमीटर है। ऐसी परिस्थिति में परिजन छोटे बच्चों को दूसरे स्कूलों में पढ़ने के लिए नहीं भेज सकते।
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हैं गढाउ पाठशाला में कक्षाएं
मिडल स्कूल में शिक्षक न होने से पढ़ाई चौपट
दिनभर उछलकूद कर घर लौट आते हैं बच्चे
विजय खाची
सुन्नी (शिमला)। राजधानी से करीब 70 किमी दूर एक स्कूल ऐसा है जहां बिना अध्यापकों के ही विद्यार्थी कक्षाएं लगा रहे हैं। शीतकालीन छुट्टियों के बाद हर रोज छात्र पढ़ने के लिए स्कूल जाते हैं और बिना अध्यापक के कक्षाओं में बैठकर छुट्टी होने पर घर लौट आते हैं। यही नहीं कई बार तो स्कूल का ताला पूरे दिन बंद रहता है और छात्र स्कूल के बाहर ही बैठकर गुरु जी का इंतजार करते रहते हैं। यह हाल है शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की दूरदराज हिमरी पंचायत के मिडल स्कूल गढाउ का। पहाड़ी पर स्थित स्कूल में अध्यापकों के न होने पर बच्चे जंगल और पहाड़ की तरफ खेलने निकल जाते हैं। एक बच्चा इस पहाड़ी से गिरकर चोटिल भी हो चुका है। बावजूद इसके प्रदेश शिक्षा विभाग आंखेें मूंदे बैठा है।
हैरत की बात तो यह है कि स्कूल खुलने के एक सप्ताह बाद भी अभी तक किसी भी छात्र को उनकी किताबें नहीं मिली हैं। मिड डे मील का खाना भी नहीं मिलता। पंचायत प्रधान जगदीश वर्मा ने स्कूल में अध्यापकों के न होने की शिकायत मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से लेकर शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज और शिक्षा निदेशक तक कर दी। बावजूद स्कूल में अभी तक किसी भी अध्यापक को तैनात नहीं किया गया।
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मिड डे वर्कर खोलती है स्कूल का ताला
विद्यार्थियों को स्कूल की कक्षाओं में बिठाने के लिए मिड डे मील वर्कर स्कूल का ताला खोलती है। बीते सोमवार को जब मिड डे वर्कर भी स्कूल नहीं पहुंची तो सभी बच्चे स्कूल के बाहर ही बैठे। लंबे इंतजार के बाद जब स्कूल का कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा तो बच्चे पहाड़ी की तरफ खेलने चले गए। अचानक खेलते खेलतेे एक बच्चा पहाड़ी से गिर गया। गनीमत रही कि छात्र किसी बड़े हादसे का शिकार नहीं हुआ। एक महिला ने जब छात्र के चीखने की आवाजें सुनीं तो उसे खाई से बाहर निकाला।
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12 किमी दूर हैं दूसरे स्कूल
गढाउ स्कूल ऐसी जगह पर है जहां से दूसरे स्कूलों की दूरी कम से कम 12 किलोमीटर है। ऐसी परिस्थिति में परिजन छोटे बच्चों को दूसरे स्कूलों में पढ़ने के लिए नहीं भेज सकते।