फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   25 percent of KCC money is stuck with people close to politicians, recovery has become a problem for the manag

KCCB: नेताओं के करीबियों के पास फंसा केसीसी का 25 फीसदी पैसा, प्रबंधन के लिए रिकवरी करना बनी आफत

Tue, 25 Mar 2025 11:52 AM IST
Krishan Singh प्रवीण प्रकाश कुमार, धर्मशाला
प्रवीण प्रकाश कुमार, धर्मशाला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 25 Mar 2025 11:52 AM IST
सार

 बैंक प्रबंधन लोन की रिकवरी के लिए नोटिस पर नोटिस भेज रहा है, लेकिन परिणाम कुछ नहीं आ रहा है। जिन्हें बड़े लोन दिए गए हैं, उनसे पैसा वापस लेना बैंक प्रबंधन के लिए मुश्किल साबित होने लगा है। 

विज्ञापन
25 percent of KCC money is stuck with people close to politicians, recovery has become a problem for the manag
केसीसी बैंक - फोटो : संवाद

विस्तार

कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक की जमापूंजी का 25 फीसदी पैसा डिफॉल्टरों के पास फंसा है। ये डिफॉल्टर प्रदेश के बड़े नेताओं के करीबी रहे हैं। बैंक प्रबंधन लोन की रिकवरी के लिए नोटिस पर नोटिस भेज रहा है, लेकिन परिणाम कुछ नहीं आ रहा है। जिन्हें बड़े लोन दिए गए हैं, उनसे पैसा वापस लेना बैंक प्रबंधन के लिए मुश्किल साबित होने लगा है। छोटे लोन के मामलों में तो उपभोक्ता बैंक को किस्तें चुका भी रहे हैं, लेकिन जिन्होंने करोड़ों के ऋण लिए हैं, वह किस्तें चुकाने से आनाकानी कर रहे हैं। इससे बैंक की गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) 22 फीसदी तक पहुंच चुका है। है।

विज्ञापन


घाटे को पूरा करने के लिए कई बार बैंक प्रबंधन को अपने सालाना लाभांश से पैसा चुकाना पड़ रहा है।  एनपीए से बचने और लोन की रिकवरी के लिए बैंक प्रबंधन कई बार वन-टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) स्कीम भी ला चुका है। लेकिन इसका फायदा भी नेताओं और उनके चहेतों ने ही उठाया है। 10 मार्च को बीओडी की बैठक में भी ओटीएस में कई मामले लाए गए हैं। प्रबंध निदेशक और महाप्रबंधक राकेश शर्मा ने कहा कि पहले कुछ लोगों को अत्यधिक ऋण स्वीकृत हुर थे, जो लोग ऋण का भुगतान नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई जारी है।

विज्ञापन

ओटीएस का लाभ उठाने वाले भी नहीं कर रहे ऋण का भुगतान
ओटीएस स्कीम के अंतर्गत कुछ लोगों ने आवेदन किया था, लेकिन वे अभी तक बैंक को मूलधन तक नहीं लौटा पाए हैं। ओटीएस में इन्हें तीन माह का समय दिया था। यह समय 28 फरवरी को पूरा हो गया है। अब उनकी संपत्तियों की कुर्की का ही विकल्प बचा है। इनमें एक कारोबारी ऐसा है जिससे बैंक ने 28 करोड़ रुपये वापस लेने हैं। इसी तरह एक अन्य कारोबारी है, जिसे बैंक ने 40 करोड़ रुपये ऋण दिया था, जो आज ब्याज समेत 66 करोड़ के करीब बन चुका है।
 

विजिलेंस में केस
केसीसी बैंक में गलत तरीके से ऋण आवंटित करने के मामलों में विजिलेंस में भी केस दर्ज हैं। युद्धवीर सिंह बैंस से के मामले की एसआईटी जांच रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed