{"_id":"69c14ffab1654c16bc0a2ba5","slug":"242-cases-of-tb-reported-at-igmc-in-four-months-shimla-news-c-19-sml1002-694865-2026-03-23","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"World TB Day: आईजीएमसी में चार माह में आए टीबी रोग के 242 मामले, समय से पता लगने पर सौ फीसदी उपचार संभव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
World TB Day: आईजीएमसी में चार माह में आए टीबी रोग के 242 मामले, समय से पता लगने पर सौ फीसदी उपचार संभव
Mon, 23 Mar 2026 11:59 PM IST
शिमला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Mar 2026 11:59 PM IST
विज्ञापन
आईजीएमसी शिमला।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में बीते साल सितंबर से दिसंबर तक चार माह में टीबी के 242 मामले आए हैं। इसमें हर आयु वर्ग के लोग शामिल थे। टीबी शरीर के अलग-अलग अंगों में पाया गया है। पल्मोनरी विभागाध्यक्ष डाॅ. मलय सरकार के मुताबिक क्षय रोग शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार के टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में लोगों की घर-घर जाकर स्क्रीनिंग होने लगी है, इससे टीबी के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। समय से रोग का पता लगने पर लोगों का उपचार भी हो रहा है, वह स्वस्थ भी हो रहे हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता के कम होने से क्षय रोग होता है। इसमें शूगर, कैंसर, उच्च रक्तचाप, एचआईवी संक्रमित व्यक्ति, धूम्रपान और नियमित शराब का सेवन करने वालों, कुपोषण से ग्रसित लोगों को टीबी होने की संभावना अधिक रहती है। यह रोग किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को हो सकता है। 42 फीसदी सब क्लीनिकल मामले रहते हैं, जिसमें टीबी के शुरुआती लक्षण नजर ही नहीं आते। डॉ. सरकार ने बताया कि टीबी रोग किस हिस्से को प्रभावित कर रहा है, उसके अनुसार रोग के लक्षण नजर आते हैं। समय से उपचार शुरू होने पर इस रोग से पूरी ठीक होने की संभावना रहती है।
विज्ञापन
रोग प्रतिरोधक क्षमता के कम होने से क्षय रोग होता है। इसमें शूगर, कैंसर, उच्च रक्तचाप, एचआईवी संक्रमित व्यक्ति, धूम्रपान और नियमित शराब का सेवन करने वालों, कुपोषण से ग्रसित लोगों को टीबी होने की संभावना अधिक रहती है। यह रोग किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को हो सकता है। 42 फीसदी सब क्लीनिकल मामले रहते हैं, जिसमें टीबी के शुरुआती लक्षण नजर ही नहीं आते। डॉ. सरकार ने बताया कि टीबी रोग किस हिस्से को प्रभावित कर रहा है, उसके अनुसार रोग के लक्षण नजर आते हैं। समय से उपचार शुरू होने पर इस रोग से पूरी ठीक होने की संभावना रहती है।
विज्ञापन
टीबी रोग के लक्षण
डॉ. मलय सरकार ने बताया कि टीबी रोग के आम लक्षणों में दो सप्ताह से अधिक खांसी, वजन का कम होना, भूख न लगना, बार-बार बुखार, पसीना आना, कभी खांसी के बाद थूक में खून आना हो सकता है। यह लक्षण नजर आने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम में 45 से अधिक हाई रिस्क वाले लोगों की जांच की जाती है, जिसे हर कोई जरूर करवाएं। इससे टीबी रोग से बचा जा सकता है। एक्सरे और अन्य टेस्ट करने के बाद रोग से बचाव के लिए दवा का कोर्स किए जाने से टीबी (क्षय रोग) से बचा जा सकता है।
ऐसे करें बचाव
टीबी रोग से बचने के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी है। टीबी कुपोषण वाले लोगों को होने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए खान-पान का विशेष ध्यान रखें। संक्रमित को मास्क का उपयोग करना चाहिए, हवादार कमरों में रहना और हाथों को बार-बार धोना चाहिए। मरीज के खांते और छींकते समय मुंह ढक रखें। मरीजों को प्रोटीन, कैलोरी, विटामिन और खनिजों से भरपूर पौष्टिक आहार लेना चाहिए। मुख्य रूप से दालें, अंडे, सोयाबीन, दूध, पनीर, फल (पपीता, अमरूद), हरी पत्तेदार सब्जियां, सूखे मेवे, नट्स और साबुत अनाज खाएं। बार-बार थोड़ा-थोड़ा खाना और खूब पानी पीना फायदेमंद है।
डॉ. मलय सरकार ने बताया कि टीबी रोग के आम लक्षणों में दो सप्ताह से अधिक खांसी, वजन का कम होना, भूख न लगना, बार-बार बुखार, पसीना आना, कभी खांसी के बाद थूक में खून आना हो सकता है। यह लक्षण नजर आने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम में 45 से अधिक हाई रिस्क वाले लोगों की जांच की जाती है, जिसे हर कोई जरूर करवाएं। इससे टीबी रोग से बचा जा सकता है। एक्सरे और अन्य टेस्ट करने के बाद रोग से बचाव के लिए दवा का कोर्स किए जाने से टीबी (क्षय रोग) से बचा जा सकता है।
ऐसे करें बचाव
टीबी रोग से बचने के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी है। टीबी कुपोषण वाले लोगों को होने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए खान-पान का विशेष ध्यान रखें। संक्रमित को मास्क का उपयोग करना चाहिए, हवादार कमरों में रहना और हाथों को बार-बार धोना चाहिए। मरीज के खांते और छींकते समय मुंह ढक रखें। मरीजों को प्रोटीन, कैलोरी, विटामिन और खनिजों से भरपूर पौष्टिक आहार लेना चाहिए। मुख्य रूप से दालें, अंडे, सोयाबीन, दूध, पनीर, फल (पपीता, अमरूद), हरी पत्तेदार सब्जियां, सूखे मेवे, नट्स और साबुत अनाज खाएं। बार-बार थोड़ा-थोड़ा खाना और खूब पानी पीना फायदेमंद है।