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पैसा खर्च नहीं कर पाया निगम, लाखों के प्रोेजेक्टों पर संकट

Thu, 26 Oct 2017 10:58 PM IST
Updated Thu, 26 Oct 2017 10:58 PM IST
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पैसा खर्च नहीं कर पाया निगम, लाखों के प्रोेजेक्टों पर संकट
अमर उजाला ब्यूरो
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शिमला। यूरोपियन यूनियन की मदद से राजधानी में लाखों रुपयों के दो बड़े प्रोजेक्ट लगाने के नगर निगम के प्लान पर संकट मंडराने लगा है। तय समयसीमा के भीतर पैसा खर्च न कर पाने से इन प्रोजेक्टों के लिए मिला बजट रिफंड करना पड़ सकता है। निगम और यूनियन की तकनीकी टीम की सुस्ती से 9 लाख 34 हजार रुपये की लागत से हिप्पा में लगने वाला वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। इसी तरह भरयाल में बनने वाले फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट का काम भी लटका पड़ा है। 30 अक्तूबर को एक्सटेंशन खत्म हो रही है। ऐसे में निगम को लाखों रुपये का बजट लौटाना पड़ सकता है। हालांकि, अभी निगम ने यूनियन से बात करने के लिए 15 नवंबर को बैठक बुलाई है। इसमें यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर प्रोजेक्ट को कुछ माह की एक्सटेंशन देने की कोशिश की जाएगी।
वीरवार को मेयर कुसुम सदरेट की अध्यक्षता में यूरोपियन यूनियन प्रोजेक्ट को लेकर बैठक भी हुई। इसमें निगम के उप महापौर राकेश शर्मा, आयुक्त जीसी नेगी, अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र गिल और निगम के अन्य अधिकारी शामिल हुए। बैठक में चर्चा हुई कि 30 अक्तूबर को यदि यूनियन के प्रतिनिधि शिमला आते हैं, तो उनसे बातचीत कर प्रोजेक्ट पर एक्सटेंशन ली जाएगी।
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पांच में से तीन प्रोजेक्ट का काम पूरा
साल 2013 में नगर निगम ने यूरोपियन यूनियन के साथ मिलकर शिमला में पांच प्रोजेक्ट लगाने को समझौता किया था। इसके तहत टुटू की बंगाला कॉलोनी में 11.74 लाख की लागत से शौचालय बनाने, 12.50 लाख से नवबहार में ई टॉयलेट बनाने, 36 लाख से लालपानी में एसटीपी बायोगैस प्लांट लगाने का प्रस्ताव था। ये तीनों ही प्रोजेक्ट समयसीमा के भीतर पूरे कर लिए गए। लेकिन, हिप्पा में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और भरयाल में स्लज ट्रीटमेंट प्लांट का काम समयसीमा के भीतर पूरा नहीं किया जा सका।
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क्या कहती हैं मेयर
मेयर नगर निगम शिमला कुसुम सदरेट ने कहा कि यूनियन के प्रतिनिधियों से इसके बारे में दोबारा बात की जाएगी। उन्हें 15 नवंबर को बातचीत के लिए बुलाया गया है। बचे हुए प्रोजेक्ट पर काम होगा या नहीं, इसी बैठक में यह तय होगा।
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