राजस्व विभाग का कारनामा, तकसीम में बदल दिए जमीन के खसरा नंबर
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शहर के साथ लगते सरगीण और दोची में राजस्व महकमे ने करोड़ों की जमीन की ऐसी पैमाईश कर डाली की भूमि मालिकों के खाता नंबर इधर से उधर हो गए। लोगों की जमीन भी किसी दूसरे खाते में शिफ्ट हो गई। मालिकाना हक किसी और के नाम होने से हिस्सेदारों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
इसमें एक दो नहीं बल्कि सरगीण गांव के 40 और दोची गांव के 73 हिस्सेदार शामिल हैं। इसमें एक हिस्सेदार ऐसे भी हैं जिनका दस्तावेजों में पहले डेढ़ बीघा हक था अब इसकी जगह नौ बिस्वा रह गया।राजस्व विभाग ने सौ बीघा से अधिक इस जमीन की तकसीम भी कर दी है।
हिस्सेदारों को जब इस कथित गड़बड़झाले का पता चला तो उन्होंने तत्काल इंतकाल को रद्द करने के लिए लिखित में उपायुक्त को शिकायत पत्र सौंपा।
तत्कालीन राजस्व अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
इस पूरे प्रकरण में पहले चरण में 40 हिस्सेदारों ने एक संयुक्त शिकायत दी है। इनमें शिकायतकर्ता नारायण सिंह ठाकुर ने कहा कि बंदोबस्त से पहले सरगीण गांव एक ही था लेकिन बाद में दो हिस्सों में बदल दिया। इसमें एक सरगीण और दूसरा दोची गांव हो गया।
जमीन की रजिस्ट्री और ऋण लेने पर लगे रोक
इन दो जगहों पर गांव वालों की बीघों के हिसाब से जमीनें हैं और इनके 100 से भी अधिक हिस्सेदार हैं। 28 जनवरी 2017 को तकसीम के लिए आवेदन किया। इसके बाद पता चला कि मालिकाना हक किसी और के नाम हो गया है। यह अकेले उनके साथ नहीं कई हिस्सेदारों के साथ हुआ है।
यह सब तत्कालीन राजस्व अधिकारी और कर्मचारियों की वजह से हुआ है क्योंकि जब उनसे उस समय बात की गई तो उन्होंने कहा कि तकसीम हो गई अब बाद में तबादला करवा लेना। उन्होंने जमीन के दस्तावेज हासिल किए तो हैरान रह गए।
जमीन का न ही वह ततीमा था और न ही खसरा नंबर था। ततीमा से ही पता चला कि अब जमीन कहीं और है और यह किसी और नंबर पर चढ़ा दी है। इस खुलासे के बाद कई हिस्सेदारों ने इस पर आपत्ति जता दी है और उपायुक्त को भी लिखित में शिकायत दे दी है।
हिस्सेदारों ने उपायुक्त से अपील की है कि जब तक इंतकाल को रद्द न किया जाए तब तक जमीन के इन खाता नंबरों की रजिस्ट्री करने पर तत्काल रोक लगा दी जाए। न ही इन खाता नंबरों पर ऋण लेने की स्वीकृति दी जाए।
राजस्व महकमे की वजह से दर्जनों हिस्सेदारों को परेशानी में डाल दिया है। इसके पीछे जो भी उनके खिलाफ कार्रवाई हो। डीसी शिमला अमित कश्यप ने कहा कि शिकायतपत्र को पढ़ने के बाद सभी तथ्य जांचें जाएंगे। आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसमें अगर किसी की लापरवाही पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई होगी।