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हजारों पुराने पास नक्शों पर गेंद अब सरकार के पाले में
Updated Sun, 10 Dec 2017 09:37 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला।
शिमला प्लानिंग एरिया में ऐसे हजारों भवन मालिक हैं, जिन्होंने नक्शा पास करवा रखा है लेकिन भवन का निर्माण नहीं किया है। ऐसे भवन मालिकों को नए सिरे से नक्शा पास कराना है या नहीं। अब इसका फैसला प्रदेश सरकार लेगी। टीसीपी ने इस पर निर्णय लेने की फाइल सरकार को भेजी है। एनजीटी ने शिमला प्लानिंग एरिया में ढाई मंजिला भवन बनाने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में हजारों लोग असमंजस में है कि पहले नक्शा पास करवा रखा है। मौके पर काम न किए जाने के बाद अब उन्हें क्या करना होगा? टीसीपी कार्यालय में लगातार इस बात की जानकारी लेकर फोन की घंटियां बज रही हैं।
टीसीपी के नियमों के मुताबिक फ्लोर एरिया रेशों (एफएआर) के हिसाब से लोगों को मंजिलें की जाती हैं। कम से कम नॉन कोर एरिया में चार मंजिलें और एक एरिक दी जाती है। लेकिन एनजीटी ने इस पर रोक लगाकर ढाई मंजिला तक भवन का नक्शा पास करने की अनुमति दी है। टीसीपी के निदेशक संदीप कुमार ने बताया कि जिन लोगों ने नक्शा पास कराने के बाद मौके पर कुछ काम नहीं किया है, उन्हें नए सिरे से नक्शा बनाना है या नहीं। इसका फैसला सरकार को लेना है।
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पांच साल में बनाना होगा भवन
नक्शा पास होने के बाद अब लोगों को पांच साल के भीतर भवन का निर्माण करना होगा। पहले तीन साल के भीतर लोगों को भवन बनाने होता था। सरकार ने इसमें दो साल की छूट है। लेकिन इसके लिए लोगों को पहले टीसीपी कार्यालय में भवन न बनाने का ठोस कारण बताना होगा। इसके बाद ही लोगों को दो साल और मिलेगी।
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तीन साल में मौके पर काम होना जरूरी
टीसीपी का मानना है कि पांच साल के भीतर मौके पर कुछ काम होना जरूरी है। अगर इस समय अवधि पर काम नहीं किया जाता है तो नक्शे को रद्द माना जाता है।
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शिमला।
शिमला प्लानिंग एरिया में ऐसे हजारों भवन मालिक हैं, जिन्होंने नक्शा पास करवा रखा है लेकिन भवन का निर्माण नहीं किया है। ऐसे भवन मालिकों को नए सिरे से नक्शा पास कराना है या नहीं। अब इसका फैसला प्रदेश सरकार लेगी। टीसीपी ने इस पर निर्णय लेने की फाइल सरकार को भेजी है। एनजीटी ने शिमला प्लानिंग एरिया में ढाई मंजिला भवन बनाने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में हजारों लोग असमंजस में है कि पहले नक्शा पास करवा रखा है। मौके पर काम न किए जाने के बाद अब उन्हें क्या करना होगा? टीसीपी कार्यालय में लगातार इस बात की जानकारी लेकर फोन की घंटियां बज रही हैं।
टीसीपी के नियमों के मुताबिक फ्लोर एरिया रेशों (एफएआर) के हिसाब से लोगों को मंजिलें की जाती हैं। कम से कम नॉन कोर एरिया में चार मंजिलें और एक एरिक दी जाती है। लेकिन एनजीटी ने इस पर रोक लगाकर ढाई मंजिला तक भवन का नक्शा पास करने की अनुमति दी है। टीसीपी के निदेशक संदीप कुमार ने बताया कि जिन लोगों ने नक्शा पास कराने के बाद मौके पर कुछ काम नहीं किया है, उन्हें नए सिरे से नक्शा बनाना है या नहीं। इसका फैसला सरकार को लेना है।
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पांच साल में बनाना होगा भवन
नक्शा पास होने के बाद अब लोगों को पांच साल के भीतर भवन का निर्माण करना होगा। पहले तीन साल के भीतर लोगों को भवन बनाने होता था। सरकार ने इसमें दो साल की छूट है। लेकिन इसके लिए लोगों को पहले टीसीपी कार्यालय में भवन न बनाने का ठोस कारण बताना होगा। इसके बाद ही लोगों को दो साल और मिलेगी।
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तीन साल में मौके पर काम होना जरूरी
टीसीपी का मानना है कि पांच साल के भीतर मौके पर कुछ काम होना जरूरी है। अगर इस समय अवधि पर काम नहीं किया जाता है तो नक्शे को रद्द माना जाता है।