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धामी मेले में जमकर चले पत्थर
Updated Fri, 20 Oct 2017 10:38 PM IST
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शिमला। धामी में शुक्रवार को पत्थर मेेले में हजारों लोग जुटे। मेले में कारदारों ने जमकर एक-दूसरे पर पत्थर बरसाए। कारदार के पत्थर लगने पर माता के दरबार में भद्रकाली को रक्त का तिलक लगाया गया। हजारों की संख्या में लोगों ने भद्रकाली मंदिर में शीश नवाया और माता का आशीर्वाद लिया।
पत्थर मेले में आसपास की करीब 20 पंचायतों के हजारों लोगों ने भाग लिया। मेले में महिलाओं, बच्चों समेेत बुजुर्ग भी शामिल थे। मेले का कार्यक्रम करीब एक घंटे तक चलता रहा। मेले में कारदारों ने दूरी से जमकर एक-दूसरे पर पत्थर बरसाए। कारदारों में एक गुट दगोई, तुल्सू, जुलई, कटेडू और राज परिवार का था, वहीं दूसरा गुट जमोगी का था। इस बार मेले में जमोगी गुट के कारदार के रक्त का तिलक माता को लगाया गया। मेले में पुलिस प्रशासन ने व्यवस्था को सुचारु रूप से कायम रखा।
यह है मेले की मान्यता
धामी रियासत में सदियों से इस मेले का आयोजन किया जाता है। बताया जाता है कि प्राचीन काल में माता भद्रकाली को मानव बलि दी जाती थी। रियासत की रानी को बलि की यह प्रथा पसंद नहीं थी। राजा के देहांत के बाद रानी ने सती होने से पहले यह प्रथा बंद कर दी और पत्थर मेेले का आयोजन शुरू कर दिया। जिस जगह पर रानी सती हुई, उसी जगह रियासत के कारदार इस मेले का आयोजन करते हैं। मेले में दूरी से रियासत के ही कारदार एक-दूसरे को पत्थर मारते हैं और जिस कारदार को पहला पत्थर लगता है, उसके रक्त का तिलक माता भद्रकाली को लगाया जाता है।
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पत्थर मेले में आसपास की करीब 20 पंचायतों के हजारों लोगों ने भाग लिया। मेले में महिलाओं, बच्चों समेेत बुजुर्ग भी शामिल थे। मेले का कार्यक्रम करीब एक घंटे तक चलता रहा। मेले में कारदारों ने दूरी से जमकर एक-दूसरे पर पत्थर बरसाए। कारदारों में एक गुट दगोई, तुल्सू, जुलई, कटेडू और राज परिवार का था, वहीं दूसरा गुट जमोगी का था। इस बार मेले में जमोगी गुट के कारदार के रक्त का तिलक माता को लगाया गया। मेले में पुलिस प्रशासन ने व्यवस्था को सुचारु रूप से कायम रखा।
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यह है मेले की मान्यता
धामी रियासत में सदियों से इस मेले का आयोजन किया जाता है। बताया जाता है कि प्राचीन काल में माता भद्रकाली को मानव बलि दी जाती थी। रियासत की रानी को बलि की यह प्रथा पसंद नहीं थी। राजा के देहांत के बाद रानी ने सती होने से पहले यह प्रथा बंद कर दी और पत्थर मेेले का आयोजन शुरू कर दिया। जिस जगह पर रानी सती हुई, उसी जगह रियासत के कारदार इस मेले का आयोजन करते हैं। मेले में दूरी से रियासत के ही कारदार एक-दूसरे को पत्थर मारते हैं और जिस कारदार को पहला पत्थर लगता है, उसके रक्त का तिलक माता भद्रकाली को लगाया जाता है।
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