शिमला गैंगरेप केस में ऐतिहासिक फैसला, मिला इंसाफ
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शिमला में 103 टनल के साथ लगते जंगल में एक छात्रा से गैंग रेप के मामले के दो आरोपियों को अदालत ने दोषी करार देते हुए 20-20 साल की कैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक आरोपी को 25-25 हजार जुर्माना भरने के भी आदेश दिए हैं। सोमवार को सेशन जज (फोरेस्ट) राजेंद्र कुमार शर्मा की अदालत ने सालभर के अंदर यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
सरकार की ओर से शुरू से ही इस मामले की पैरवी जिला न्यायवादी आत्माराम ने की। आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में तत्कालीन एसपी शिमला अभिषेक दुल्लर और उनकी टीम को भी श्रेय जाता है। इन्होंने आरोपियों की खोजबीन में रात दिन एक कर दिया था। वह तब तक चैन से नहीं बैठे जब तक दोनों आरोपियों की शिनाख्त करवाकर उन्हें गिरफ्तार नहीं कर लिया।
पुलिस रेड का डर दिखाकर लूटी थी अस्मत
यह मामला 16 मई 2014 का है। 18 साल की एक युवती अपने दोस्त के साथ पैदल करीब दोपहर दो बजे 103 टनल के पास से गुजर रही थी। वह दोस्त के साथ बीबीए का प्रोस्पेक्ट लेने के लिए जा रही थी। तभी अचानक उन्हें रास्ते में अभियुक्त राकेश कुमार (36) मिला।
उसने कहा कि यहां पुलिस की रेड पड़ी है। वह कपल को पकड़कर ले जा रहे हैं। अभियुक्त ने कहा कि वह उन्हें पुलिस के चंगुल से बचा सकता है। उसकी बातों पर विश्वास करके दोनों उसके साथ चल पड़े। थोड़ी दूर आगे जाने के बाद सह अभियुक्त राम प्रसाद मिला।
तब राकेश कुमार ने कहा कि यहां दोनों को अलग होना होगा और वह अलग-अलग उन्हें सुरक्षित समरहिल चौक पर पहुंचा देंगे। लड़की को लेकर राकेश कुमार जंगल की ओर भीतर चला गया जबकि राम प्रसाद लड़की के दोस्त को दूसरे रास्ते से ले गया। उसके दोस्त को रेलवे ट्रैक तक पहुंचाने के बाद राम प्रसाद लौट आया। इस बीच राकेश कुमार ने लड़की के साथ दुराचार किया। बाद में राम प्रसाद ने भी दुराचार किया।
ऐसे पकड़े गए दोनों आरोपी
गैंग रेप करने के बाद आरोपी लड़की को वहीं छोड़कर फरार हो गए। वारदात के बाद लड़की काफी डरी हुई थी। वह चीखते चिल्लाते हुए जंगल से बाहर आने की कोशिश कर रही थी, इसी दौरान वह एक मकान में पहुंची और वहां से उसने अपने परिजनों को कॉलकर आपबीती सुनाई। परिजनों ने वहां पहुंचकर थाना बालूगंज में मुकदमा दर्ज करवाया।
आरोपियों के स्केच बनाए और करीब तीन सौ से ज्यादा संदिग्धों को पूछताछ के लिए बुलाया। काफी मशक्कत के बाद मुख्य आरोपी राकेश कुमार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। दूसरे आरोपी को रिकांगपिओ से पकड़ा गया। तफ्तीश पूरी होने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। सरकार की ओर से शुरू से ही मामले की पैरवी जिला न्यायवादी आत्माराम ने की?