कांग्रेस का सदन से वॉकआउट, मेयर के सामने भिड़े भाजपाई पार्षद
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नगर निगम की मासिक बैठक में शुक्रवार को जमकर हंगामा बरपा। पुलिस के पहरे के बावजूद सदन में कांग्रेस पार्षदों ने उग्र तेवर दिखाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। वहीं, भाजपा के अपने पार्षद भी मेयर के सामने ही उलझ पड़े। बाद में बगावती पार्षदों ने भी सदन से वॉकआउट कर दिया।
महापौर कुसुम सदरेट की अध्यक्षता में दोपहर 2:30 बजे शुरू हुई बैठक में कांग्रेसी पार्षद सबसे पहले सदन में पहुंचे। सिटिंग प्लान के विपरीत ये सभी मेयर की दाईं ओर की सीटों पर बैठ गए। इसके बाद मेयर-डिप्टी मेयर, आयुक्त और अन्य अधिकारी पहुंचे।
इनके साथ मेयर का साथ दे रहे पार्षद विवेक शर्मा, आशा शर्मा, किरण बावा, सुनील धर, बिट्टू कुमार और संजीव शर्मा भी पहुंचे। करीब पांच मिनट बाद भाजपा के बगावती पार्षदों का दूसरा गुट भी सदन में पहुंच गया।
इनमें पार्षद किमी सूद, आरती चौहान, कमलेश मेहता, रेनु चौहान, बृज सूद, पूर्णमल, शैलेंद्र चौहान, सत्या कौंडल, जगजीत बग्गा शामिल रहे। ये सदन में पीछे वाली सीटों पर सबसे अलग बैठ गए।
कांग्रेस का हंगामा, वॉकआउट
सदन शुरू होते ही कांग्रेसी पार्षद राकेश चौहान, अर्चना धवन, दिवाकर शर्मा, माकपा पार्षद शैली शर्मा ने कहा कि विपक्ष के 15 और भाजपा के 12 पार्षद मेयर के खिलाफ हैं। वे पद छोड़ दें। इस पर मेयर के पक्ष वाले पार्षद संजीव शर्मा और विवेक शर्मा ने पूछा कि 27 लोगों के हस्ताक्षर कहां हैं? इस पर हंगामा शुरू हो गया।
विपक्षी पार्षद नारेबाजी करते हुए मेयर के सामने आ गए। इनकी करीब दस मिनट तक मेयर के पक्ष वाले छह भाजपा पार्षदों से तीखी नोकझोंक हुई। उधर, बगावती पार्षद मेयर का साथ देने की बजाय चुपचाप तमाशा देखते रहे। इसी बीच आयुक्त ने जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू की कि पार्षद अर्चना धवन ने उनका माइक मोड़ दिया।
विपक्षी पार्षद टेबल पीटने लगे और नारेबाजी की। कहा कि मेयर-डिप्टी मेयर को नई गाड़ियां चाहिए। लोगों को सीवरेज पिला रहे हैं, विदेश दौरे किए जा रहे हैं, लेकिन जनता के काम नहीं कर रहे। इसके बाद विपक्षी पार्षदों ने वॉकआउट कर दिया।
बीस मिनट के लिए स्थगित कर दिया सदन
कांग्रेस के हंगामे के बाद मेयर ने 20 मिनट के लिए सदन स्थगित कर दिया। 3:10 बजे जैसे ही दोबारा सदन शुरू हुआ कि आयुक्त ने प्रस्ताव और सवाल पर चर्चा शुरू की। लेकिन भाजपा पार्षद कमलेश मेहता, किमी सूद ने अपने अपने सवाल स्किप करते हुए अपना विरोध जताया। कई ऐसे प्रस्ताव आए जो एफसीपीसी और जीएफसी की बैठक में नहीं गए थे।
इस पर पार्षद शैलेंद्र चौहान ने पूछा कि जब इन कमेटियों की बैठकें ही नहीं बुलानी है तो इन्हें बनाया क्यों है? हमारे इस्तीफे ले लो। मेयर ने तुरंत इन प्रस्तावों को एफसीपीसी में लाने का फैसला लिया लेकिन इस मुद्दे पर नाराज पार्षद मेयर का समर्थन करने वाले पार्षदों से ही भिड़ गए। इसके बाद बगावती पार्षदों के गुट ने भी 3:20 बजे सदन से वॉकआउट कर दिया।