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डॉक्टर परीक्षा की तैयारी में, मरीज परेशान
Updated Thu, 14 Dec 2017 10:35 PM IST
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शिमला। जोनल अस्पताल डीडीयू के डॉक्टर इन दिनों आईजीएमसी में होने वाले साक्षात्कार और जनवरी में होने वाली नीट परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं। जबकि, यहां इलाज करवाने पहुंच रहे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल की ओपीडी में डाक्टरों के न होने के कारण मरीजों को बिना इलाज करवाए लौटने को मजबूर होना पड़ रहा है। अस्पताल में सबसे अधिक परेशानी मेडिसन और जनरल ओपीडी में पेश आ रही है। यहां पर पिछले कई दिन से डॉक्टर कैजुअल लीव तो कुछ अर्नलीव पर गए हैं। इसके चलते अस्पताल की मेडिसन ओपीडी के दरवाजे बंद हैं। पिछले कई दिन से इस तरह की स्थिति होने के कारण इलाज करवाने आने वाले मरीज बेहद परेशान हैं।
दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (रिपन) में वीरवार को भी ऐसा ही मामला पेश आया। अस्पताल में सुबह से पर्ची काउंटराें पर मरीजों की भीड़ उमड़ना शुरू हो गई थी। अधिकतर मरीज सिर में तेज दर्द और बुखार की समस्या को लेकर अस्पताल पहुंच रहे थे। काउंटर पर पर्चियां तो बनाई जा चुकी थीं, लेकिन जब मरीज मेडिसन ओपीडी 103 पहुंचे तो उन्हें वहां डॉक्टर नहीं मिले। ओपीडी का दरवाजा भी बंद था। इसके बाद मरीज 7 नंबर ओपीडी पहुंचे तो जवाब मिला कि आप 213 नंबर में जाइए। यह अस्पताल का इमरजेंसी विभाग था। यहां पर पहुंचने के बाद ही मरीजों को उपचार मिल रहा था। जबकि, इमरजेंसी में मरीजों समेत रुटीन ओपीडी के मरीज यहां पर देखे जा रहे थे। कई मरीजों ने तो डॉक्टर के आने के बाद ही उन्हें दिखाने के बारे में सोचा जबकि कई मरीज तो बिना इलाज करवाए से लौट गए। अस्पताल में रोजाना इन ओपीडी में सौ से अधिक मरीज इलाज करवाते हैं। ऐसे में पिछले एक सप्ताह भर से आ रही परेशानी का हल करने के लिए कोई भी उचित प्रबंध प्रबंधन नहीं उठा पाया है। इससे आने वाले दिनों में भी मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
परीक्षा की तैयारी के कारण डॉक्टर छुट्टी पर
इन दिनों आईजीएमसी में डॉक्टरों के इंटरव्यू होने हैं, जबकि जनवरी में नीट की परीक्षा होनी है। ऐसे में अधिकांश डॉक्टर छुट्टी पर हैं। इसके चलते यहां पर डॉक्टरों की कमी है। हालांकि, अन्य डॉक्टरों को ओपीडी में बैठाकर मरीजों को इलाज दिया जा रहा है।
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- डॉ. रंजना रॉव, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, डीडीयू
जनरल ओपीडी के डॉक्टर की इमरजेंसी में ड्यूटी
जनरल ओपीडी में वैसे तो रोजाना चार डॉक्टर मरीजों का चेकअप करते हैं, लेकिन कई डॉक्टर कैजुअल लीव के कारण छुट्टी पर हैं। वहीं, जो डॉक्टर छुट्टी पर नहीं है, उस डॉक्टर की ड्यूटी वीरवार को इमरजेंसी में थी। ओपीडी में पूछताछ के बाद मरीजों को यहां पर इलाज के लिए भेजा जा रहा था।
किस मरीज ने क्या कहा
चौड़ा मैदान से सात नंबर ओपीडी में गायत्री अपनी बेटी योगिता के इलाज के लिए पहुंची थीं। लेकिन उन्हें डॉक्टर नहीं मिले। इसके बाद वह यहां से लौट गईं। वहीं दूसरे मामले में रामपुर के खेमचंद भी चेकअप के लिए डॉक्टर के पास पहुंचे थे लेकिन काउंटर पर डॉक्टर के न होने के कारण उन्हें मायूस होकर लौटाना पड़ा। दूसरी ओर बिलासपुर से आई अनीता देवी ने कहा कि उन्हें भी डॉक्टर नहीं मिले हैं। अब अपने पति का इंतजार कर रही हूं।
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दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (रिपन) में वीरवार को भी ऐसा ही मामला पेश आया। अस्पताल में सुबह से पर्ची काउंटराें पर मरीजों की भीड़ उमड़ना शुरू हो गई थी। अधिकतर मरीज सिर में तेज दर्द और बुखार की समस्या को लेकर अस्पताल पहुंच रहे थे। काउंटर पर पर्चियां तो बनाई जा चुकी थीं, लेकिन जब मरीज मेडिसन ओपीडी 103 पहुंचे तो उन्हें वहां डॉक्टर नहीं मिले। ओपीडी का दरवाजा भी बंद था। इसके बाद मरीज 7 नंबर ओपीडी पहुंचे तो जवाब मिला कि आप 213 नंबर में जाइए। यह अस्पताल का इमरजेंसी विभाग था। यहां पर पहुंचने के बाद ही मरीजों को उपचार मिल रहा था। जबकि, इमरजेंसी में मरीजों समेत रुटीन ओपीडी के मरीज यहां पर देखे जा रहे थे। कई मरीजों ने तो डॉक्टर के आने के बाद ही उन्हें दिखाने के बारे में सोचा जबकि कई मरीज तो बिना इलाज करवाए से लौट गए। अस्पताल में रोजाना इन ओपीडी में सौ से अधिक मरीज इलाज करवाते हैं। ऐसे में पिछले एक सप्ताह भर से आ रही परेशानी का हल करने के लिए कोई भी उचित प्रबंध प्रबंधन नहीं उठा पाया है। इससे आने वाले दिनों में भी मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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परीक्षा की तैयारी के कारण डॉक्टर छुट्टी पर
इन दिनों आईजीएमसी में डॉक्टरों के इंटरव्यू होने हैं, जबकि जनवरी में नीट की परीक्षा होनी है। ऐसे में अधिकांश डॉक्टर छुट्टी पर हैं। इसके चलते यहां पर डॉक्टरों की कमी है। हालांकि, अन्य डॉक्टरों को ओपीडी में बैठाकर मरीजों को इलाज दिया जा रहा है।
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- डॉ. रंजना रॉव, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, डीडीयू
जनरल ओपीडी के डॉक्टर की इमरजेंसी में ड्यूटी
जनरल ओपीडी में वैसे तो रोजाना चार डॉक्टर मरीजों का चेकअप करते हैं, लेकिन कई डॉक्टर कैजुअल लीव के कारण छुट्टी पर हैं। वहीं, जो डॉक्टर छुट्टी पर नहीं है, उस डॉक्टर की ड्यूटी वीरवार को इमरजेंसी में थी। ओपीडी में पूछताछ के बाद मरीजों को यहां पर इलाज के लिए भेजा जा रहा था।
किस मरीज ने क्या कहा
चौड़ा मैदान से सात नंबर ओपीडी में गायत्री अपनी बेटी योगिता के इलाज के लिए पहुंची थीं। लेकिन उन्हें डॉक्टर नहीं मिले। इसके बाद वह यहां से लौट गईं। वहीं दूसरे मामले में रामपुर के खेमचंद भी चेकअप के लिए डॉक्टर के पास पहुंचे थे लेकिन काउंटर पर डॉक्टर के न होने के कारण उन्हें मायूस होकर लौटाना पड़ा। दूसरी ओर बिलासपुर से आई अनीता देवी ने कहा कि उन्हें भी डॉक्टर नहीं मिले हैं। अब अपने पति का इंतजार कर रही हूं।