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पेपर फ्लैग के नाम पर मरीजों से कर ली वसूली
Updated Mon, 07 May 2018 10:48 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। रेडक्रॉस के लिए फंड इकट्ठा करने के लिए भेजे गए पेपर फ्लैग से वसूल किए जाने वाला फंड आईजीएमसी प्रबंधन ने मरीजों से ही वसूल डाला। रेडक्रॉस की ओर से इस पेपर फ्लैग को अस्पताल स्टाफ को बांटा जाना था। वहीं जो पैसा इकट्ठा होना था, उन पैसों को कोष में डालकर फंड से गरीबों मदद की जानी थी, लेकिन प्रबंधन ने अपने स्टाफ से पेपर फ्लैग के बदले दिए जाने वाले दस रुपये लेने तक उचित नहीं समझे। इसका बोझ सीधा पर्ची काउंटर पर पर्ची बनाने आए पीड़ित मरीजों की जेब में डाल दिया।
आईजीएमसी के लिए रेडक्रॉस की ओर से एक हजार के करीब स्टीकर भेजे गए थे। प्रत्येक स्टीकर के बदले स्टाफ से दस रुपये वसूल किए जाने थे। अस्पताल में करीब 1200 से 1300 के करीब स्टाफ है, लेकिन प्रबंधन ने इन स्टाफ को स्टीकर लेने के बारे में पूछा तक नहीं। पेपर फ्लैग के आने के बाद प्रबंधन ने बड़ी होशियारी से इन पेपर को इमरजेंसी स्थित जनरल पर्ची काउंटर पर भेज दिया और वहां तैनात स्टाफ कर्मियों से पर्ची पर स्टीकर लगाकर रोगियों से दस रुपये वसूलने की बात कह डाली। कर्मियों ने भी प्रबंधन के आदेश मिलने के बाद प्रत्येक पर्ची पर स्टीकर लगाए। आर्थिक रुप से असहाय मरीजों ने तो इसका विरोध भी किया बावजूद इसके स्टाफ की ओर से रुपये वसूल लिए गए। अब जब अस्पताल प्रबंधन को इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने ने भी बेतुका सा जवाब देकर मामले पर लीपापोती कर दी।
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अवैध वसूली नहीं है
यह प्रक्रिया हमेशा से होती आई है। हर बार मरीजों की पर्चियों में यह फ्लैग लगाया जाता है। जबरदस्ती किसी भी मरीज से पैसे नहीं मांगे गए है। वहीं यह किसी भी तरह की अवैध वसूली नहीं है। इकट्ठा हुआ फंड रेडक्रॉस के कोष में ही जाएगा।
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- डॉ. जनक राज, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी
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स्टाफ को दिए थे पेपर फ्लैग
गरीब लोगों की सहायता करने के लिए पेपर फ्लैग दिए गए थे। वहीं यह भी कहा गया था कि अस्पताल स्टाफ को यह फ्लैग बांटे जाए। जिससे कि फंड से गरीब लोगों की मदद की जा सके।
- प्रमोद सिंह राणा, सदस्य सचिव, रेडक्रॉस सोसायटी।
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शिमला। रेडक्रॉस के लिए फंड इकट्ठा करने के लिए भेजे गए पेपर फ्लैग से वसूल किए जाने वाला फंड आईजीएमसी प्रबंधन ने मरीजों से ही वसूल डाला। रेडक्रॉस की ओर से इस पेपर फ्लैग को अस्पताल स्टाफ को बांटा जाना था। वहीं जो पैसा इकट्ठा होना था, उन पैसों को कोष में डालकर फंड से गरीबों मदद की जानी थी, लेकिन प्रबंधन ने अपने स्टाफ से पेपर फ्लैग के बदले दिए जाने वाले दस रुपये लेने तक उचित नहीं समझे। इसका बोझ सीधा पर्ची काउंटर पर पर्ची बनाने आए पीड़ित मरीजों की जेब में डाल दिया।
आईजीएमसी के लिए रेडक्रॉस की ओर से एक हजार के करीब स्टीकर भेजे गए थे। प्रत्येक स्टीकर के बदले स्टाफ से दस रुपये वसूल किए जाने थे। अस्पताल में करीब 1200 से 1300 के करीब स्टाफ है, लेकिन प्रबंधन ने इन स्टाफ को स्टीकर लेने के बारे में पूछा तक नहीं। पेपर फ्लैग के आने के बाद प्रबंधन ने बड़ी होशियारी से इन पेपर को इमरजेंसी स्थित जनरल पर्ची काउंटर पर भेज दिया और वहां तैनात स्टाफ कर्मियों से पर्ची पर स्टीकर लगाकर रोगियों से दस रुपये वसूलने की बात कह डाली। कर्मियों ने भी प्रबंधन के आदेश मिलने के बाद प्रत्येक पर्ची पर स्टीकर लगाए। आर्थिक रुप से असहाय मरीजों ने तो इसका विरोध भी किया बावजूद इसके स्टाफ की ओर से रुपये वसूल लिए गए। अब जब अस्पताल प्रबंधन को इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने ने भी बेतुका सा जवाब देकर मामले पर लीपापोती कर दी।
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अवैध वसूली नहीं है
यह प्रक्रिया हमेशा से होती आई है। हर बार मरीजों की पर्चियों में यह फ्लैग लगाया जाता है। जबरदस्ती किसी भी मरीज से पैसे नहीं मांगे गए है। वहीं यह किसी भी तरह की अवैध वसूली नहीं है। इकट्ठा हुआ फंड रेडक्रॉस के कोष में ही जाएगा।
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- डॉ. जनक राज, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी
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स्टाफ को दिए थे पेपर फ्लैग
गरीब लोगों की सहायता करने के लिए पेपर फ्लैग दिए गए थे। वहीं यह भी कहा गया था कि अस्पताल स्टाफ को यह फ्लैग बांटे जाए। जिससे कि फंड से गरीब लोगों की मदद की जा सके।
- प्रमोद सिंह राणा, सदस्य सचिव, रेडक्रॉस सोसायटी।