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िकि िििकििकिके
Updated Sun, 13 Aug 2017 11:23 PM IST
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कोटरोपी(मंडी)। सवा बारह बजे के करीब अचानक जब पहाड़ दरका तो मलबा इतनी तेज गति से आया कि उसकी आवाज से चार गांवो के मकान हिल गए। धरती कांप उठी। ग्रामीण जलजला समझकर घरों से बाहर गए और पांच मिनट में ही गांव के गांव एकत्र होकर जंगलों की तरफ चले गए और पूरी रात वहीं बिताकर सुबह घर को लौटे। सुबह घर की ऊपर की तरफ का पहाड़ देखकर ग्रामीण भाग्य पर हैरत में थे। ठीक मकानों के ऊपर पहाड़ दरका था, लेकिन नाले की वजह से मलबे का रूख बदल गया। अन्यथा यह गांव के गांव मलबे की चपेट में आ जाते। वहीं इन गांवों की आपूर्ति बुरी तरी से प्रभावित हो चुकी है। देर शात तक पानी की आपूर्ति को कुछ हद तक बहाल कर दिया गया थ। लेकिन खौफजदा ग्रामीण घरों में रहने को तैयार नहीं है। दिन भर बिताने के बाद रात इस क्षेत्र से बाहर गुजारने की बात कर रहे हैं। यह गांव भडवान, शास्टी, पदलाहीं, रोपा के करीब 60 परिवारों में इस भयावह मंजर की दहशत देखी जा सकती है। बुजुर्गों के अलावा दिन भर यह गांव खाली दिखे। वहीं कोटरूपी गांव में एनएच से सटे दूनी चंद, ज्ञान चंद, मानचंद के तीन घरों दरारें आई हैं। दूनी चंद के मकान की ऊपरी मंजिल ढह गई है।
इन्होंने खाली किए मकान
भडवान गांव में मंगत राम, लाल सिंह, परम सिंह, देवी राम, बहादुर सिंह, प्रेम सिंह, प्रकाश, शेष राम, टेक चंद, खेम चंद, धनेश्वर दत्त, चुन्नी लाल, वार्ड मेंबर नारायण सिंह, रावण सिंह, बुदिध सिंह, जय सिंह समेत अन्य परिवारों के लोगों का कहना है कि यह मंजर कभी ना भूलने वाले बुरे सपने की तरह हैं।
बच्चों और परिवार को निकालर: जयसिंह
बुजुर्ग जय सिंह ने कहा कि रात जब पहड़ी दरकी तो पहले तो पहले तो बच्चों और परिवार समेत बाहर आए। बाद मेें लोगों की चिखने चिल्लाने की बात सुनकर दिल दहल उठा। सुबह तीन बजे तक पहाड़ी दरकती रही, जिससे रात जंगल मे ंही गुजारनी पड़ी।
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खतरे से खाली नहंीं यहां रहना: बुधि सिंह
बुधि सिंह ने कहा कि यह मंजर कभी ना भूलने वाला थ। पहाड़ी ना होती तो काफी बड़ा हादसा हो सकता। कई मकानों में दरारे आ चुकी हैं। लोग वहां रहने से कतरा रहे हैं। यहां रहना खतरे से खाली नहीं है।
भयावह हादसा था: बबली देवी
बबली देवी ने कहा कि भयावह हादस था। शोर और कंपन से ऐसा लग रहा था की भूचाल ही आ गया हो। घर हिलने से बच्चो के दिल तो बैठ ही गए। साथ ही बुजुर्गों में भी भय का माहौल है।
भारी नुकसान की आशंका: प्रधान
ऊरला पंचायत की प्रधान रेखा देवी का कहना है कि सात परिवारों के मकान, तीन परिवारों की दुकानें ढह गई हैं। वहीं भडवान गांव में सबसे अधिक खतरा बना हुआ है। यदि पहाड़ी दरकती है तो भरी नुकसान होगा।
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इन्होंने खाली किए मकान
भडवान गांव में मंगत राम, लाल सिंह, परम सिंह, देवी राम, बहादुर सिंह, प्रेम सिंह, प्रकाश, शेष राम, टेक चंद, खेम चंद, धनेश्वर दत्त, चुन्नी लाल, वार्ड मेंबर नारायण सिंह, रावण सिंह, बुदिध सिंह, जय सिंह समेत अन्य परिवारों के लोगों का कहना है कि यह मंजर कभी ना भूलने वाले बुरे सपने की तरह हैं।
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बच्चों और परिवार को निकालर: जयसिंह
बुजुर्ग जय सिंह ने कहा कि रात जब पहड़ी दरकी तो पहले तो पहले तो बच्चों और परिवार समेत बाहर आए। बाद मेें लोगों की चिखने चिल्लाने की बात सुनकर दिल दहल उठा। सुबह तीन बजे तक पहाड़ी दरकती रही, जिससे रात जंगल मे ंही गुजारनी पड़ी।
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खतरे से खाली नहंीं यहां रहना: बुधि सिंह
बुधि सिंह ने कहा कि यह मंजर कभी ना भूलने वाला थ। पहाड़ी ना होती तो काफी बड़ा हादसा हो सकता। कई मकानों में दरारे आ चुकी हैं। लोग वहां रहने से कतरा रहे हैं। यहां रहना खतरे से खाली नहीं है।
भयावह हादसा था: बबली देवी
बबली देवी ने कहा कि भयावह हादस था। शोर और कंपन से ऐसा लग रहा था की भूचाल ही आ गया हो। घर हिलने से बच्चो के दिल तो बैठ ही गए। साथ ही बुजुर्गों में भी भय का माहौल है।
भारी नुकसान की आशंका: प्रधान
ऊरला पंचायत की प्रधान रेखा देवी का कहना है कि सात परिवारों के मकान, तीन परिवारों की दुकानें ढह गई हैं। वहीं भडवान गांव में सबसे अधिक खतरा बना हुआ है। यदि पहाड़ी दरकती है तो भरी नुकसान होगा।