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अब नहीं चलेगी मनमानी, मीटर बताएगा टैक्सी का किराया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 05 Oct 2018 09:43 AM IST
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परिवहन विभाग ने न्यायालय के आदेशों पर शिमला शहर में 40 किलोमीटर के दायरे में चलने वाली टैक्सियों में मीटर लगाने शुरू कर दिए हैं। शहर के इर्द गिर्द चलने वाली टैक्सियों में अब टैक्सी ऑपरेटर यात्रियों से मनमाना किराया नहीं वसूल पाएंगे। टैक्सियों में मीटर लगने के बाद यात्रियों को किलोमीटर के हिसाब से निर्धारित किया किराया ही चुकाना होगा। एचपी-01 (नेशनल परमिट) पर यह आदेश लागू नहीं होंगे।
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हाईकोर्ट के आदेशों पर परिवहन विभाग ने उन टैक्सी चालकों के नाम पते खंगालने का काम शुरू कर दिया है जो स्थानीय परमिट पर टैक्सी चला रहे हैं। कुछ ऐसे भी टैक्सी आपरेटर हैं जिनकी गाड़ियां 11 साल बाद प्राइवेट नंबर में तब्दील हो चुकी हैं। अब तक करीब 12 गाड़ियों में मीटर लगे हैं। टैक्सियों में मीटर फिट करने के काम के लिए दो डीलर शिमला आ चुके हैं।
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मीटर लगाने के बाद टैक्सी ऑपरेटरों को परिवहन विभाग के पास स्टेटस अपडेट करवाना होता है शहर में बहुत सारी टैक्सियां ऐसी भी हैं जो विभिन्न संस्थानों से संबद्ध हैं। ऐसे टैक्सी आपरेटर गाड़ियों में मीटर लगाने के लिए तैयार नहीं है। हालांकि परिवहन विभाग ने साफ किया है कि संस्थानों से संबद्ध टैक्सी ऑपरेटरों को भी अपनी गाड़ियां में मीटर लगवाने होंगे क्योंकि वह गाड़ी का व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं। इतना ही नहीं शहर में चलने वाली ओला कैब में भी मीटर लगाने अनिवार्य कर दिए हैं। परिवहन विभाग बिना मीटर पकड़ी गई 41 टैक्सियों के चालान भी अब तक कर चुका है।
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टैक्सियों में मीटर लगाने की प्रक्रिया शुरू : आरटीओ
शहर के 40 किलोमीटर के दायरे में चलने वाली टैक्सियों में मीटर लगवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक 12 गाड़ियों में मीटर लग चुके हैं। इस माह के अंत तक सभी गाड़ियों में मीटर लगा दिए जाएंगे। बिना मीटर पकड़ी जाने वाली गाड़ियों के परमिट कैंसल कर दिए जाएंगे।- भूपेंद्र अत्री क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी शिमला
बिना मीटर नहीं होगी टैक्सियों की पासिंग
परिवहन विभाग ने टैक्सी ऑपरेटरों पर सख्ती बरतने के लिए टैक्सियों की पासिंग के दौरान मीटर लगाने अनिवार्य कर दिए हैं। अगर टैक्सी में मीटर नहीं लगे हैं तो टैक्सी आपरेटर को पासिंग प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा। बिना पासिंग के अगर गाड़ी ऑन रोड मिली तो मोटा जुर्माना लगाया जाएगा।
लोकल की जगह अब एनएच को कर रहे अप्लाई
40 किलोमीटर के दायरे में चलने वाले लोकल परमिट धारक टैक्सी ऑपरेटरों के लिए टैक्सियों में मीटर लगाना अनिवार्य होने के बाद नई टैक्सी खरीदने वाले लोग लोकल की जगह नेशनल परमिट बना रहे हैं। लोकल के मुकाबले नेशनल परमिट का शुल्क महज 1000 रुपये अधिक है। न्यायालय ने नेशनल परमिट धारकों के लिए मीटर अनिवार्य नहीं किया है, इसी का फायदा उठाने के लिए टैक्सी आपरेटर अब नेशनल परमिट के लिए ही आवेदन कर रहे हैं।
यह निर्धारित किया है किराया
पहले एक किमी तक 50 रुपये, इसके बाद 15 रुपये प्रति किलोमीटर चार्जिंग लगेंगे। मीटर टैक्सी में बैठते ही पहले किलोमीटर के लिए यात्री को 50 रुपये अदा करने होंगे। इसके बाद मीटर डाउन होते ही प्रति किलोमीटर 15 रुपये अदा करने होंगे। राष्ट्रीय परमिट पर चलने वाले वाहनों को इसमें छूट होगी।