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आईजीएमसी में डेंगू के सत्रह मामले पॉजिटिव
Updated Tue, 24 Oct 2017 10:58 PM IST
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शिमला। आईजीएमसी में डेंगू के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अस्पताल में रोजाना औसतन एक से दो मरीज पॉजिटिव आ रहे हैं। वहीं गंभीर रूप से बीमार मरीज को अस्पताल में दाखिल किया जा रहा है। अभी तक अस्पताल में ऐसे दो मरीज भर्ती हैं जिनमें महिला और पुरुष शामिल हैं। अब तक अस्पताल में टेस्ट के बाद सत्रह मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है। आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि दो सप्ताह से लगातार मामले अस्पताल में आ रहे हैं। प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी में भी डेंगू रोग से पीड़ित मरीज अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। बॉर्डर एरिया में बिलासपुर, हमीरपुर और चंडीगढ़ तथा दिल्ली गए लोग इसकी चपेट में आने के बाद अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों की मानें तो यह एक वायरस से होने वाली बीमारी है जो एडीज नामक मच्छर की प्रजाति के काटने से होती है। इस मच्छर के काटने पर विषाणु तेजी से मरीज के शरीर में अपना असर दिखाते हैं, जिसके कारण तेज बुखार और सिरदर्द होती है। आम भाषा में इसे हड्डी तोड़ बुखार या ब्रेक बोन बुखार भी कहा जाता है। डेंगू होने पर मरीज के खून में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटती है। जिससे कई बार जान जोखिम में पड़ जाती है। इन दिनों आईजीएमसी की मेडिसन ओपीडी में तेज सिरदर्द संबधित बीमारियों की ओपीडी लगातार बढ़ रही है।
ऐसे फैलता है डेंगू
डेंगू के मामले अधिकतर बरसात में आते हैं। डेंगू फैलाने वाले मच्छर दिन में काटते हैं। इसके अलावा यह मच्छर ठहरे हुए पानी में पनपते हैं। डेंगू कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को आसानी से हो जाता है।
डेंगू की पहचान और लक्षण
डेंगू के लक्षण सामान्यत: तीन से चौदह दिन बाद दिखते हैं। इसमें तेज ठंड और बुखार होता है। वहीं सिर और आंखों में भी दर्द हो जाता है। इसके अलावा शरीर और जोड़ों में दर्द में रहता है। चमड़ी के नीचे लाल धब्बे होना और जी मिचलाना, उल्टी और दस्त होना इसके लक्षण हैं। इस बीमारी के होने पर भूख भी कम होने लगती है। स्थिति गंभीर होने पर आंखों और नाक से भी खून आ जाता है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ चिकित्सक
आईजीएमसी के मेडिसन विभाग के प्रो. राजीव रैना का कहना है कि शिमला में डेंगू फैलने के चांस काफी कम हैं। जो लोग इलाज के लिए अस्पताल आ रहे हैं, उन्हें यह रोग दूसरे राज्यो में हुआ है। दिल्ली, चंडीगढ़ के अलावा बिलासपुर के बॉर्डर क्षेत्रों से इस तरह के मरीज आए हैं, जिनको उपचार दिया जा रहा है।
डेंगू मच्छर चार से पांच हजार फीट की ऊंचाई में नहीं होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। पानी की कमी भी शरीर में नहीं होनी चाहिए।
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ऐसे फैलता है डेंगू
डेंगू के मामले अधिकतर बरसात में आते हैं। डेंगू फैलाने वाले मच्छर दिन में काटते हैं। इसके अलावा यह मच्छर ठहरे हुए पानी में पनपते हैं। डेंगू कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को आसानी से हो जाता है।
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डेंगू की पहचान और लक्षण
डेंगू के लक्षण सामान्यत: तीन से चौदह दिन बाद दिखते हैं। इसमें तेज ठंड और बुखार होता है। वहीं सिर और आंखों में भी दर्द हो जाता है। इसके अलावा शरीर और जोड़ों में दर्द में रहता है। चमड़ी के नीचे लाल धब्बे होना और जी मिचलाना, उल्टी और दस्त होना इसके लक्षण हैं। इस बीमारी के होने पर भूख भी कम होने लगती है। स्थिति गंभीर होने पर आंखों और नाक से भी खून आ जाता है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ चिकित्सक
आईजीएमसी के मेडिसन विभाग के प्रो. राजीव रैना का कहना है कि शिमला में डेंगू फैलने के चांस काफी कम हैं। जो लोग इलाज के लिए अस्पताल आ रहे हैं, उन्हें यह रोग दूसरे राज्यो में हुआ है। दिल्ली, चंडीगढ़ के अलावा बिलासपुर के बॉर्डर क्षेत्रों से इस तरह के मरीज आए हैं, जिनको उपचार दिया जा रहा है।
डेंगू मच्छर चार से पांच हजार फीट की ऊंचाई में नहीं होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। पानी की कमी भी शरीर में नहीं होनी चाहिए।