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आईजीएमसी में चार दिनों से बच्चे का नहीं हुआ ऑपरेशन

Tue, 18 Jun 2019 11:08 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 18 Jun 2019 11:08 PM IST
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आईजीएमसी में चार दिनों से बच्चे का नहीं हुआ ऑपरेशन
बच्चा 20 घंटे रखा भूखा फिर ऑपरेशन भी नहीं किया
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आईजीएमसी के ऑर्थो विभाग का कारनामा, छह साल का बच्चा दिनभर तीमारदारों से मांगता रहा पानी और खाना घर में गिरने से बच्चे की बाजू में हुआ था फ्रेक्चर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में डॉक्टरों का एक और बड़ा कारनामा सामने आया है। अस्पताल में मंगलवार को आर्थो के डॉक्टरों ने छह साल के बच्चे को ऑपरेशन से पहले करीब 20 घंटे तक भूखा रखा। बाद में ऑपरेशन भी नहीं किया। सोमवार रात सात बजे चिकित्सकों ने बच्चे की टूटी बाजू का ऑपरेशन करने की बात कही थी। इसके बाद अभिभावकों ने चिकित्सकों की हिदायत के मुताबिक बच्चे को पानी दिया न ही खाने को कुछ। बच्चे का मंगलवार को ऑपरेशन भी नहीं किया। बच्चा मंगलवार तीन बजे तक भूखा था, तीमारदारों को उम्मीद थी कि डॉक्टर जल्द ही बच्चे का ऑपरेशन कर देंगे। चिकित्सकों का कहना है कि ऑपरेशन के वक्त एनेस्थीसिया दिया जाता है, लिहाजा सर्जरी से छह से आठ घंटे पहले मरीज को खाना देने की मनाही रहती है।
हैरानी इस बात की है कि बच्चा ट्रॉमा वार्ड में दाखिल है। बच्चे को बिस्तर भी नहीं मिला है, महज एक ट्राली पर बच्चे को दाखिल कर रखा है। स्वास्थ्य विभाग के दावों के मुताबिक ट्रॉमा वार्ड में गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार की व्यवस्था रहती है। लेकिन यह बच्चा चार दिन से दाखिल है और उसका अभी तक ऑपरेशन नहीं किया गया। बच्चे के ऊपर ट्रीटिंग डॉक्टरों ने भी कोई दया नहीं दिखाई। बाजू में फ्रेक्चर के बाद उपचार करवाने आया मरीज ट्रामा वार्ड की ट्राली पर इधर से उधर भटक रहा है।
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सिरमौर के हरिपुरधार के रहने वाला रोहित (6) घर में खेलते हुए गिर गया था। बाजू में फ्रेक्चर हुआ तो अभिभावक नाहन अस्पताल ले आए। यहां से डॉक्टरों ने बच्चे को पीजीआई चंडीगढ़ या आईजीएमसी जाने की सलाह दी। पिता वीरेंद्र ने बताया कि शनिवार को वह बच्चे को आईजीएमसी लाए। अस्पताल में चार दिन बीतने के बाद भी न डॉक्टरों ने कुछ नहीं किया, सिर्फ ऑपरेशन की बात कही। बच्चे को दर्द हुआ तो सोमवार रात सात बजे डॉक्टरों ने ऑपरेशन की बात कही, लेकिन मंगलवार तक 20 घंटे से भी अधिक समय के बाद ऑपरेशन नहीं किया। दादा बलीराम ने आरोप लगाया कि बच्चा पानी और खाना मांग रहा है। ऑपरेशन नहीं करना था तो डॉक्टरों ने इतने समय तक बच्चा खाली पेट क्यों रखा? पिता वीरेंद्र ने कहा कि अगर बच्चे को पानी पिला देते हैं तो डॉक्टर गुस्सा हो जाएंगे। पिता वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि पहले चार दिन डॉक्टरों ने बेटे को देखा तक नहीं। बच्चा जिस ट्राली में सोया है उसे बार-बार इधर से उधर करना पड़ रहा है।
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ऑपरेशन से पहले कुछ घंटे
तक रखते हैं मरीज को भूखा
ऑर्थो के विभागाध्यक्ष डॉ. मुकुंद लाल ने कहा कि वह अभी कहीं बाहर हैं। इस मामले की उन्हें जानकारी नहीं है। अस्पताल आने के बाद ही वह कुछ कह पाएंगे। ऑपरेशन से पहले मरीज को छह से आठ घंटे तक कुछ नहीं खाने की हिदायत दी जाती है। लेकिन इस मामले में क्या दिक्कत है इस बारे में वह पता करके ही कुछ कह पाएंगे।

मरीज का बना है आयुष्मान
कार्ड, 4 दिन बाद ऑपरेशन
शिमला। मरीज का आयुष्मान कार्ड भी बना है। सवाल उठ रहा है कि आखिर क्या डॉक्टर आयुष्मान कार्ड होने से मरीज का ऑपरेशन नहीं करना चाहते या फिर कोई दूसरी वजह है? तीमारदारों को ऑपरेशन न होने का कोई कारण चिकित्सक नहीं बता पाए हैं।

मरीज का पैकेज बनने के बाद ऑपरेशन में लगने वाला सामान मुफ्त में ही मरीज को मिलता है। अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारकों को प्राथमिकता न देने की शिकायत पहले भी कई बार आ चुकी हैं। इस बाबत स्वयं विस अध्यक्ष भी आईजीएमसी प्रबंधन को चिट्ठी लिख चुके हैं। इसकी खुद अस्पताल प्रबंधन जांच करवा रहा है।
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