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खराब परिणाम में स्कूल प्रबंधन ने बैठक के दौरान शिक्षा उप-निदेशक के सामने दिया ये तर्क
Tue, 04 Jun 2019 11:12 PM IST
शिमला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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Published by: शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 04 Jun 2019 11:12 PM IST
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स्कूल शिक्षा बोर्ड के दसवीं और बारहवीं कक्षा के खराब परीक्षा परिणाम पर जिले 81 स्कूलों से जवाब मांगा गया है। स्कूल प्रमुखों के साथ बैठक में मंगलवार को उप-निदेशक उच्च शिक्षा राजेश्वरी बत्ता ने यह निर्देश दिए हैं। लक्कड़ बाजार गर्ल्स स्कूल में बैठक में कुल 81 स्कूलों में से 61 स्कूलों के प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापक ही पहुंचे थे।
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बैठक से नदारद रहे बीस स्कूल प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे। इन्हें सोमवार तक जवाब देना होगा। शिक्षा विभाग के आदेशों पर इस बैठक में स्कूल प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापकों को बुलाया गया था, जिनका बोर्ड परीक्षा का परिणाम जीरो से 25 फीसदी तक रहा था।
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करीब तीन घंटे तक उप निदेशक ने बैठक में आए स्कूल मुखियाओं से उनके खराब परीक्षा परिणाम के कारण पूछे और इस पर लिखित में जवाब भी लिए। शिक्षा उपनिदेशक ने कहा कि स्कूल मुख्य अध्यापकों ने शिक्षकों की कमी और परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरा लगने को कम रिजल्ट के लिए जिम्मेदार ठहराया। जिले में वर्तमान में चल रहे चार सौ से अधिक स्कूलों में 81 स्कूल ऐसे थे।
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जिनका बोर्ड की दसवीं और बारहवीं कक्षा का परिणाम खराब रहा। इनमें सिर्फ 0-25 फीसदी तक के परिणाम वाले स्कूलों से ही जवाब मांगा गया है। इसमें उन्हें खराब परिणाम रहने का ठोस कारण बताना होगा। तीन घंटे तक उप निदेशक ने प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापकों से इस मुद्दे पर बातचीत की। जिले में 59 हाई और 30 वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के स्कूलों का परिणाम खराब रहा है, इनमें जमा दो के वो स्कूल भी है, जिनके दोनों कक्षाओं के परिणाम खराब रहे हैं।
आठवीं तक सभी को पास करने का फैसला भी पड़ रहा भारी
मौजूद स्कूल प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापकों ने ने खराब नतीजों के लिए स्कूलों में पहली कक्षा से लेकर आठवीं तक सभी छात्रों को पास करने की लागू नीति करने को जिम्मेवार ठहराया। तर्क दिया गया कि इससे छात्रों में परीक्षा को लेकर डर कम हुआ है,