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स्टेट लाइब्रेरी में छात्र फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर
Thu, 23 May 2019 07:07 AM IST
शिमला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 23 May 2019 07:07 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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राजधानी में स्टेट लाइब्रेरी में पढ़ने आने वाले युवाओं को फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा हैं। लाइब्रेरी का फर्श उखड़ा पड़ा है और कुर्सियां टूट चुकी हैं। राजधानी में हालांकि ई-लाइब्रेरी भी बनकर तैयार हो चुकी है लेकिन वह अभी बंद पड़ी है। 14 फरवरी को मुख्यमंत्री ने विधानसभा स्थित ई-लाइब्रेरी का शुभारंभ किया था।
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हैरत की बात है कि उद्घाटन के दूसरे दिन विभाग ने लाइब्रेरी में ताला जड़ दिया। ऐसे में युवाओं को पढ़ाई करने के लिए स्टेट लाइब्रेरी जाना पड़ रहा है। लेकिन 45 सीटों की इस लाइब्रेरी में करीब तीन गुना अधिक संख्या में छात्र पढ़ाई करने आते हैं। इस वजह से प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयार कर रहे छात्रों को फर्श पर बैठकर पढ़ाई करना पड़ती है।
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सांध्यकालीन कॉलेज परिसर में चल रही स्टेट लाइब्रेरी में अफसर बनने की चाहत में छात्र सुबह साढ़े चार बजे से पहुंचने शुरू हो जाते हैं। यहां पहुंचकर छात्र सबसे पहले अपने बैगों को लाइब्रेरी गेट के सामने दो लाइनों में लगा देते हैं। इस दौरान छात्र परिसर के बाहर ही पढ़ाई करते हैं। आठ बजे लाइब्रेरी खुलते ही छात्र लाइनों में रखे अपने बैगों को उठाते हैं और लाइब्रेरी में प्रवेश करते हैं।
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इस दौरान छात्र पहले आओ और पहले पाओ के आधार पर सीटों पर बैठते हैं। सीटों की संख्या भरने के बाद सैकड़ों छात्र फर्श पर ही बैठ जाते हैं, इस दौरान कुछ छात्रों को सीट न मिलने के कारण मायूस होकर परिसर के बाहर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ता है। यहां पर सुविधा सिफर हैं, छात्रों को बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती। यहीं नही यहां पर छात्र-छात्राओं के लिए एकमात्र शौचालय की व्यवस्था है। इन छात्रों को शौचालय में जाने के लिए लाइनों में खड़े रहकर बारी का इंतजार करना पड़ रहा हैं।
ई-लाइब्रेरी खुलती तो नहीं होती परेशानी
घणाहट्टी के अजय सुबह साढ़े चार बजे लाइब्रेेरी पहुंचे। बताया कि ई-लाइब्रेरी खुलने से उन्हें खुशी थी लेकिन उद्घाटन के अगले दिन ही लाइब्रेरी बंद हो गई। ई-लाइब्रेरी खुलती तो उन्हें परेशानी न होती। इस कारण उन्हें यहां पर पढ़ाई करने आना पड़ रहा है।
करोड़ों रुपये किए गए हैं खर्च
ताराहाल की मंजू ने बताया कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी ई-लाइब्रेरी बंद पड़ी है। सरकार की ओर से युवाओं के लिए बेहतर सुविधा प्रदान करनी चाहिए। ताकि युवाओं को परीक्षा की तैयारियों की लिए महरूम न होना पड़े।
भीड़ होने से पढ़ने में होती है परेशानी
संजौली की मनीषा ने बताया कि ई-लाइब्रेरी बन तो गई है लेकिन शुरू कब होगी कोई पता नहीं। यहां पर भी सीट पाने के लिए सुबह ही पहुंचना पड़ रहा है। लाइब्रेरी में छात्रों के खचाखच होने से पढ़ने में कई बार काफी परेशानी होती है।