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अब चार नहीं दो घंटे में होगा ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन
Updated Tue, 21 Nov 2017 11:02 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। मरीजों के दिमाग में होने वाले ट्यूमर का ऑपरेशन अब और आसान हो गया है। इसके लिए पहले से आधा समय लगेगा। आईजीएमसी के न्यूरोसर्जरी विभाग ने क्यूसा (केवीट्रोन अल्ट्रासोनिक सर्जिकल एस्पिेरटेर) मशीन खरीद ली है। इस मशीन की मदद से मरीज के ब्रेन में होने वाले मिनिजियोमा लार्ज ट्यूमर, ब्रेन स्टेम ट्यूमर और सीपी एंगल जैसे ट्यूमर का ऑपरेशन चार की बजाए दो घंटों में हो जाएगा। जबकि, आमतौर पर मुश्किल ट्यूमर को निकालने के लिए इस्तेमाल होने वाले औजारों से भी यह मशीन काफी कारगार साबित होगी।
प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी में एक सप्ताह पहले ठियोग के हरि सिंह (60) सिर में दर्द और बोलने की शक्ति खत्म होने की शिकायत को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टरों ने उन्हें न्यूरोसर्जरी विभाग में दाखिल किया था। इसके बाद डॉक्टरों ने उसका उपचार किया। उपचार के दौरान पता चला कि मरीज को मिनिजियोमा ट्यूमर है। इसके बाद डॉक्टरों ने मरीज का ऑपरेशन करने का फैसला लिया। सोमवार को मशीन आने के बाद मरीज का पहला सफल ऑपरेशन किया गया है। डॉक्टरों ने बताया कि न्यूरोसर्जरी विभाग में इस तरह की आधुनिक तकनीक से लैस क्यूसा (केवीट्रोन अल्ट्रासोनिक सर्जिकल एस्पिेरटेर) मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। इस मशीन की वाइब्रेशन की मदद से ट्यूमर को हल्का पतला कर टिप से निकाला जाता है। हालांकि, इससे पहले भी इस तरह के ऑपरेशन किए जाते रहे हैं लेकिन इस मशीन से यह पहला ऑपरेशन है। वहीं, मरीज के सफल ऑपरेशन के बाद उसे आईसीयू में दाखिल किया गया था। मंगलवार को पेशेंट की हालत में काफी सुधार है। यह ऑपरेशन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आरसी ठाकुर और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुकेश शर्मा ने किया है। जबकि एनेस्थीसिया टीम में डॉ. राजेश और ओटीए शांडिल मौजूद रहे।
45 लाख रुपये से खरीदी मशीन
अस्पताल में क्यूसा मशीन को 45 लाख रुपये से खरीदा गया है। इस मशीन की खासियत यह है कि यह अल्ट्रासोनिक मोड पर वाइब्रेशन पैदा करती है, जिससे एक सेकंड के भीतर पंद्रह से बीस हजार वाइब्रेशन पैदा होते हैं। इसके कारण ब्रेन में सख्त ट्यूमर को पतला करके टिप से आसानी से निकाला जा सकता है। वहीं, आम औजारों के मुकाबलों में यह बेहतर उपयोगी सिद्ध हुआ है। इसके अलावा ब्रेन की नसों को होने वाले नुकसान की आशंका भी नहीं होती है।
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नाजुक ट्यूमर निकालने में लाभदायक होगी मशीन
डॉक्टरों का कहना है कि सीपी एंगल ट्यूमर काफी नाजुक ट्यूमर होता है। अगर ब्रेन की गहराइयों में यह ट्यूमर होता है तो आम औजारों से इसे निकालना मुश्किल होता है। वहीं, जो अंदर की तरफ ट्यूमर होते हैं, उसे आम औजारों के इस्तेमाल से नसों के लिए खतरा होता है। लेकिन अब इस मशीन के आने के बाद काफी लाभ मरीजों को मिलेगा।
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शिमला। मरीजों के दिमाग में होने वाले ट्यूमर का ऑपरेशन अब और आसान हो गया है। इसके लिए पहले से आधा समय लगेगा। आईजीएमसी के न्यूरोसर्जरी विभाग ने क्यूसा (केवीट्रोन अल्ट्रासोनिक सर्जिकल एस्पिेरटेर) मशीन खरीद ली है। इस मशीन की मदद से मरीज के ब्रेन में होने वाले मिनिजियोमा लार्ज ट्यूमर, ब्रेन स्टेम ट्यूमर और सीपी एंगल जैसे ट्यूमर का ऑपरेशन चार की बजाए दो घंटों में हो जाएगा। जबकि, आमतौर पर मुश्किल ट्यूमर को निकालने के लिए इस्तेमाल होने वाले औजारों से भी यह मशीन काफी कारगार साबित होगी।
प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी में एक सप्ताह पहले ठियोग के हरि सिंह (60) सिर में दर्द और बोलने की शक्ति खत्म होने की शिकायत को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टरों ने उन्हें न्यूरोसर्जरी विभाग में दाखिल किया था। इसके बाद डॉक्टरों ने उसका उपचार किया। उपचार के दौरान पता चला कि मरीज को मिनिजियोमा ट्यूमर है। इसके बाद डॉक्टरों ने मरीज का ऑपरेशन करने का फैसला लिया। सोमवार को मशीन आने के बाद मरीज का पहला सफल ऑपरेशन किया गया है। डॉक्टरों ने बताया कि न्यूरोसर्जरी विभाग में इस तरह की आधुनिक तकनीक से लैस क्यूसा (केवीट्रोन अल्ट्रासोनिक सर्जिकल एस्पिेरटेर) मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। इस मशीन की वाइब्रेशन की मदद से ट्यूमर को हल्का पतला कर टिप से निकाला जाता है। हालांकि, इससे पहले भी इस तरह के ऑपरेशन किए जाते रहे हैं लेकिन इस मशीन से यह पहला ऑपरेशन है। वहीं, मरीज के सफल ऑपरेशन के बाद उसे आईसीयू में दाखिल किया गया था। मंगलवार को पेशेंट की हालत में काफी सुधार है। यह ऑपरेशन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आरसी ठाकुर और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुकेश शर्मा ने किया है। जबकि एनेस्थीसिया टीम में डॉ. राजेश और ओटीए शांडिल मौजूद रहे।
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45 लाख रुपये से खरीदी मशीन
अस्पताल में क्यूसा मशीन को 45 लाख रुपये से खरीदा गया है। इस मशीन की खासियत यह है कि यह अल्ट्रासोनिक मोड पर वाइब्रेशन पैदा करती है, जिससे एक सेकंड के भीतर पंद्रह से बीस हजार वाइब्रेशन पैदा होते हैं। इसके कारण ब्रेन में सख्त ट्यूमर को पतला करके टिप से आसानी से निकाला जा सकता है। वहीं, आम औजारों के मुकाबलों में यह बेहतर उपयोगी सिद्ध हुआ है। इसके अलावा ब्रेन की नसों को होने वाले नुकसान की आशंका भी नहीं होती है।
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नाजुक ट्यूमर निकालने में लाभदायक होगी मशीन
डॉक्टरों का कहना है कि सीपी एंगल ट्यूमर काफी नाजुक ट्यूमर होता है। अगर ब्रेन की गहराइयों में यह ट्यूमर होता है तो आम औजारों से इसे निकालना मुश्किल होता है। वहीं, जो अंदर की तरफ ट्यूमर होते हैं, उसे आम औजारों के इस्तेमाल से नसों के लिए खतरा होता है। लेकिन अब इस मशीन के आने के बाद काफी लाभ मरीजों को मिलेगा।