150 संस्थाओं पर मोदी सरकार ने कसा शिकंजा
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हिमाचल में विदेशी फंड से पोषित लगभग 150 संस्थाओं पर भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने शिकंजा कस दिया है। अब शर्त लगाई है कि ये संस्थाएं 20 हजार रुपये से ऊपर का कोई भी भुगतान कैश से नहीं कर सकेंगी।
इन्हें चेक या डिमांड ड्राफ्ट का इस्तेमाल करना होगा। हिमाचल की 47 तिब्बती, मिशनरी संस्थाओं और एनजीओ को तो तीन साल का वार्षिक रिटर्न नहीं देने पर गृह मंत्रालय से पहले ही नोटिस जारी हो चुके हैं।
अब इनके खर्च पर भी नई शर्त लगा दी है। गृह मंत्रालय के विदेशी डिविजन के एफसीआरए विंग के संयुक्त सचिव जीके द्विवेदी ने 21 अक्तूबर को विदेशी फंडिंग वाले हिमाचल के सभी एनजीओ को एक सर्कुलर (संख्या-एफ नंबर 11/21022/58(136)2014-एफसीआरए एमयू) जारी किया है।
चैक या ड्राफ्ट से होगा भुगतान
हिमाचल में फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट के तहत लगभग डेढ़ सौ संस्थाएं पंजीकृत हैं। ये विदेशी फंडिंग पाने के लिए अधिकृत हैं। जीके द्विवेदी ने सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि रिकार्ड और लेखों की पड़ताल के बाद यह पाया कि कुछ संस्थाएं बड़ी मात्रा में विदेशी सहयोग ले रही हैं।
ये बैंकों या अन्य खातों से बड़ी मात्रा में कैश निकाल रहे हैं। विदेशी फंडिंग वाली संस्थाओं की खर्च की सीमा तय करने का मामला वर्तमान में गृह मंत्रालय के पास विचाराधीन है। इसी बीच यह निर्णय लिया गया है कि फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट के तहत दर्ज संस्थाओं का 20 हजार रुपये से ऊपर का व्यय या अन्य भुगतान केवल चेक या डिमांड ड्राफ्ट से होगा।
ऐसी संस्थाओं पर गृह मंत्रालय अब पैनी नजर रखेगा, जो इस नियम की अनुपालना नहीं करेंगे। मुख्य सचिव पी. मित्रा ने कहा कि भारत सरकार का सर्कुलर देखने के बाद ही कुछ कह पाऊंगा।