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मनमानी फीस वसूलने पर सेंट एडवर्ड स्कूल के बाहर प्रदर्शन

Thu, 04 Apr 2019 10:32 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 04 Apr 2019 10:32 AM IST
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छात्र अभिभावक मंच एडवर्ड प्रदर्शन
सेंट एडवर्ड स्कूल के बाहर प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ संघर्षरत छात्र-अभिभावक मंच ने सेंट एडवर्ड स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया। मंच ने राजधानी शिमला में लगातार डेढ़ माह से निजी स्कूलों की फीस, वर्दी और किताबों के नाम पर की जा रही मनमानी के खिलाफ मोरचा खोल रखा है। बुधवार को सेंट एडवर्ड स्कूल के बाहर हुए प्रदर्शन में सौ से अधिक अभिभावकों और मंच के पदाधिकारियों ने शिरकत की तथा स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

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मंच ने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने का आग्रह किया। डेढ़ घंटे से अधिक समय तक चले इस आंदोलन के दौरान सभा को मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा, हिमी देवी और अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। उन्होंने सरकार और विभाग से मांग की कि फीस को लेकर 27 अप्रैल 2016 को न्यायालय द्वारा दिए आदेशों को सख्ती से लागू किया जाए। इन आदेशों में कोर्ट ने छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के मद्देनजर परिवहन सुविधा और स्कूल में पार्किंग सुविधा मुहैया करवाने को कहा था।
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मेहरा ने कहा कि आठ अप्रैल को निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने सहित 17 सूत्रीय मांगपत्र को लेकर निर्णायक धरना-प्रदर्शन होगा। इसमें सैकड़ों की तादाद में शहर के विभिन्न सरकारी स्कूलों में बच्चे पढ़ा रहे अभिभावक शिरकत करेंगे। कहा कि यह आंदोलन ही स्कूलों के खिलाफ छेड़े गए संघर्ष की दिशा तय करेगा। यह भीड़ सरकार को निजी स्कूलों पर नकेल कसने के लिए ठोस कानून बनाने और पूर्व में बने कानूनों को सख्ती से लागू करने के लिए मजबूर करेगा।
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आरटीई कानून की अनदेखी कर रहा एडवर्ड स्कूल
मेहरा ने कहा कि सेंट एडवर्ड स्कूल फीस, वर्दी, किताबों, पिकनिक, टूर और वार्षिक समारोह के नाम पर अभिभावकों से हजारों रुपये वसूलता है। स्कूल सरेआम न्यायालय के आदेशों की अनदेखी कर रहा है। उच्च न्यायालय ने स्कूल को लेकर फैसला सुनाकर स्कूल प्रशासन को लताड़ भी लगाई है। स्कूल हर साल हजारों रुपये की फीस बढ़ोतरी कर रहा है। शिक्षा का अधिकार कानून 2009 और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की वर्ष 2014 की गाइडलाइन का खुला उल्लंघन हो रहा है। आरोप लगाया कि यह स्कूल प्रवेश के लिए बच्चों के साथ अभिभावकों का इंटरव्यू लेकर नियमों की धज्जियां उड़ाता है।

सभी संस्थानों पर लागू है आरटीई
वक्ताओं ने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने वर्ष 2014 में अपनी अधिसूचना में साफ किया है कि शिक्षा का अधिकार कानून प्राइवेट स्कूलों और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत स्थापित अल्पसंख्यक संस्थानों पर भी लागू है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की केपिटेशन फीस, सिक्योरिटी और सेफ्टी आदि को मानिटर करने के लिए शिक्षा का अधिकार कानून में प्रावधान किया है।


स्कूलों से है सरकारों की सांठगांठ : मेहरा
मंच संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि 15 अप्रैल 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने निजी शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सेफ्टी और सिक्योरिटी को सुनिश्चित करने के लिए निजी शैक्षणिक संस्थानों के प्रबंधनों को जवाबदेह बनाने के लिए निर्देश दिए थे। इसके तहत माननीय सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और प्रदेश सरकारों को निर्देश दिए थे कि छह माह के भीतर इन संस्थानों को मानिटर करने के लिए नियम बनाकर लागू करें। इसके साथ ही 27 अप्रैल 2016 को हिमाचल उच्च न्यायालय ने फीसों को संचालित करने, दाखिला फीस और बिल्डिंग फंड पर रोक लगाने के संदर्भ में आदेश दिए थे। इस सबके बावजूद प्रदेश सरकार ने इस दिशा में कोई कार्य नहीं किया। इससे साफ है कि प्रदेश सरकार की निजी स्कूल प्रबंधनों से सांठगांठ है।

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