किसी के लिए मां जैसी थीं सुषमा, कोई बोला- कैसे चुकाएंगे कर्ज
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भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज के निधन से मंडीवासी आहत हैं। चार साल बाद इराक के मौसूल में समुद्री लुटेरों के हाथों सुंदरनगर के बायला निवासी के मारे जाने की खबर हो या सऊदी अरब के रियाल में एजेंट के हाथों ठगे जाने के बाद जेल पहुंचे 14 स्थानीय युवकों की रिहाई।
अपनों की खबर अपनों तक और वतन वापसी की राह सुषमा स्वराज के कारण ही संभव हो पाई। 14 जून 2014 को आईएस के हाथों अगवा होने के बाद चार साल तक परिवार हेमराज की खबर पाने को चिंतित रहा। जिनके बारे में सुषमा स्वराज ने ही जानकारी एकत्रित की।
मार्च 2018 में संसद में दिए बयान में सुषमा स्वराज ने सभी अपहृत भारतीयों के मारे जाने की पुष्टि की।इससे देश में शोक की लहर थी। लेकिन परिवार को इस बात का संतोष था कि कम से कम उनके पार्थिव अवशेष तो संस्कार के लिए घर पहुंच पाए।
वहीं, गत वर्ष सऊदी अरब के रियाद में जुलाई माह में एजेंट के हाथों ठगे जाने के बाद वहां जेल भेजे गए क्षेत्र के 14 युवाओं को विदेश से सुरक्षित घर तक पहुंचाने में भी सुषमा स्वराज का विशेष योगदान रहा। परिजन उन पलों को याद कर आज फिर भावुक हो गए।
एक मां की तरह विदेश में रखा था ख्याल
सऊदी अरब के रियाद से 14 अन्य स्थानीय युवकों के साथ जेल में बंद रहे हरजिंद्र सिंह, रवि कुमार, विक्रम व मनोज कुमार को वो पल आज भी नहीं भूलते।
उन्होंने बताया कि जब प्रदेश सरकार के माध्यम से उनके रियाद में कैद होने का मामला सुषमा स्वराज तक पहुंचा तो उनकी घर वापसी की उम्मीद पक्की हो गई थी।
उन्होंने कहा कि सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्री रहते एक मां की तरह दर्द समझा और घर वापसी संभव कराई। उन्हाेंने कहा कि सुषमा स्वराज के इस कर्ज को वे कभी नहीं चुका पाएंगे।