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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   12.99 lakh rupees in compensation for apple and pear trees cut down for the road.

Shimla News: सड़क के लिए काटे सेब और नाशपती के पेड़ों का देना होगा 12.99 लाख मुआवजा

Wed, 01 Jul 2026 11:59 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: शिमला ब्यूरो Updated Wed, 01 Jul 2026 11:59 PM IST
सार

शिमला की अतिरिक्त जिला न्यायाधीश-एक प्रवीण गर्ग की अदालत ने सड़क चौड़ीकरण के दौरान उखाड़े गए सेब और नाशपाती के पेड़ों के मामले में बागवानों के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने लोक निर्माण विभाग को 12,99,205 रुपये मुआवजा, 30 प्रतिशत सोलेशियम, 12 प्रतिशत अतिरिक्त वार्षिक मुआवजा तथा 11 जनवरी 2012 से भुगतान तक 9 से 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के निर्देश दिए हैं।

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12.99 lakh rupees in compensation for apple and pear trees cut down for the road.
कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सड़क चौड़ीकरण की भेंट चढ़े फलदार पेड़ों के मुआवजे को लेकर चल रहे एक लंबे कानूनी संघर्ष में बागवानों की बड़ी जीत हुई है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश-एक शिमला प्रवीण गर्ग की अदालत ने फैसला सुनाते हुए लोक निर्माण विभाग को आदेश दिया है कि अधिग्रहित भूमि से उखाड़े सेब और नाशपाती के पेड़ों का बाजार मूल्य के अनुरूप 12,99,205 रुपये मुआवजा बागवानों को प्रदान करें।
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कोर्ट ने मुआवजा राशि को संशोधित करते हुए 14 पेड़ों के लिए 11,24,605 रुपये की राशि तय की है। 4 पेड़ों के लिए 1,74,600 रुपये का भुगतान होगा। इसके अलावा याचिकाकर्ता को धारा 23 (2) के तहत 30 फीसदी सोलेशियम और धारा 23 (1-ए) के तहत 12 फीसदी वार्षिक अतिरिक्त मुआवजा दिया जाएगा। अदालत ने 11 जनवरी 2012 से मुआवजे की अदायगी तक 9 फीसदी से 15 फीसदी तक वार्षिक ब्याज देने के आदेश दिए हैं। जुब्बल तहसील के मौजा धार निवासी सत्या देवी ने अपनी भूमि अधिग्रहण के बदले उचित मुआवजे के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि ठियोग-हाटकोटी सड़क के निर्माण के दौरान उनकी जमीन से सेब के 19 और नाशपाती के तीन पेड़ उखाड़ दिए थे। इनका सही मूल्यांकन नहीं किया था।
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विभाग ने किया था दावा, जमीन पर नहीं थे पेड़ विभाग ने अदालत में दावा किया कि इस भूमि पर कोई भी फलदार पेड़ मौजूद ही नहीं थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने स्वयं सरकारी रिकॉर्ड का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान अदालत को विभाग के ही अधिग्रहण रिकॉर्ड में वे दस्तावेज मिले जिनसे साबित हुआ कि अधिग्रहण के समय वहां 14 सेब के पेड़, 4 नाशपाती के पेड़ मौजूद थे। अदालत ने विभाग के उस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें पेड़ों के होने से इन्कार किया था। अदालत ने इस मामले में बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज की रिपोर्ट को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। डॉ. भारद्वाज ने हरबंस सिंह फॉर्मूला का उपयोग कर पेड़ों का मूल्यांकन किया था जिसे अदालत ने वैज्ञानिक और निष्पक्ष माना। इस आधार पर कोर्ट ने मुआवजा राशि को संशोधित करते हुए यह आदेश दिए हैं।
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