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प्रदेश में जल संरक्षण के लिए गठित की जाएगी टास्क फोर्स
Tue, 30 Apr 2019 10:15 AM IST
शिमला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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Published by: शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Apr 2019 10:15 AM IST
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प्रदेश में पेयजल संकट से निपटने और पानी के संरक्षण को लेकर अंतर विभागीय टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। सोमवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी की अध्यक्षता में हुई बैठक में फोर्स के गठन को लेकर चर्चा की गई। बैठक में पद्मश्री एवं जल पुरुष के नाम से चर्चित राजेंद्र सिंह के दो दिवसीय सर्वेक्षण के बाद दिए सुझावों पर चर्चा की गई। बाल्दी ने कहा कि सरकार पानी के संरक्षण और राज्य में पानी की कमी को दूर करने के लिए उनके द्वारा सुझाई कार्ययोजना का पालन करके प्रभावी कदम उठाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक स्तर पर यह कार्य अश्वनी खड्ड, गुम्मा और नोटी खड्ड के तीन जलग्रहण क्षेत्रों में शुरू किया जाएगा। इसके बाद गिरि क्षेत्र को भी इसमें शामिल किया जाएगा। कहा कि राजेंद्र सिंह द्वारा चेक डैम के रूप में विभिन्न छोटे पुलों पर चेक डैम बनाने के सुझावों को भी प्रदेश में लागू करेंगे। प्रदेश की टापोग्राफिकल आवश्यकताओं को जानने के लिए विस्तृत तौर पर सर्वेक्षण किया जाएगा। बाद में नियम और शर्तों को निर्धारित करने के बाद इस प्रक्रिया को राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी कार्यान्वित किया जाएगा।
कृषि, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण विकास और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को भी इस कार्य में शामिल किया जाएगा। राजेंद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल अपार जल स्त्रोतों से समृद्ध है। भविष्य में संभावित जल संकट के खतरों से बचने के लिए इसका सही उपयोग और संरक्षण करने की आवश्यकता है। बैठक में प्रमुख सचिव कृषि ओंकार चंद शर्मा, निदेशक ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राकेश कंवर, भोपाल के जल विशेषज्ञ सुधींद्र मोहन शर्मा, राजस्थान के गोपाल सिंह और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि प्रारंभिक स्तर पर यह कार्य अश्वनी खड्ड, गुम्मा और नोटी खड्ड के तीन जलग्रहण क्षेत्रों में शुरू किया जाएगा। इसके बाद गिरि क्षेत्र को भी इसमें शामिल किया जाएगा। कहा कि राजेंद्र सिंह द्वारा चेक डैम के रूप में विभिन्न छोटे पुलों पर चेक डैम बनाने के सुझावों को भी प्रदेश में लागू करेंगे। प्रदेश की टापोग्राफिकल आवश्यकताओं को जानने के लिए विस्तृत तौर पर सर्वेक्षण किया जाएगा। बाद में नियम और शर्तों को निर्धारित करने के बाद इस प्रक्रिया को राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी कार्यान्वित किया जाएगा।
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कृषि, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण विकास और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को भी इस कार्य में शामिल किया जाएगा। राजेंद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल अपार जल स्त्रोतों से समृद्ध है। भविष्य में संभावित जल संकट के खतरों से बचने के लिए इसका सही उपयोग और संरक्षण करने की आवश्यकता है। बैठक में प्रमुख सचिव कृषि ओंकार चंद शर्मा, निदेशक ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राकेश कंवर, भोपाल के जल विशेषज्ञ सुधींद्र मोहन शर्मा, राजस्थान के गोपाल सिंह और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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