हिमाचल में चार बच्चों समेत एक दर्जन और लोगों को स्वाइन फ्लू
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सूबे में स्वाइन फ्लू तेजी से फैल रहा है। वीरवार को एक दर्जन और लोगों में इस बीमारी की पुष्टि हुई है। प्रदेश भर में अब तक 75 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है जबकि 10 की जान जा चुकी है। उधर, सरकार ने ब्लॉक स्तर पर कमेटियां गठित कर दी हैं।
ये कमेटियां घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगी। स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी के साथ लोगों को जागरूक करने के लिए पैंफलेट भी जारी कर दिए हैं। इनमें बीमारी के लक्षण, सावधानियां और बचने के उपाय बताए गए हैं।
स्वाइन फ्लू से ग्रसित मरीजों से एक मीटर दूर रहने, भीड़भाड़ वाले इलाकों में न जाने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने बताया कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को गांवों में जाकर स्वाइन फ्लू की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। मरीजों का उपचार चल रहा है।
बिलासपुर में चार बच्चे स्वाइन फ्लू की चपेट में
चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए भी विशेष वैक्सीन दी जा रही है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले बिलासपुर में जनवरी माह के तीसरे सप्ताह शहर का एक नौनिहाल स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया था। जिसके चलते चिकित्सकों ने उसे शिमला रेफर कर दिया, जहां पर उसकी मृत्यु हो गई थी।
नौनिहाल की मृत्यु होने के बाद एकाएक यह वायरस बिलासपुर जिला के नौनिहालों में भी पाया जाने लगा है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभी तक यह वायरस जिला में सिर्फ 2 से 15 साल के बीच की उम्र के बच्चे में पाया जा रहा है।
जिसके चलते उन्होंने जिला के सभी स्कूलों सहित लोगों से आहवान किया है कि अपने बच्चों का पूरा ध्यान रखा जाए। अगर हल्का सा भी किसी बच्चे को बुखार हो रहा है तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।
संबंधित परिवार को दी गई दवा
जिला के चार बच्चों का इलाज घर में ही किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने इन बच्चों के घरों में ही आईसोलेशन वार्ड तैयार कर दिया है। जहां पर उनको उपचार दिया जा रहा है।
विभाग ने वीरवार को इन बच्चों के परिवार वालों को टैमीफ्लू दवा देना भी शुरू कर दिया है। विभाग ने परिवार वालों को आदेश जारी किए हैं कि अगर कोई भी बाहरी व्यक्ति घर में आता है तो उसको भी इस दवा का सेवन जरूर करवाएं।
चार बच्चों में स्वाइन फ्लू पॉजिटिव पाया गया है। इन बच्चों का इलाज घर में ही किया जा रहा है। इन बच्चों में स्वाइन फ्लू का वायरस एक ग्रेड का है जो एक मामूली स्वाइन फ्लू का वायरस है।-परविंद्र सिंह, एमओएच बिलासपुर।
सूअर से आता है यह वायरस
यह वायरस सूअर से आता है। कई बार व्यक्ति सोचता है कि वह सूअर के नजदीक नहीं गया लेकिन यह वायरस फैल चुका होता है। पीड़ित मरीज 3 दिन तक दवाइयां खाता है और परिवार के सदस्य मरीज के आसपास रहते हैं। ऐसी स्थिति में यह वायरस दूसरे व्यक्ति के शरीर में भी प्रवेश कर चुका होता है।
डॉक्टर से सलाह लेने के बाद लें दवाइयां
डाक्टरों का मानना है कि बुखार आने की स्थिति में लोग पैरासिटामोल व एंटीवायोटिक दवा न लें। अस्पताल में डॉक्टरों से जांच करने के बाद ही पर्ची में लिखी गई दवाइयों का सेवन करें।