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फूलों से सजी ट्रेन में सफर कर रोमांचित हुए बच्चे
Updated Thu, 11 Jan 2018 10:49 PM IST
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विश्वास भारद्वाज
शिमला। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर शामियाना लगा है। स्टेज के ठीक सामने लगी कुर्सियां खाली हैं, लेकिन सबसे पीछे की कुर्सियों पर दो युवतियों के साथ कुछ बच्चे बैठे हैं। बच्चे ट्रेन में सफर को लेकर खासे उत्साहित हैं। यह दस बच्चे शिमला के साथ लगते फायल गांव से वीरवार को ज्वॉय राइड का आनंद उठाने के लिए शिमला रेलवे स्टेशन पहुंचे। अधिकतर बच्चों ने न तो अब तक ट्रेन देखी थी और न ही सफर किया था। 7 साल की प्रियंका रेलवे स्टेशन पहुंच कर बेहद उत्साहित दिखीं।
रेलवे स्टेशन पर फूलों से सजी ट्रेन देखकर प्रियंका तालियां बजाने लगी। शिवालिक डीलक्स एक्सप्रेस के लग्जरी कोच में बैठ कर बच्चे खासे रोमांचित दिख रहे थे। इन बच्चों को शिमला से शोघी के बीच शुरू हुई ज्वाय राइड पर फायल की रहने वाली दो बहनें मनीषा सागर और निधि सागर ले कर आईं थीं। उद्घाटन अवसर पर ट्रेन में सफर का बच्चों के लिए बेहद अनोखा अनुभव था। ज्योति और सोनिया ने बताया कि स्कूल से छुट्टियां हैं, दीदी ने कहा-ट्रेन में घूमने चलते हैं तो हम आ गए। फायल के रहने वाले केशव, अंजली, संजू, प्रियंका, सुनील, मनोज, दीपक, ज्योति, पूनम और सोनिया ने ज्वॉय राइड का आनंद लिया।
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यादगार रहेगी बच्चों के साथ यह ज्वॉय राइड
बच्चों को ज्वॉय राइड पर ले गईं मनीषा सागर और निधि सागर ने बताया कि यह ज्वॉय राइड उन्हें जीवन भर याद रहेगी। बुधवार को ज्वॉय राइड शुरू होने की सूचना मिली थी। इसके बाद रात को डिनर टेबल पर पापा से बात शेयर की। पापा ने कहा कि ज्वॉय राइड को यादगार बनाना है तो अपने साथ पड़ोस में रहने वाले बच्चों को भी साथ ले जाओ। बाल कल्याण समिति की सदस्य रह चुकीं युवतियों की मां ने भी बच्चों को साथ ले जाने का सुझाव दिया। वीरवार सुबह बच्चों को लेकर शिमला रेलवे स्टेशन पहुंच गए। इस ज्वॉय राइड के लिए रेलवे ने इन्हें टिकट पर दस फीसदी डिस्काउंट भी दिया और कुल 2880 रुपये किराया लगा।
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कारपोरेट कंपनियों में देश के बाहर सेवाएं दे चुकी हैं बहनें
सागर बहनें देश और देश के बाहर कारपोरेट कंपनियों में सेवाएं दे चुकी हैं। मौजूदा समय में मानव विकास और समाज सेवा के क्षेत्र में काम कर रही हैं। इनका कहना है कि बच्चों को ज्वॉय राइड करवा कर उन्होंने कोई अहसान नहीं किया, बल्कि बच्चों ने उन्हें एक यादगार सफर का मौका दिया। सागर बहनों के पिता सतीश सागर एक सरकारी विभाग से बतौर अधिकारी सेवानिवृत हुए हैं जबकि मां मंजू सागर बाल कल्याण समिति की सदस्य रही हैं।
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शिमला। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर शामियाना लगा है। स्टेज के ठीक सामने लगी कुर्सियां खाली हैं, लेकिन सबसे पीछे की कुर्सियों पर दो युवतियों के साथ कुछ बच्चे बैठे हैं। बच्चे ट्रेन में सफर को लेकर खासे उत्साहित हैं। यह दस बच्चे शिमला के साथ लगते फायल गांव से वीरवार को ज्वॉय राइड का आनंद उठाने के लिए शिमला रेलवे स्टेशन पहुंचे। अधिकतर बच्चों ने न तो अब तक ट्रेन देखी थी और न ही सफर किया था। 7 साल की प्रियंका रेलवे स्टेशन पहुंच कर बेहद उत्साहित दिखीं।
रेलवे स्टेशन पर फूलों से सजी ट्रेन देखकर प्रियंका तालियां बजाने लगी। शिवालिक डीलक्स एक्सप्रेस के लग्जरी कोच में बैठ कर बच्चे खासे रोमांचित दिख रहे थे। इन बच्चों को शिमला से शोघी के बीच शुरू हुई ज्वाय राइड पर फायल की रहने वाली दो बहनें मनीषा सागर और निधि सागर ले कर आईं थीं। उद्घाटन अवसर पर ट्रेन में सफर का बच्चों के लिए बेहद अनोखा अनुभव था। ज्योति और सोनिया ने बताया कि स्कूल से छुट्टियां हैं, दीदी ने कहा-ट्रेन में घूमने चलते हैं तो हम आ गए। फायल के रहने वाले केशव, अंजली, संजू, प्रियंका, सुनील, मनोज, दीपक, ज्योति, पूनम और सोनिया ने ज्वॉय राइड का आनंद लिया।
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यादगार रहेगी बच्चों के साथ यह ज्वॉय राइड
बच्चों को ज्वॉय राइड पर ले गईं मनीषा सागर और निधि सागर ने बताया कि यह ज्वॉय राइड उन्हें जीवन भर याद रहेगी। बुधवार को ज्वॉय राइड शुरू होने की सूचना मिली थी। इसके बाद रात को डिनर टेबल पर पापा से बात शेयर की। पापा ने कहा कि ज्वॉय राइड को यादगार बनाना है तो अपने साथ पड़ोस में रहने वाले बच्चों को भी साथ ले जाओ। बाल कल्याण समिति की सदस्य रह चुकीं युवतियों की मां ने भी बच्चों को साथ ले जाने का सुझाव दिया। वीरवार सुबह बच्चों को लेकर शिमला रेलवे स्टेशन पहुंच गए। इस ज्वॉय राइड के लिए रेलवे ने इन्हें टिकट पर दस फीसदी डिस्काउंट भी दिया और कुल 2880 रुपये किराया लगा।
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कारपोरेट कंपनियों में देश के बाहर सेवाएं दे चुकी हैं बहनें
सागर बहनें देश और देश के बाहर कारपोरेट कंपनियों में सेवाएं दे चुकी हैं। मौजूदा समय में मानव विकास और समाज सेवा के क्षेत्र में काम कर रही हैं। इनका कहना है कि बच्चों को ज्वॉय राइड करवा कर उन्होंने कोई अहसान नहीं किया, बल्कि बच्चों ने उन्हें एक यादगार सफर का मौका दिया। सागर बहनों के पिता सतीश सागर एक सरकारी विभाग से बतौर अधिकारी सेवानिवृत हुए हैं जबकि मां मंजू सागर बाल कल्याण समिति की सदस्य रही हैं।