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शहर में बढ़ा बंदरों का आतंक, लोग परेशान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 11 Aug 2018 11:01 AM IST
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शहर के कई इलाकों में बंदरों का आतंक बढ़ गया है। कुछ हफ्तों से अचानक बंदरों की संख्या बढ़ने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ यहां आने वाले सैलानियों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। शहर के जाखू, लक्कड़ बाजार, डीसी ऑफिस, विकासनगर, टूटीकंडी, टुटू और बालूगंज आदि इलाकों में बंदरों का आतंक बढ़ गया है। आए दिन इन इलाकों से बंदरों के काटने के भी मामले सामने आ रहे हैं।
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लोगों का कहना है कि दूसरे इलाकों से पकड़े गए बंदर इन इलाकों में छोड़े जा रहे हैं। कई बंदर हिंसक भी हो रहे हैं जिनसे स्कूली बच्चों को अकेले स्कूल भेजना तक मुश्किल हो रहा है। नगर निगम शिकायत के बावजूद इन्हें पकड़ने को पिंजरे नहीं लगा रहा। निगम प्रशासन का कहना है कि पिंजरे वन विभाग लगाता है। उधर, वन विभाग का कहना है बंदरों की संख्या बढ़ रही है, ऐसा कुछ नहीं है।
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हो सकता है दूसरे इलाके के बंदर इन इलाकों में आ रहे हों। वन विभाग सिर्फ बंदर पकड़कर उनकी नसबंदी कर रहा है। शहर के बाहरी वार्डों टुटू, समरहिल, कच्चीघाटी, ढली, पंथाघाटी, टूटीकंडी जैसे इलाकों में बंदरों की संख्या बढ़ी है।
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लोगों का कहना है कि वन विभाग शहर से पकड़े बंदर इन इलाकों में छोड़ रहा है। कनलोग समेत कई इलाकों में लंगूरों का आतंक बढ़ गया है। महापौर कुसुम सदरेट ने कहा कि जिन इलाकों में बंदराें की संख्या बढ़ रही है, वहां पिंजरे भी लगाए जा रहे हैं। लोग अपने पार्षद से शिकायत कर निगम को इसकी सूचना दे सकते हैं।
बंदर पकड़ने की मुहिम भी नहीं दे रही राहत
एक हफ्ते में 22 बंदर पकड़े गए हैं जिन्हें नसबंदी के बाद वापस उसी जगह छोड़ा जा रहा है जहां से यह पकड़े गए थे। ऐसे में शहरवासियों की समस्या जस की तस है। डीएफओ शहरी इंद्र कुमार ने बताया कि विभाग फिलहाल बंदर पकड़कर नसबंदी करवाता है। इन्हें वापस उसी स्थान पर छोड़ना जरूरी है जहां से इन्हें पकड़ा जाता है।