{"_id":"595d303d4f1c1bd57b8b45bb","slug":"111499279421-shimla-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्री नयनादेवी में कॉलेज को हस्तांतरित करें सरकारी भूमि : हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्री नयनादेवी में कॉलेज को हस्तांतरित करें सरकारी भूमि : हाईकोर्ट
Updated Thu, 06 Jul 2017 12:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश उच्च न्यायालय ने श्री नयना देवी के श्री नयनादेवी सनातन धर्म एजूकेशन ट्रस्ट के निर्मित भवन और अन्य भूमि को शिक्षा विभाग के लिए हस्तांतरित करने के मामले की बुधवार को सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जिलाधीश बिलासपुर से आशा जताई कि वह जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकारी भूमि को मंदिर के नजदीक ट्रस्ट की भूमि के बराबर मंदिर के लिए हस्तांतरित करने बारे में निर्णय लें। इस बारे में इंतजाम करने के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा कि श्री नयनादेवी में नए सरकारी कॉलेज की स्थापना की जाएगी। ट्रस्ट की तैयार इमारत और अन्य जमीन को इस बारे में बिना शर्त हस्तांतरित किया जाएगा।
प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस कार्य को अंजाम देने की स्थिति में राज्य सरकार को यह आदेश दिए कि वह कॉलेज मे नई कक्षाओं को चलाने के लिए ट्रस्ट की इमारत और अन्य मूलभूत सुविधाओं को इस्तेमाल में लाए। श्री नयनादेवी मंदिर ट्रस्ट की ओर से पेश अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष यह दलील दी थी कि अगर ट्रस्ट की निर्मित इमारत ओर अन्य सुविधाओं को राज्य सरकार के कॉलेज के लिए हस्तांतरित किया जाता है तो उससे मंदिर के साथ लगती जमीन के कॉलेज के लिए हस्तांतरण के कारण मंदिर के उपयोग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली भूमि कम पड़ जाएगी। विशेषता जबकि मंदिर में मेलों का आयोजन किया जाता है और आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने का इंतजाम करना होता है। न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी और न्यायाधीश चंद्र भूषण बारोवलिया की खंडपीठ ने ये आदेश श्री नयनादेवी सनातन धर्म एजूकेशन ट्रस्ट की दायर याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किए मामले पर दिए हैं। मामले की आगामी सुनवाई 8 अगस्त को होगी।
विज्ञापन
शिमला। प्रदेश उच्च न्यायालय ने श्री नयना देवी के श्री नयनादेवी सनातन धर्म एजूकेशन ट्रस्ट के निर्मित भवन और अन्य भूमि को शिक्षा विभाग के लिए हस्तांतरित करने के मामले की बुधवार को सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जिलाधीश बिलासपुर से आशा जताई कि वह जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकारी भूमि को मंदिर के नजदीक ट्रस्ट की भूमि के बराबर मंदिर के लिए हस्तांतरित करने बारे में निर्णय लें। इस बारे में इंतजाम करने के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा कि श्री नयनादेवी में नए सरकारी कॉलेज की स्थापना की जाएगी। ट्रस्ट की तैयार इमारत और अन्य जमीन को इस बारे में बिना शर्त हस्तांतरित किया जाएगा।
प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस कार्य को अंजाम देने की स्थिति में राज्य सरकार को यह आदेश दिए कि वह कॉलेज मे नई कक्षाओं को चलाने के लिए ट्रस्ट की इमारत और अन्य मूलभूत सुविधाओं को इस्तेमाल में लाए। श्री नयनादेवी मंदिर ट्रस्ट की ओर से पेश अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष यह दलील दी थी कि अगर ट्रस्ट की निर्मित इमारत ओर अन्य सुविधाओं को राज्य सरकार के कॉलेज के लिए हस्तांतरित किया जाता है तो उससे मंदिर के साथ लगती जमीन के कॉलेज के लिए हस्तांतरण के कारण मंदिर के उपयोग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली भूमि कम पड़ जाएगी। विशेषता जबकि मंदिर में मेलों का आयोजन किया जाता है और आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने का इंतजाम करना होता है। न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी और न्यायाधीश चंद्र भूषण बारोवलिया की खंडपीठ ने ये आदेश श्री नयनादेवी सनातन धर्म एजूकेशन ट्रस्ट की दायर याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किए मामले पर दिए हैं। मामले की आगामी सुनवाई 8 अगस्त को होगी।
विज्ञापन