एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल जारी, इस जिले में भी थम गई सेवा
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108 एंबुलेंस सेवा देने वाले कर्मचारियों की हड़ताल पांचवें दिन भी जारी रही। लोग बेहाल होते रहे। एंबुलेंस सेवा को फोन करने के बाद भी सेवाएं नहीं मिल सकीं। सात जिलों में हड़ताल के बाद शुक्रवार को हमीरपुर जिले के कर्मचारी भी एंबुलेंस छोड़ सड़कों पर उतर आए हैं।
चंबा, सिरमौर, शिमला, सोलन, कांगड़ा, मंडी और कुल्लू में कर्मचारी पहले ही हड़ताल पर अड़े हैं। इधर, चार दिन के प्रयासों के बावजूद हड़ताल पर अड़े कर्मचारियों पर अब सेवा प्रदाता कंपनी जीवीके ईएमआरआई ने एस्मा का हवाला देते हुए हड़ताल से वापस लौटने का नोटिस जारी कर दिया है।
शुक्रवार रात तक हड़ताल से वापसी न होने की स्थिति में कंपनी हड़ताली कर्मचारियों की बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू कर देगी। हड़ताल से आम लोगों को परेशानी से बचाने के लिए शुक्रवार को भी एनएचएम निदेशक पंकज राय ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बैठक की।
सीपीएम ने दिया समर्थन
राय ने बताया कि कुल 198 एंबुलेंस में से 143 सड़क पर उतारी जा चुकी हैं। इन एंबुलेंसों को होमगार्ड और स्वास्थ्य विभाग के चालकों के जरिये संचालित किया जा रहा है।
इसके अलावा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत लगे वाहनों को भी मरीजों को लाने ले जाने के लिए लगाया गया है। राय ने कहा कि कंपनी ने शनिवार तक उत्तराखंड से चालकों के पहुंचने का आश्वासन दिया है।
उधर, पांचवें दिन भी जीवीके कर्मियों ने सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग की कि एंबुलेंस कर्मियों को हरियाणा की तर्ज पर सरकारी नीति के तहत रखा जाए ताकि आठ घंटे से ज्यादा उनसे काम न लिया जा सके।
पांचवें दिन सीपीएम ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन का एलान कर दिया है। सीपीएम विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि जीवीके ईएमआरआई एंबुलेंस सेवा को निर्बाध तरीके से जारी रखने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।
साथ ही वह कर्मचारियों का शोषण कर रही है। मांग की कि सरकार तत्काल कंपनी के साथ हुए एमओयू को निरस्त कर कर्मचारियों को अपने अधीन ले।