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चेक बाउंस मामले में दोषी को 1.40 लाख का जुर्माना
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दो माह का कारावास भी भुगतना होगा
शिमला। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की अदालत ने चेक बाउंस के एक अपील का निपटारा करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। इस मामले में 31 दिसंबर 2021 को न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट नंबर तीन शिमला ने गंगा राम को दोषी को करार देकर 15 जनवरी 2020 को 1,40,000 हजार जुर्माना और 2 महीने के कारावास की सजा सुनाई थी।
शिकायतकर्ता निर्मला देवी ने दोषी करार दिए ठेकेदार गंगा राम को साल 2015 में अपने घर में 11 पिलर का काम दिया, इसके लिए उसे एडवांस के रूप में 1,80,000 रुपये दिए थे। दोषी ने काम शुरू किया लेकिन समय पर पूरा नहीं किया। नवंबर 2015 में दोषी ने काम करने से मना कर दिया। दोषी ने पैसा वापस करने के लिए दो चेक 44 हजार और 75,000 रुपये के दिए जो बाउंस हो गए थे। इसके बाद वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस दिया लेकिन पैसे नहीं लौटाए गए है। महिला ने इसके बाद न्यायालय में शिकायत दर्ज कवाई थी। इस पर दोषी ने निचली अदालत के फैसले को गलत बताते हुए अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अब अपीलीय अदालत ने दोषी की अपील को खारिज कर निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।
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शिमला। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की अदालत ने चेक बाउंस के एक अपील का निपटारा करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। इस मामले में 31 दिसंबर 2021 को न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट नंबर तीन शिमला ने गंगा राम को दोषी को करार देकर 15 जनवरी 2020 को 1,40,000 हजार जुर्माना और 2 महीने के कारावास की सजा सुनाई थी।
शिकायतकर्ता निर्मला देवी ने दोषी करार दिए ठेकेदार गंगा राम को साल 2015 में अपने घर में 11 पिलर का काम दिया, इसके लिए उसे एडवांस के रूप में 1,80,000 रुपये दिए थे। दोषी ने काम शुरू किया लेकिन समय पर पूरा नहीं किया। नवंबर 2015 में दोषी ने काम करने से मना कर दिया। दोषी ने पैसा वापस करने के लिए दो चेक 44 हजार और 75,000 रुपये के दिए जो बाउंस हो गए थे। इसके बाद वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस दिया लेकिन पैसे नहीं लौटाए गए है। महिला ने इसके बाद न्यायालय में शिकायत दर्ज कवाई थी। इस पर दोषी ने निचली अदालत के फैसले को गलत बताते हुए अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अब अपीलीय अदालत ने दोषी की अपील को खारिज कर निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।
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