निगम लापरवाह, लैप्स हो गया गरीबों को बसाने के लिए मिला करोड़ों रुपया
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शहरी गरीब परिवारों और तहबाजारियों को बसाने के लिए केंद्र सरकार से मिली करोड़ों रुपये की ग्रांट लैप्स हो गई है। नगर निगम की लापरवाही के चलते अब इन प्रोजेक्टों के लटकने का संकट खड़ा हो गया है। कैग रिपोर्ट में यह चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
इनमें लिफ्ट के पास बन रहा निगम का महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट आजीविका भवन भी शामिल हैं। इस भवन में 222 दुकानें बननी है जिसमें शहर की तिब्बती मार्केट और पंजीकृत तहबाजारियों को शिफ्ट करने का दावा था।
केंद्र से इस प्रोजेक्ट के लिए करीब ढाई करोड़ मिलने थे जिसकी पहली किस्त जारी हो चुकी है। कैग रिपोर्ट के अनुसार चैलेंज फंड के तहत इस भवन का निर्माण जून 2015 तक पूरा किया जाना था लेकिन यह लटक गया।
कार्य 2019 में शुरू हो चुका है, लेकिन काम पूरा नहीं हो पा रहा। ऐसे में केंद्र से मिलने वाली बाकी 1.25 करोड़ की ग्रांट लैप्स हो गई है। नगर निगम को अब लाभार्थियों से लिए शेयर के अलावा अब अपने फंड से भी पैसा
देना पड़ेगा।
वहीं शहरी गरीब परिवारों को बसाने के लिए निगम ने कृष्णानगर में आवासों के निर्माण की योजना बनाई थी। इसमें दो सौ से अधिक परिवारों को आवास मिलने थे। साल 2013 से शुरू हुआ काम 2017 तक पूरा होना था। लेकिन ये आवास 2019 में भी तैयार नहीं हो पाए हैं। कैग की रिपोर्ट के अनुसार आवासों के निर्माण में काफी देरी हो चुकी है।
प्रोजेक्ट पर मिशन पीरियड (2013-17)के दौरान 4.93 करोड़ रुपये खर्च किए गए लेकिन निर्माण पूरा न होने से बाकी बची करीब 23.50 करोड़ रुपये की ग्रांट लैप्स हो सकती है।
रिपोर्ट में जेएनएनयूआरएम के तहत पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए मिले पैसों को दूसरे कार्यों में लगाने का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, इन पैसों को परियोजनाओं की मेन पाइपलाइन बदलने के लिए किया गया है जिनसे लीकेज की समस्या नहीं रहेगी।
धूल फांकती रही फाइलें, सोए रहे अफसर
नगर निगम के यह सारे प्रोजेक्ट 2010 से लेकर 2015 के बीच के हैं। शुरुआती दो से तीन साल तक तो इनका काम फाइलों तक सीमित रहा। नए आयुक्त पंकजराय के प्रयासों के बाद इनके काम में तेजी आई।
आजीविका भवन और गरीब आवासों को तैयार करने के लिए छह माह में कई बैठकें हो चुकी हैं। बाकायदा हर हफ्ते इनकी स्टेट्स रिपोर्ट भी ली जा रही है। लेकिन यदि निगम के पिछले अफसर समय से जाग जाते तो पैसा लैप्स न होता और गरीबों को घर भी मिल गए होते।
केंद्र सरकार से करेंगे मांग
निगम आयुक्त पंकज राय ने कहा कि आजीविका भवन की ग्रांट को लेकर वह जल्द दिल्लीजाएंगे। केंद्र सरकार से ग्रांट देने की मांग की जाएगी। आवास योजना अभी 2022 तक चलनी है। ऐसे में इसका पैसा लैप्स नहीं होगा।
पिछले नगर निगम की लापरवाही
प्रोजेक्टों में देरी पिछले नगर निगम की लेटलतीफी के चलते हुई है। यदि समय पर काम शुरू होता तो आज गरीबों और तहबाजारियों को पक्के ठिकाने मिल जाते। वर्तमान निगम पिछले अटके कामों को जल्द निपटाने के लिए कदम उठा रहा है। नई कामों के लिए हमने समयसीमा तय की है। - कुसुम सदरेट, महापौर नगर निगम