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Rajasthan News: खनन कारोबारी की PIL पर उठे सवाल, हाईकोर्ट ने दी तथ्यों के छिपाने पर 25 लाख जुर्माने की चेतावनी
Mon, 16 Mar 2026 06:03 PM IST
Himanshu Priyadarshi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
Published by: Himanshu Priyadarshi
Updated Mon, 16 Mar 2026 06:03 PM IST
सार
Rajasthan High Court: जोधपुर हाईकोर्ट ने वेटब्रिज और रॉयल्टी चौकियों को लेकर दायर पीआईएल में याचिकाकर्ता की मंशा पर सवाल उठाए। अदालत ने तथ्य छिपाने पर 25 लाख जुर्माने की चेतावनी दी और मामले को सुओ मोटू के रूप में जारी रखते हुए अगली सुनवाई 6 अप्रैल तय की।
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राजस्थान हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नेशनल हाईवे के पास स्थापित वेटब्रिज और रॉयल्टी वसूली चौकियों को लेकर दायर जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई के दौरान जोधपुर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिका में यह महत्वपूर्ण तथ्य छिपाया गया था कि याचिकाकर्ता का परिवार खनन कारोबार से जुड़ा हुआ है, जिससे मामले में संभावित निजी हित होने की आशंका जताई गई।
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खंडपीठ ने रिकॉर्ड के आधार पर जताया संदेह
हाईकोर्ट की खंडपीठ में जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता हिम्मत सिंह गेहलोत और उनका परिवार खनन तथा वेटब्रिज संचालन से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस मामले में उनका सीधा व्यावसायिक हित हो सकता है। अदालत ने टिप्पणी की कि इस स्थिति में जनहित याचिका के माध्यम से अदालत का दरवाजा खटखटाना उचित नहीं माना जा सकता।
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पीआईएल दाखिल करते समय जरूरी जानकारी नहीं दी गई
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि जनहित याचिका दाखिल करते समय याचिकाकर्ता के लिए अपनी सामाजिक स्थिति, पेशा, संभावित निजी हित और पहले दायर किए गए मुकदमों की जानकारी देना अनिवार्य होता है। अदालत के अनुसार इस मामले में आवश्यक तथ्यों का खुलासा नहीं किया गया, जिससे याचिका की नीयत को लेकर संदेह उत्पन्न होता है।
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याचिकाकर्ता को प्रतिवादी बनाने के निर्देश
खंडपीठ ने आदेश देते हुए याचिकाकर्ता का नाम याचिकाकर्ता के रूप में हटाकर उसे प्रतिवादी के रूप में दर्ज करने के निर्देश दिए। साथ ही मामले का शीर्षक ‘सेफ्टी ऑन द हाईवेज बनाम राजस्थान राज्य व अन्य’ करने को कहा गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति भविष्य में कोई भी जनहित याचिका दाखिल नहीं कर सकेगा।
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25 लाख रुपये के जुर्माने पर जवाब तलब
अदालत ने यह भी पूछा कि यदि पीआईएल की असाधारण अधिकारिता का उपयोग व्यक्तिगत कारणों से किया गया है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में उदाहरणीय कार्रवाई के रूप में 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर उसे अदालत की लीगल एड सेल में जमा कराने पर विचार किया जा सकता है।
मामले को सुओ मोटू के रूप में जारी रखा गया
हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास अवैध या खतरनाक निर्माण और सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दे जनहित से संबंधित हैं। इसलिए अदालत ने मामले को स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) के रूप में जारी रखने का निर्णय लिया है। इस मामले में अदालत ने अधिवक्ता शरद कोठारी को अमिकस क्यूरी नियुक्त किया है।
वेटब्रिज को स्थानांतरित करने की जानकारी
सुनवाई के दौरान एक निजी कंपनी के वकील ने अदालत को बताया कि विवादित वेटब्रिज पहले राष्ट्रीय राजमार्ग से 75 मीटर के भीतर स्थित था, लेकिन अदालत के पूर्व आदेश के बाद अब उसे 75 मीटर से अधिक दूरी पर स्थानांतरित कर दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
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