पंजाब कांग्रेस में पड़ गई फूट

चंडीगढ़/अमर उजाला Updated Fri, 25 Oct 2013 07:03 AM IST
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Split in Punjab Congress

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पंजाब विधानसभा में सत्तापक्ष से मोर्चा लेने की तैयारी में जुटी कांग्रेस की समूची रणनीति औंधे मुंह गिरती नजर आ रही है। सदन में विपक्ष के नेता सुनील जाखड़ ने सदन में उठाए जाने वाले मुद्दों को अंतिम रुप देने के लिए 28 अक्तूबर को विधायकों की बैठक बुलाई है।
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वहीं प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने भी 26 अक्तूबर को विधायकों की बैठक बुलाए जाने से पार्टी की प्रदेश इकाई में एकता की पोल खुल गई है।
हालांकि हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस के कामकाज को सुचारु बनाने के लिए हाल ही में एख समन्वय समिति का गठन भी किया था और दिग्गजों की दिल्ली बुलाकर एकता का पाठ भी पढ़ाया था।
लेकिन नए घटनाक्रम ने यही दर्शाया है कि हाईकमान की कोशिशों का कोई असर प्रदेश के दिग्गज कांग्रेसियों पर नहीं हुआ है।

प्रदेश प्रधान बाजवा की ओर से कुछ वरिष्ठ विधायकों को ई-मेल के जरिए 28 अक्तूबर की बैठक में शामिल होने का न्योता दिया गया है।

ई-मेल में साफ लिखा है कि बैठक में सदन में पार्टी की रणनीति के बारे में चर्चा कर मुद्दों को अंतिम रुप दिया जाएगा।

ई-मेल पाने वाले विधायक इस बात को लेकर हैरान हैं कि उन्हें यह मेल उस समय पहुंचा जब कांग्रेस विधायक दल के नेता सुनील जाखड़ विधानसभा परिसर में सीएलपी दफ्तर में विधायकों के साथ बैठक कर मुद्दों को अंतिम रुप दे रहे थे।

अधिकार क्षेत्र को लेकर तनातनी!
प्रदेश प्रधान के आमंत्रण पर पार्टी के एक वरिष्ठ विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पार्टी चलाना प्रदेश प्रधान का अधिकार क्षेत्र है लेकिन सदन के भीतर पार्टी की रणनीति तय करना विधायक दल के नेता का काम है।

बाजवा जाखड़ के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर हाईकमान के एकता प्रयासों को पलीता लगा रहे हैं। बाजवा की ओर से विधायकों को भेजे गए आमंत्रण पर टिप्पणी से इनकार करते हुए जाखड़ ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी पत्र या ई-मेल की जानकारी नहीं है।

गौरतलब है कि 10 अक्तूबर को संगरुर में हुई रैली के दौरान मंच से ही बाजवा द्वारा कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ की गई सार्वजनिक टिप्पणी से राहुल समेत सभी वरिष्ठ नेता हक्के-बक्के रह गए थे।

इसके बाद हलात को देखते हुए प्रदेश प्रभारी शकील अहमद ने नई दिल्ली में पंजाब कांग्रेस के दिग्गजों को एक जगह इकट्ठा कर एकजुट होने का संदेश दिया। इसके साथ ही सभी पक्षों को प्रतिनिधित्व देने केलिए एक समन्वय समिति का गठन किया था।



विधायक दल के नेता ही तय करते है मुद्दे
कांग्रेस के संविधान के मुताबिक विस सत्र से पहले विधायक देल के नेता सीएलपी दफ्तर में बैठक कर सदन के अंदर पार्टी की रणनीति और उठाए जाने वाले मुद्दों को अंतिम रुप देते रहे हैं।

ऐसी बैठकों में पूर्व प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह और बीबी राजिंदर कौर भट्ठल भी सामिल होती रही हैं लेकिन मौजूदा प्रधान बाजवा ने समानांतर बैठक कर एक नई परंपरा शुरु की है।
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