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बारिश से डिमांड घटी, उपलब्धता अब भी कम
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला
Updated Fri, 18 Jul 2014 10:24 PM IST
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पंजाब के ज्यादातर हिस्सों में बारिश के कारण शुक्रवार को बिजली की डिमांड काफी कम रही। लेकिन अब भी उपलब्धता कम रहने के चलते गांवों के साथ-साथ इंडस्ट्रीज पर कट जारी है।
पंजाब के ज्यादातर इलाकों में मानसून ने दस्तक दे दी है। वीरवार शाम और शुक्रवार सुबह बारिश की रिमझिम फुहारें बरसीं। बारिश से पारा लुढ़कने के कारण राज्य में बिजली की मांग काफी कम हो गई है। जहां दो-तीन दिन पहले तक बिजली की मांग 11 हजार मेगावाट क्रास कर गई थी, वहीं शुक्रवार को पंजाब में बिजली की मांग कम होकर 8950 मेगावाट रह गई। बावजूद इसके पावरकॉम के पास बिजली की उपलब्धता कम रही।
शुक्रवार को बिजली की उपलब्धता 8300 मेगावाट दर्ज की गई। बिजली की उपलब्धता के कम रहने का मुख्य कारण प्राइवेट थर्मल प्लांटों से अभी तक बिजली पूरा न मिलना है। करोड़ों की लागत से बना तलवंडी साबो थर्मल प्लांट तो अभी तक बंद पड़ा है। वहीं राजपुरा प्लांट के दोनों यूनिटों से मात्र 600 मेगावाट ही बिजली मिल रही है। जबकि यह दोनों यूनिट 700-700 मेगावाट के हैं।
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कोयले का स्टाक कम रहने के चलते प्लांट कम क्षमता पर चलाया जा रहा है।
पावरकॉम के अपने लहरां मोहब्बत प्लांट का एक और बठिंडा प्लांट का भी एक यूनिट बंद पड़ा है। हालांकि पावरकॉम के प्लांटों में कोयले की स्थिति पिछले दो-तीन दिनों के मुकाबले कुछ सुधरी है। शुक्रवार को लहरां मोहब्बत प्लांट में छह, बठिंडा में 10 और रोपड़ प्लांट में 12 दिनों के कोयले का स्टॉक था। बिजली की उपलब्धता कम रहने के कारण इंडस्ट्रीज पर लग रहे कट जारी हैं। उधर गांवों में भी दो से तीन घंटों के कट लग रहे हैं। किसानों को बिजली पूरी मिल रही है।
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पंजाब के ज्यादातर इलाकों में मानसून ने दस्तक दे दी है। वीरवार शाम और शुक्रवार सुबह बारिश की रिमझिम फुहारें बरसीं। बारिश से पारा लुढ़कने के कारण राज्य में बिजली की मांग काफी कम हो गई है। जहां दो-तीन दिन पहले तक बिजली की मांग 11 हजार मेगावाट क्रास कर गई थी, वहीं शुक्रवार को पंजाब में बिजली की मांग कम होकर 8950 मेगावाट रह गई। बावजूद इसके पावरकॉम के पास बिजली की उपलब्धता कम रही।
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शुक्रवार को बिजली की उपलब्धता 8300 मेगावाट दर्ज की गई। बिजली की उपलब्धता के कम रहने का मुख्य कारण प्राइवेट थर्मल प्लांटों से अभी तक बिजली पूरा न मिलना है। करोड़ों की लागत से बना तलवंडी साबो थर्मल प्लांट तो अभी तक बंद पड़ा है। वहीं राजपुरा प्लांट के दोनों यूनिटों से मात्र 600 मेगावाट ही बिजली मिल रही है। जबकि यह दोनों यूनिट 700-700 मेगावाट के हैं।
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कोयले का स्टाक कम रहने के चलते प्लांट कम क्षमता पर चलाया जा रहा है।
पावरकॉम के अपने लहरां मोहब्बत प्लांट का एक और बठिंडा प्लांट का भी एक यूनिट बंद पड़ा है। हालांकि पावरकॉम के प्लांटों में कोयले की स्थिति पिछले दो-तीन दिनों के मुकाबले कुछ सुधरी है। शुक्रवार को लहरां मोहब्बत प्लांट में छह, बठिंडा में 10 और रोपड़ प्लांट में 12 दिनों के कोयले का स्टॉक था। बिजली की उपलब्धता कम रहने के कारण इंडस्ट्रीज पर लग रहे कट जारी हैं। उधर गांवों में भी दो से तीन घंटों के कट लग रहे हैं। किसानों को बिजली पूरी मिल रही है।