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Punjab: यहां खालिस्तान के लिए 'जमीन' के साथ खाद पानी भी है, लेकिन कौन कर रहा जलती आग में घी डालने का काम?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 05 Nov 2022 11:18 PM IST
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सार
Punjab: पंजाब पुलिस के पूर्व शीर्ष अधिकारी ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बताया, खालिस्तानी अलगाववाद को आगे बढ़ाना है या उसे वहीं खत्म करना है, ऐसा बहुत कुछ सरकार के हाथ में होता है। पुलिस तो पहले भी अपना काम करती थी, आज भी करती है...
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Punjab: Khalistan movement now trying to establish again in state
Punjab: अमृतसर में हिंदू नेता की हत्या। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और मुख्यमंत्री सरदार बेअंत सिंह सहित अनेक लोगों की मौत का कारण बन चुका खालिस्तान अलगाववाद, अब दोबारा से पंजाब में पांव पसारने का प्रयास कर रहा है। जानकार बताते हैं कि राज्य में अब जमीन उसके अनुकूल है। एक ओर किसानों में रोष है, तो दूसरी तरफ बेरोजगारी की दलदल में फंसे युवा हैं। सीमा पार से लगातार आ रही नशे की खेप ने पंजाब में जलती आग में घी डालने का काम किया है। पुलिस प्रतिष्ठान पर हमला हो या मंदिर के सामने शिवसेना नेता सुधीर सूरी की दिन दहाड़े हत्या, ये घटनाएं गंभीर सवाल खड़े करने के लिए काफी हैं। पंजाब के कई शहरों में खालिस्तान के पोस्टर लगना और कनाडा में सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के संस्थापक एवं खालिस्तानी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ इंटरपोल का यह कहना है कि भारत सरकार पर्याप्त सबूत नहीं जुटा सकी, इसलिए पन्नू के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी नहीं होगा।

ऐसा बहुत कुछ सरकार के हाथ में होता है

पंजाब पुलिस के पूर्व शीर्ष अधिकारी ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बताया, ये एक ऐसा मुद्दा है जिसमें कई फैक्टर हैं। सबसे पहले तो 'पॉलिटिक्स' का नाम ही आएगा। खालिस्तानी अलगाववाद को आगे बढ़ाना है या उसे वहीं खत्म करना है, ऐसा बहुत कुछ सरकार के हाथ में होता है। यहां आरोप प्रत्यारोप की बात नहीं हो रही, मगर खालिस्तानी अलगाववाद से राजनीतिक दल अछूते तो नहीं रहे। पुलिस तो पहले भी अपना काम करती थी, आज भी करती है। अस्सी व नब्बे के दशक के आतंकवाद में पुलिस और कई बेगुनाहों को भी नुकसान उठाना पड़ा है। यह सब सरकार के हाथ में होता है कि वह उन परिस्थितियों को पैदा ही क्यों होने देती है, जिसमें खालिस्तान पनपने की गुंजाइश नजर आती हो। यानी उसे खाद पानी मिलता हो।

यहां खालिस्तान अलगाववाद के लिए जमीन तो है...

किसान आंदोलन में जब खालिस्तान के पोस्टर नजर आए तो हड़कंप मच गया था। इसके पीछे कोई वजह तो रही होगी। हालांकि बाद में उन्हें वहां से हटाया गया और आंदोलन के नेताओं को सफाई देनी पड़ी। आंदोलन के प्रमुख नेता सरदार जगमोहन सिंह बताते हैं, कोई भी कुछ कहता रहे, मगर सच यही है कि इस मुहिम को खुराक मिल रही है। कोई खुद को सेकंड भिंडरावाला बताता है, तो यह छोटी बात नहीं है। यहां खालिस्तान मूवमेंट के लिए जमीन तो है, और इसीलिए किसी पार्टी, स्थानीय संगठन या विदेश में बैठे लोगों को मौका मिल रहा है। इन्हें कहीं से तो बल मिल रहा है। पंजाब में नशा और बेरोजगारी, आज यही दो प्रमुख मुद्दे हैं। यूं कहें कि इन मुद्दों की आड़ में कोई भी आसानी से युवाओं को बरगला सकता है। कुछ हद तक यह सब हो भी रहा है। असमंजस और बहकावे में किसी को यह पता नहीं लगता कि कौन सा कदम सही या गलत है। राजनीतिक या कोई बाहरी ताकत, इसका फायदा उठा सकती है।  

दूसरे मुल्क में आधुनिकता के परिवेश में ढल रहे पंजाबी

पंजाब में अब बहुत कुछ बदल रहा है। कई जगह 'मजबूरी' की स्थिति महसूस होने लगी है। किसान नेता के अनुसार, पंजाब में खालिस्तान पांव फैला रहा है। दूसरी तरफ छोटे किसान और कामगार के बच्चे, किसी भी तरह से विदेश जाने के प्रयास में हैं। घर-धरती गिरवी रखी जा रही है। यहां एक बड़ा परिवर्तन देखिये। इन घरों के बच्चे विदेश जाकर अपने बाल कटा रहे हैं। वहां उनके दिमाग में 'खालिस्तान' जैसा कुछ नहीं आता। दूसरे मुल्क में वे पूरी तरह आधुनिकता के परिवेश में ढल जाते हैं। बता दें कि पंजाब में इस वर्ष खालिस्तान से जुड़ी ज्यादातर घटनाएं हो रही हैं। खुलेआम खालिस्तान का समर्थन करने वाले सिमरनजीत सिंह मान, पंजाब के संगरूर से लोकसभा सांसद चुने जाते हैं। ये कोई छोटी बात नहीं है। वे पहले भी राजनीति में रहे हैं, लेकिन वैसी सफलता नहीं मिली। पंजाब में भारी बहुमत से सरकार बनाने वाली 'आप' के रहते वे लोकसभा सांसद बन जाते हैं। कुछ समय पहले उन्हें जम्मू-कश्मीर में नहीं घुसने दिया गया। मौजूदा परिस्थितियों में मान का निर्वाचन, खालिस्तान को लेकर कुछ ठोस इशारा कर रहा है।

ये घटनाएं कुछ तो बताती हैं कि ठीक नहीं है सब

भारत ने कनाडा में तथाकथित जनमत संग्रह की योजना बनाने वालों के खिलाफ अपनी चिंता जताई है। कनाडा सरकार से उसकी धरती पर भारत विरोधी गतिविधियों को बंद करने के लिए कहा गया, मगर कुछ हुआ नहीं। खालिस्तान समर्थक 'पन्नू' भारत में आतंकवादी गुट के तौर पर प्रतिबंधित है। विदेश मंत्रालय ने कहा, खालिस्तानी तत्वों की पृथकतावादी कार्रवाई और पंजाब में हिंसा के इतिहास से सभी परिचित हैं। कनाडा में उग्रवादी तत्वों के राजनीति से प्रेरित होकर जो सब किया जा रहा है, भारत उसका विरोध करता है। एसएफजे ने इसी सप्ताह टोरंटो के पास मिसिसाउगा में जनमत संग्रह की घोषणा की है।

वह रॉकेट लॉन्चर भी चलाना जानते हैं

पन्नू के लोगों ने पंजाब आर्म्ड पुलिस (पीएपी) परिसर की दीवारों पर खालिस्तान के समर्थन में नारे लिखवा दिए थे। पन्नू ने धमकी दी थी कि कि जिन हाथों से दीवारों पर खालिस्तान के समर्थन में नारे लिखवाए गए हैं, वह रॉकेट लॉन्चर भी चलाना जानते हैं। इस साल विवादित एक्टर दीप सिद्धू और सिद्धू मूसेवाला के अंतिम संस्कार में जिस तरह लोग एकत्रित हुए, उससे भी कुछ सबक लेना चाहिए। हिमाचल प्रदेश विधानसभा परिसर के मुख्य द्वार पर खालिस्तान का झंडा लगना, तरनतारन जिले में आरडीएक्स वाली आईईडी जब्त होना, पंजाब पुलिस इंटेलिजेंस मुख्यालय में रॉकेट-चालित ग्रेनेड विस्फोट और पंजाब में 'वारिस पंजाब दे' संगठन का आगे बढ़ना, ये सब सामान्य बातें नहीं हैं।

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