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चंडीगढ़ में 29 को रैली करेंगे पंजाब के कर्मचारी
चंडीगढ़/अमर उजाला
Updated Fri, 25 Oct 2013 01:52 AM IST
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पंजाब विधानसभा के 28 को शुरू हो रहे मानसून सत्र के कारण कर्मचारी संगठनों ने एकजुट होकर 29 अक्तूबर को चंडीगढ़ में विशाल रैली करने का फैसला किया है।
यह रैली चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा तय जगह सेक्टर-25 में नहीं बल्कि चंडीगढ़ बीच शहर में की जाएगी। जगह का खुलासा फिलहाल नहीं किया गया है।
विभिन्न कर्मचारी संगठनों पर आधारित चार फेडरेशनों और एक दर्जन के करीब स्वतंत्र संगठनों की तरफ से वीरवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में पंजाब मुलाजिम संघर्ष कमेटी के संयोजक रणबीर सिंह ढिल्लों, वेद प्रकाश, सुखदेव सिंह सैनी और भुपिंदर सिंह वडै़च ने कहा कि सरकार की नव उदारवादी नीतियों के खिलाफ 16 मांगों को लेकर कर्मचारियों का यह पहला एकजुट कार्यक्रम है। यह संघर्ष की शुरुआत होगी।
संघर्ष की अगली रणनीति की घोषणा 29 की रैली में की जाएगी। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार विधायकों, मंत्रियों और आईएएस अधिकारियों को तो गफ्फे दे रही है, लेकिन कर्मचारियों के साथ किए वादों और उनके कानूनी हक देने से पीछे हट रही है।
बहुत से कर्मचारी जैसे मिड डे मील कुक, आशा वर्कर और आंगनबाड़ी स्टाफ के लिए तो न्यूनतम उजरत भी लागू नहीं है।
ये हैं मुख्य मांगें
जनवरी 2013 से 8 फीसदी और जुलाई से 10 फीसदी महंगाई भत्ते की किश्त जारी करवाना। मंत्रिमंडल और बजट में की गई घोषणा के अनुसार 5वें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक संशोधित वेतन के बकाए की आखिरी 30 फीसदी का भुगतान करवाना। 50 फीसदी महंगाई भत्ता मूल वेतन में मर्ज करवाना।
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तयशुदा भत्तों में 25 फीसदी की बढ़ोतरी करवाना। डाक्टरी इलाज की दरें बढ़वाना। आईएएस अफसरों की तरह ब्लाक शिक्षा भत्ता लागू करवाना। एक लाख से ज्यादा ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करवाना।
आशा, आंगनबाड़ी और मिड डे मील कुकों को न्यूनतम उजरत कानून के दायरे में लाना। आऊट सोर्सिंग नीति रद्द करना। छठे पंजाब वेतन आयोग गठित करवाना आदि।
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यह रैली चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा तय जगह सेक्टर-25 में नहीं बल्कि चंडीगढ़ बीच शहर में की जाएगी। जगह का खुलासा फिलहाल नहीं किया गया है।
विभिन्न कर्मचारी संगठनों पर आधारित चार फेडरेशनों और एक दर्जन के करीब स्वतंत्र संगठनों की तरफ से वीरवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में पंजाब मुलाजिम संघर्ष कमेटी के संयोजक रणबीर सिंह ढिल्लों, वेद प्रकाश, सुखदेव सिंह सैनी और भुपिंदर सिंह वडै़च ने कहा कि सरकार की नव उदारवादी नीतियों के खिलाफ 16 मांगों को लेकर कर्मचारियों का यह पहला एकजुट कार्यक्रम है। यह संघर्ष की शुरुआत होगी।
संघर्ष की अगली रणनीति की घोषणा 29 की रैली में की जाएगी। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार विधायकों, मंत्रियों और आईएएस अधिकारियों को तो गफ्फे दे रही है, लेकिन कर्मचारियों के साथ किए वादों और उनके कानूनी हक देने से पीछे हट रही है।
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बहुत से कर्मचारी जैसे मिड डे मील कुक, आशा वर्कर और आंगनबाड़ी स्टाफ के लिए तो न्यूनतम उजरत भी लागू नहीं है।
ये हैं मुख्य मांगें
जनवरी 2013 से 8 फीसदी और जुलाई से 10 फीसदी महंगाई भत्ते की किश्त जारी करवाना। मंत्रिमंडल और बजट में की गई घोषणा के अनुसार 5वें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक संशोधित वेतन के बकाए की आखिरी 30 फीसदी का भुगतान करवाना। 50 फीसदी महंगाई भत्ता मूल वेतन में मर्ज करवाना।
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तयशुदा भत्तों में 25 फीसदी की बढ़ोतरी करवाना। डाक्टरी इलाज की दरें बढ़वाना। आईएएस अफसरों की तरह ब्लाक शिक्षा भत्ता लागू करवाना। एक लाख से ज्यादा ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करवाना।
आशा, आंगनबाड़ी और मिड डे मील कुकों को न्यूनतम उजरत कानून के दायरे में लाना। आऊट सोर्सिंग नीति रद्द करना। छठे पंजाब वेतन आयोग गठित करवाना आदि।