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पंजाब में प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों के खौफनाक आंकड़े

Fri, 27 Sep 2013 01:24 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 27 Sep 2013 01:24 AM IST
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protest cancer in punjab

पंजाब में 60 साल की आयु से ऊपर का प्रत्येक छठा व्यक्ति प्रोस्टेट कैंसर की बीमारी से ग्रस्त है।

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यह दावा यूरोलॉजिकल सोसाइटी आफ इंडिया (नार्थ जोन) के अध्यक्ष और दयानंद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, लुधियाना के यूरोलॉजी प्रोफेसर और किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख डा. बलदेव सिंह औलख ने वीरवार को यहां जारी एक बयान में किया है।

डा. औलख ने सितंबर माह में आयोजित प्रोस्टेट कैंसर संबंधी जागरूकता अभियान के दौरान कहा कि पंजाब में 6 में से 1 पुरुष  अपने जीवनकाल में प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित है और भारत में प्रोस्टेट कैंसर के पीड़ितों की संख्या हर साल 1 फीसदी की दर से बढ़ रही है।
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प्रोस्टेट कैंसर मुख्य तौर पर उम्रदराज व्यक्तियों में अधिक पाया जाता है। लगभग दो तिहाई वर्ग के 65 वर्षीय पुरुषों में यह बीमारी पाई गई जबकि 40 साल की उम्र से पहले यह बीमारी दुर्लभ दिखी।
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डा. औलख के मुताबिक इस बीमारी से जूझने वालों लोगों के लिए अच्छी खबर यह है कि इस भयानक बीमारी के उपचार के कई तरह के विकल्प मौजूद हैं।  

प्रोस्टेटक्टॉमी के जरिए सर्जिकल ढंग से प्रोस्टेट ग्रंथि के सभी हिस्सों को हटाते हुए इसका उपचार पेट को चीरकर या फिर लेप्रोस्कोप के जरिए धीमी रफ्तार में आक्रामक तकनीक द्वारा किया जाता है।

उनके द्वारा सितंबर 2012 में लिखित पुस्तक - प्रोस्टेट समस्याएं इससे पहले जाने ताकि बेहद देर न हो जाए- को पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा रिलीज किया गया था। उम्र बढ़ने के साथ साथ प्रोस्टेट ग्रंथि में कैंसर का पाया जाना एक प्रक्रिया का हिस्सा है।

सितंबर माह में शुरू किए गए जागरूकता अभियान में प्रोस्टेट कैंसर संबंधी जानकारी के कई पहलुओं के प्रति ध्यान दिलाया जा रहा है। इनमें प्रोस्टेट कैंसर की जानकारी को अपडेट करने, प्रस्तावित स्क्रीनिंग, रोकथाम, उपचार के विकल्प और संसाधनों के प्रति दृष्टिकोण और इस रोग की व्यापकता के संबंध में लोगों को बताया जा रहा है।

पीएसए टेस्ट कराएं
डा. औलख के अनुसार  पीएसए नाम का एक साधारण टेस्ट जो डिजीटल रेक्टल एग्जामिनेशन यानि डीआरई के तहत किया जाता है, प्रारंभिक चरण में ही कैंसर रोग का निदान संभव करता है।


प्रोस्टेट कैंसर नार्थ अमरीका, नोर्थवेस्टर्न यूरोप, आस्ट्रेलिया और कैरेबियाई द्वीपों में एक आम बात है। औलख कहते हैं कि -अमेरिका में इस रोग की तीव्रता को देखते हुए सरकार ने प्रोस्टेट कैंसर की समस्या से निपटने के लिए 40 साल के पुरुषों में टेस्ट कराने संबंधी नियमों को लागू कर दिया ताकि इसका निदान संभव हो सके।

भारत में ऐसे उपाय करने चाहिए, समय की मांग के अनुसार इस रोग के निदान हेतु प्रारंभिक चरण के परीक्षणों का होना बेहद लाज़िमी हो गया है।

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