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मिस यूनिवर्स हरनाज संधू: पैतृक गांव कोहाली में ग्रामीणों ने मनाया जश्न, पढ़ें- ताया और रिश्तेदारों ने क्या कहा

Mon, 13 Dec 2021 08:48 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बटाला (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, बटाला (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Mon, 13 Dec 2021 08:48 PM IST
सार

पंजाब की हरनाज कौर संधू ने मिस यूनिवर्स का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। 21 साल बाद किसी भारतीय ने यह खिताब जीता है। साल 2000 में लारा दत्ता मिस यूनिवर्स बनीं थीं। इसी साल हरनाज कौर संधू का जन्म हुआ था।

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People in native village are celebrating the achievement of Harnaaz Sandhu in Batala
ट्रैक्टर पर सवार हरनाज कौर संधू। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हरनाज कौर संधू के मिस यूनिवर्स बनने पर पैतृक गांव कोहाली में जश्न का माहौल है। हरनाज के रिश्तेदारों और गांव वासियों ने लड्डू बांटे और खुशी मनाई। हरनाज संधू के ताया और ताई ने पुरानी एलबम देखकर अपनी यादों को ताजा किया। जैसे ही सोमवार को हरनाज के मिस यूनिवर्स बनने की खबर गांव वालों ने सुनी तो सभी खुशी से झूम उठे। बटाला के गांव कोहाली में जन्मीं हरनाज को पंजाबियत से बेहद ज्यादा लगाव है।

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गांव कोहाली में हरनाज संधू के ताया जसविंदर सिंह और ताई लखविंदर कौर ने बताया कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन बटाला के गांव कोहाली का नाम पूरी दूनिया में जाना जाएगा। उनका कहना है कि हरनाज एक बहुत मीठे स्वभाव वाली बेटी है। 
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                                    हरनाज संधू के ताया और ताई को लड्डू खिलाते ग्रामीण।
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उन्होंने कहा कि वह अपनी खुशी को शब्दों में बयां नहीं कर सकते। हरनाज ग्रामीण रीति-रिवाजों को पसंद करती है। उनके लिए यह सब सपना है। सोमवार को उनकी बात चंडीगढ़ में हरनाज की माता से हुई है और उन्होंने उनको बधाई दी है। ताया जसविंदर सिंह ने बताया कि आम तौर वह केक नहीं खाते हैं लेकिन छह माह पहले जब हरनाज गांव कोहाली आई तो हरनाज ने अपने हाथों से उनको केक खिलाकर गई थी। 

हरनाज के एक अन्य रिश्तेदार सुखबीर सिंह निवासी गांव कोहाली ने बताया कि उन्हें इस बात का गर्व है कि उनके एक ग्रामीण परिवार से उठकर उनकी एक छोटी सी बच्ची ने विश्वस्तरीय मुकाम हासिल किया है। धार्मिक पक्ष को लेकर सुखबीर सिंह ने बताया कि जब हरनाज के दादा दर्शन सिंह संधू की मौत हुई थी, तब उनके भोग के वक्त गांव के गुरुद्वारा साहिब में भारी संख्या में संगत इकट्ठी हुई थी। तब हरनाज ने छोटी सी उम्र में बहुत मिठास और आत्मविश्वास से गुरबाणी का एक शबद गायन किया था। उन्होंने तभी हरनाज के आत्मविश्वास और कला को पहचान लिया था।

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