रखड़ पुण्या में सजे राजनीतिक मंच: एक दूसरे पर जमकर बरसे नेता, इस बार क्यों खास थे शक्ति प्रदर्शन के मायने
भाजपा ने पहली बार रखड़ पुण्या मेले में सियासी मंच सजाया था। कांग्रेस की बगावत खुले मंच पर दिखाई दी। चन्नी गुट के नेताओं की मौजूदगी, और वड़िंग की दूरी ने गुटबाजी को और हवा दे दी। मान ने आप के मंच से दोबारा सत्ता वापसी के लिए पंजाबियों का भरोसा जीतने की कोशिश तो वहीं शिअद और वारिस पंजाब दे ने खुद को पंथक मामलों का बड़ा पैरोकार बताया।
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पंजाब में माघी मेले की तरह बाबा बकाला साहिब में रखड़ पुण्या का मेला भी खास धार्मिक महत्व रखता है। यह माझा क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक मेला है, जो गुरु तेग बहादुर साहिब से जुड़ी ऐतिहासिक स्मृतियों का प्रतीक है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। इसी विशाल जनसमूह और पंथक महत्व के कारण विभिन्न राजनीतिक दल भी यहां सियासी मंच सजाकर अपने संदेश और शक्ति प्रदर्शन का अवसर तलाशते हैं।
इस बार यह मेला बहुत खास था क्योंकि विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। लिहाजा शुक्रवार को इस पंथक मेले में राजनीतिक दलों ने विधानसभा चुनाव की जमीन तैयार करने के लिए सियासी हुंकार भरी।
चन्नी को सीएम फेस बनाने की पैरवी
कांग्रेस के सम्मेलन में सिर्फ पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं का शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा इसमें नहीं पहुंचे। चन्नी समेत पूर्व डिप्टी सीएम व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक राणा गुरजीत, पूर्व मंत्री त्रिपत राजिंदर सिंह बाजवा, विधायक हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया समेत चन्नी गुट ही मंच पर दिखा। मुख्य निशाने पर मान सरकार रही। इस दौरान चन्नी समर्थकों की तरफ से खुले तौर पर यह संदेश दिया गया कि चरणजीत चन्नी को अगला मुख्यमंत्री चेहरा बनाया जाना चाहिए और इसके लिए हाईकमान को देरी नहीं करनी चाहिए। इसे चन्नी की ओर से वड़िंग के नेतृत्व को खुली चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है।
शिअद ने दी आप को चुनाैती
रक्खड़ पुण्या में शिअद के शक्ति प्रदर्शन ने 2027 में सत्ता वापसी और आम आदमी पार्टी के खिलाफ मजबूत चुनौती का संदेश दिया। मंच पर पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया समेत वरिष्ठ अकाली नेतृत्व मौजूद रहे। मजीठिया ने दावा किया कि 2027 में सत्ता की लड़ाई में शिअद मजबूत दावेदार के रूप में लौटेगा। पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव में बेहद कमजोर हुई थी और अब संगठन को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रही है।
अलग पहचान के लिए प्रदर्शन
भाजपा ने पहली बार यहां अलग पहचान के लिए सियासी सम्मेलन कर शक्ति प्रदर्शन किया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज चौहान, हरियाणा के सीएम नायब सैनी, प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों समेत अन्य नेताओं ने मान सरकार पर नशे और कानून-व्यवस्था को लेकर निशाना साधा और महिलाओं की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए। चौहान ने लोगों से भाजपा को पंजाब को नशामुक्त और सुरक्षित बनाने का अवसर देने की अपील की। पंजाबियों के समक्ष हरियाणा मॉडल भी पेश किया गया।
नशे पर श्वेत पत्र का दावा
अकाली दल (वारिस पंजाब दे) ने अलग पंथक सियासी कॉन्फ्रेंस की। यह सम्मेलन इसलिए खास रहा क्योंकि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पहली बार इस धड़े ने इस बड़े पारंपरिक राजनीतिक मंच पर अपनी ताकत और चुनावी दिशा को खुलकर पेश किया। सबसे बड़ा राजनीतिक एलान नशे के मुद्दे पर रहा। पार्टी ने कहा कि सत्ता में आने का मौका मिलने पर 1997 से 2027 तक पंजाब में नशे के फैलाव पर श्वेतपत्र जारी किया जाएगा।
गठजोड़ पर मान का निशाना
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसी मंच से अकाली दल पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि शिअद-भाजपा के साथ गठजोड़ के लिए बेचैन है। मान ने शिअद, भाजपा और कांग्रेस को निशाने पर लेकर आप को पंजाब के हितों की अकेली लड़ाई लड़ने वाली पार्टी के रूप में पेश किया। कांग्रेस पर हमला करते हुए मान ने उसके अंदरूनी मतभेदों को मुद्दा बनाया।